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बलिया : सपा से बलिया की सीट के उम्मीदवारों के दिल से निकल रही है यही आवाज : ये रोज रोज की बेरुखी सही नहीं जाती ...

सपा सुप्रीमो द्वारा बलिया की सीट के लिये प्रत्याशी का नाम घोषित न करने से उम्मीदवारों के दिल से निकल रही है यही आवाज : ये रोज रोज की बेरुखी सही नहीं जाती ...
मधुसूदन सिंह

लखनऊ 23 अप्रैल 2019 ।। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव द्वारा अपने कोटे की सिर्फ बलिया और महराजगंज की सीट से प्रत्याशियों के नाम के अलावा सभी जगह घोषित कर देने से बलिया के नेताओ में बेचैनी बढ़ गयी है । टिकट मिलना , न मिलना अलग बात है , सपा सुप्रीमो द्वारा जिस तरह बलिया के बड़े नेताओं से आजकल दूरी बनायी जा रही है , वह इन नेताओं को कचोट रही है । बलिया लोक सभा सीट से अपने अपने नाम की घोषणा सुनने के लिये सपा के राष्ट्रीय कार्यालय पहुंचे नेताओ के दिल से आजकल बस यही निकल रहा है --


ये रोज रोज की बेरुखी सही नहीं जाती मुझसे तेरी।
क्यों नहीं एक बार ही रुख बदल लेते अपना।
क्यों ख्वाबों को मेरे बिगाड़ने लगे हो।
तोड़ क्यों नहीं देते, देखा था जो इक सपना।


कुछ लोग तो आंखों ही आंखों से अखिलेश यादव को अपने रिश्तों को बयां करते यूं दिख रहे है --


ये तेरे इश्क का कितना हसीन एहसास है,
लगता है जैसे तू हर पल मेरे पास है,
मोहब्बत तेरी दीवानगी बन चुकी है मेरी,
अब जिंदगी की आरजू सिर्फ तुम्हारा साथ है।

बलिया लोक सभा का टिकट भी इन नेताओं को आजकल सपने में भी दिख रहा है ---
तेरे इंतजार कैसे कटता है वक़्त ना पूछ मुझसे
तेरे बगैर तन्हा रहता हूँ कैसे ना पूछ मुझसे
तू ही तू चाहिये दिल की गहराइयों में,
जीता हूं तेरे बगैर कैसे ना पूछ मुझसे
जो मिल जायेगी तू तो होगी कितनी खुशी ना पूछ मुझसे

अब जब अखिलेश जी लिफ्ट नही दे रहे है तो--

सहारे की तलाश थी तुम्हें, हम साथ हो लिए।
यूं तो ना सरे राह छोडो़, बनाकर हमसफर अपना।
तोड़ दो रिश्तो की डोर एक बार में ही।
तार तार कर, क्यों चाहते हो इसे बिखेरना।