बलिया में बोले रंग निर्देशक संजय उपाध्याय : विलुप्त हो रही लोक कलाओं को जीवंत करना और उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी हमारी
विलुप्त हो रही लोक कलाओं को जीवंत करना और उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी हमारी : संजय उपाध्याय सुप्रसिद्ध रंग निर्देशक
बलिया 7 अप्रैल 2019 ।। लोक कलाओं की सहजता, सरलता और समूह बोध की भावना ही उसकी अपनी ताकत होती है। विलुप्त हो रही लोक कलाओं को जीवंत करना और उसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी हमारी है ।मानवीय संवेदना को बचाए रखने और एक बेहतर समाज के निर्माण के लिए साहित्य कला और संस्कृति का समृद्ध होना बहुत जरूरी है। उक्त बातें शनिवार को लोक रंग उत्सव के मुख्य अतिथि श्री संजय उपाध्याय ने अपने संबोधन में कहा राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के छात्र रहे मध्य प्रदेश स्कूल आफ ड्रामा के पूर्व निदेशक श्री संजय उपाध्याय देश के जाने-माने रंग निर्देशक हैं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा की बलिया आकर मैंने महसूस किया कि यहां के रंगकर्मियों में अपनी कला के प्रति गहरा लगाव है। संकल्प के साथी जिस तरह से यहां काम कर रहे हैं मैं इनकी लगन और मेहनत को सलाम करता हूँ। सात सौ से अधिक बिदेसिया का मंचन कर चुके श्री संजय उपाध्याय ने बलिया में भी बिदेसिया के मंचन की इच्छा जाहिर की ।भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से संकल्प साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था बलिया द्वारा आयोजित दो दिवसीय लोकरंग उत्स्व की शुरुआत बहुत ही शानदार रही ।
लोकगीत के गायकों ने गायकी से बांधा शमा
उद्घाटन सत्र के के बाद संकल्प के रंगकर्मियों ने जनगीत से कार्यक्रम की शुरुआत की उसके बाद आल्हा गायन से दर्जन चौहान ने समा बांध दिया।
विलुप्त हो रही लोक गायकी आल्हा से बहुत लोग पहली बार परिचित हुए ।आल्हा गायन के बाद छपरा से पधारे प्रयोग धर्मी गायक श्री उदय नारायण सिंह ने अपनी लोक गायकी में प्रयोग करते हुए कबीर के पदों ' के तोहरा संगे जाई भंवरवा ' ' जागल रहिह हो ' को बहुत ही शानदार तरीके से प्रस्तुत किया। उसके बाद मंच संभाल युवा गायक शैलेंद्र मिश्र ने उन्होंने परंपरागत लोकगीत चैती से देर तक लोगों को झूमाया । छपरा से पधारी सृष्टि सिंह ने शादी विवाह में गाए जाने वाले परंपरागत गीतों से लोगों को जोड़ा और अपने पिता श्री उदय नारायण सिंह जी के साथ बाप बेटी के रिश्ते को बहुत ही संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया ' उतरत चइतवा ए बाबा चढ़त बइसाख देस पइसि खोजिह हो बाबा पढ़ल दमाद ' सुनकर लोगों की आंखें नम हो गई । इसके बाद मंच पर पूर्वांचल के सुप्रसिद्ध धोबिया नृत्य की टीम ने गाजीपुर के जीवन लाल और उनके साथियों के साथ अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया जिसे देख लोग मंत्रमुग्ध होगये ।
गबरघिचोर का हुआ सफल मंचन
पहले दिन की अंतिम प्रस्तुति के रुप में संकल्प द्वारा गवरघिचोर नाटक का मंचन रहा ।संकल्प रंगकर्मियों ने अपने शानदार अभिनय से दर्शकों के ऊपर अमिट छाप छोड़ी ।
हास्य व्यंग से भरपूर स्त्री विमर्श पर आधारित इस नाटक में समाज के सामने बहुत सारे सवाल भी खड़े किए भिखारी ठाकुर की अमर कृति गबरघिचोर शानदार रही। इसे मंच पर जीवंत किया आनंद कुमार चौहान , अर्जुन रावत, ट्विंकल गुप्ता , साहिल , गोविंदा और प्रकाश ने संगीत पक्ष संभाला श्री शैलेंद्र मिश्र और सोनी ने। नाल पर संगत किया सुभाष ने . कोरस में सहयोग किया राजीव राज , आशुतोष शैलेंद्र शर्मा और रोहित ने । कार्यक्रम स्थल पर लगी लोक प्रदर्शनी भी आकर्षण के केंद्र में रही. लोग प्रदर्शनी के साथ सेल्फी लेते दिखे।
आयोजन को सफल बनाने में इनका है योगदान
कार्यक्रम को सफल बनाने में उत्तर प्रदेशीय मिनिस्ट्रीयल कलेक्ट्रेट कर्मचारी संघ के अध्यक्ष श्री कौशल कुमार उपाध्याय , सांस्कृतिक एवं क्रिणा मंत्री श्री राम प्रसाद सरगम , संजय भारती , मोहन जी श्रीवास्तव , मुकेश श्रीवास्तव , अखिलेश , विवेक ,राहुल, अभिषेक ,चंदन गुप्ता की भूमिका महत्वपूर्ण रही ।
जनपद ही नही बाहर के सुप्रसिद्ध लोगो ने भी अपनी उपस्थिति से कलाकारों को किया उत्साहित
कार्यक्रम में भारी संख्या में जनपद एवं जनपद के बाहर के साहित्य कला संस्कृति से जुड़े हुए लोग उपस्थित रहे। जिसमें छपरा से प्रोफेसर पी राज सिंह, डा. अमरेन्द्र सिंह , सिवान से अमित पारिजात, गोरखपुर से आकृति विग्य., जनपद के डॉ राजेंद्र भारती, यशवंत सिंह ,ड.भोला प्रसाद आग्नेय ,ड. कादम्बिनि सिंह , संगीत प्रशिक्षक अरविंद उपाध्याय , नवचन्द तिवारी., धनंजय राय, डा. शशी सिंह डा. भवतोष पांडे , युवा संगठन मनियर के गोपाल सिंह , डा. रविशंकर गुप्ता इत्यादि सैकड़ों गणमान्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सभी कलाकारों को संकल्प की ओर से प्रतीक चिन्ह और अंगवस्त्रम से सम्मानित किया गया । बलिया के मंच पर पहली बार बिदेसिया में स्त्री पात्र की भूमिका निभाने वाली स्वेता और नम्रता को विशेष सम्मान प्रदान किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता जनपद के सुप्रसिद्ध रचनाकार वरिष्ठ साहित्यकार डॉ जनार्दन राय ने किया जबकि संचालन संकल्प सचिव रंगकर्मी आशीष त्रिवेदी ने किया।
















