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बढ़ते तापमान में सर्वाधिक बच्चे होते हैं डिहाईड्रेशन के शिकार - डॉ सिद्धार्थ

बढ़ते तापमान में सर्वाधिक बच्चे होते हैं डिहाईड्रेशन के शिकार - डॉ सिद्धार्थ

बलिया, 9 मई 2019 - बदल रहे मौसम के मिजाज से लू लगने और संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा अधिक रहता है। सुबह से ही सूरज की किरणें शरीर पर चुभने लगती हैं। दोपहर में तेज धूप के साथ गरम हवा के थपेड़े शरीर की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर देते हैं। इस मौसम का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों पर पड़ता है। ऐसे में अभिभावकों को अपने बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
नवजात शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ॰ सिद्धार्थ मणि दूबे ने बताया कि गर्मी के मौसम में संक्रामक रोगों का दौर शुरू हो जाता है। गर्मी के मौसम में बच्चों का पाचनतंत्र कमजोर हो जाता है, जिसकी वजह से अक्सर बच्चे उल्टी-दस्त, निर्जलीकरण (डीहाईड्रेशन) से ग्रस्त हो जाते हैं। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के प्रति विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होने बताया कि यदि कोई भी  बच्चा जो स्तनपान कर रहा हो और दस्त से ग्रसित है तो इस स्थिति में  स्तनपान कराया जाएगा और साथ ही ओ0आर0एस0 के घोल को विधिपूर्वक तैयार करके शिशु को चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार निरन्तर समयान्तराल पर देते रहें। साथ ही इससे बचने के लिए साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखें। शिशु को कुछ भी खिलाने से पहले हाथ अच्छे से जरूर धो लें, क्योंकि डायरिया पैदा करने वाला विषाणु हाथों के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाता है।
        मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ॰ प्रीतम कुमार मिश्रा ने सभी आयु वर्ग के लोगों से अपील की है कि गर्मी में लू से बचने के लिए पानी अधिक मात्रा में पिएं। हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनें। अति आवश्यक कार्य न हो तो, धूप में बाहर जाने से बचें। जरूरी हो तो धूपीय चस्मा, छाता, टोपी और शरीर को पूरा ढककर बाहर निकलें। गर्मी के मौसम में तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें। घर में बने पेय पदार्थ नींबू पानी, लस्सी का प्रयोग करें, जिससे शरीर में पानी की कमी न हो। डायरिया (दस्त) होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पर तत्काल सम्पर्क स्थापित करें तथा ओ0आर0एस0 का घोल पिएं। अत्यधिक तली-भूनी चीजों को खाने से परहेज करें।