बलिया में मलेरिया के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जंग :25 अप्रैल को मनाया जाएगा मलेरिया जागरूकता दिवस ,आशा व एएनएम घर-घर जाकर करेंगी जागरूक
जनपद में 25 अप्रैल को मनाया जाएगा मलेरिया जागरूकता दिवस
आशा व एएनएम द्वारा घर-घर जाकर किया जाएगा जागरूक
बलिया, 23 अप्रैल 2019 : शासन के निर्देशानुसार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रत्येक वर्ष अप्रैल माह में मलेरिया जागरूकता दिवस मनाया जाता है जिसके अंतर्गत इस वर्ष भी 25 अप्रैल को जनपद के समस्त ब्लॉकों के समस्त सामुदायिकव प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर विश्व मलेरिया जागरूकता दिवस मनाया जाएगा। उक्त दिवस के बारे में जिला मलेरिया अधिकारी आर पी निरंजन ने जानकारी दी।
जिला मलेरिया अधिकारी आर पी निरंजन ने बताया कि उक्त दिवस में जनपद के समस्त सामुदायिक/प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर एवं कार्यालय पर गोष्ठी आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही मलेरिया रोग के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु विद्यालयों में जनजागरूकता रैली का आयोजन किया जाएगा। वहीं आशा, एएनएम एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ता के द्वारा घर-घर ‘हर रविवार मच्छर पर वार’ स्लोगन का प्रचार-प्रसार कर जनमानस को जागरूक किया जाएगा। इसके साथ ही मलेरिया जांच हेतु चयनित ग्राम में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जाएगा।
उन्होने बताया कि मलेरिया एक ऐसी बीमारी है जो परजीवी रोगाणु से होती है तथा मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है। मलेरिया एक परजीवी रोगाणु से होते हैं जिसे प्लाज्मोडियम कहते हैं। यह रोगाणु व्यक्ति की लाल रक्त कोशिकाओं में फैल जाते हैं जिसके कारण मलेरिया होता है।
मलेरिया के लक्षण के बारे में उन्होंने बताया कि कोई भी बुखार मलेरिया हो सकता है। मलेरिया में व्यक्ति को ज्यादा देर तक बुखार आता है और यह बुखार प्रतिदिन 3 से 4 घंटे तक रहता है। मलेरिया 10 से 12 दिन तक व्यक्ति को प्रभावित करता है। मलेरिया में तेज बुखार के साथ ठंड लगना, उल्टी, दस्त तेज पसीना आना तथा शरीर का तापमान 100 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बढ़ जाना, सिर दर्द, शरीर में जलन तथा मलेरिया होने के पश्चात रोगी का शरीर में कमजोरी महसूस होना आदि मलेरिया के लक्षण हैं।
जिले में वर्ष 2016 में 29,119 रक्त पट्टिका बनाईं गई जिसमें से एक भी मलेरिया रोगी नहीं पाया गया। 2017 में 30,467 रक्त पट्टिका बनाईं गई जिसमें 04 मलेरिया के रोगी पाए गए, सभी का सफलतापूर्वक इलाज किया गया। 2018 में 28,508 रक्त पट्टिका बनाई गई जिसमें एक भी मलेरिया के रोगी नहीं मिला। जबकि वर्ष 2019 से मार्च 2019 तक 6,360 रक्त पट्टिका बनाई गई जिसमें मलेरिया का एक भी रोगी नही पाया गया।*
बचाव एवं उपचार के संदर्भ में जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि जन समुदाय अपने घर के आस-पास साफ- सफाई रखें, जल भराव न होने दें क्योंकि बरसात के समय में गड्ढों में, बड़े बर्तनों में, टायरों में जल जमा हो जाता है तथा ज्यादा दिन तक एक ही स्थान पर इकट्ठा रहने के कारण मच्छर के अंडाणु पानी में पनपते हैं और ज्यादा संख्या में मच्छरों को जन्म देते हैं। इसके अलावा व्यक्ति सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें एवं मास कीटोक्रीम अवश्य लगाएं।
उपचार के संदर्भ में उन्होने बताया कि व्यक्ति बाहर का भोजन कम करें क्योंकि संक्रमित मच्छर खाने पर बैठते हैं और मलेरिया फैलाते हैं। व्यक्ति सदैव पानी उबालकर पिए जिससे मलेरिया जैसी बीमारी को नियंत्रित किया जा सके।
आशा व एएनएम द्वारा घर-घर जाकर किया जाएगा जागरूक
बलिया, 23 अप्रैल 2019 : शासन के निर्देशानुसार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रत्येक वर्ष अप्रैल माह में मलेरिया जागरूकता दिवस मनाया जाता है जिसके अंतर्गत इस वर्ष भी 25 अप्रैल को जनपद के समस्त ब्लॉकों के समस्त सामुदायिकव प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर विश्व मलेरिया जागरूकता दिवस मनाया जाएगा। उक्त दिवस के बारे में जिला मलेरिया अधिकारी आर पी निरंजन ने जानकारी दी।
जिला मलेरिया अधिकारी आर पी निरंजन ने बताया कि उक्त दिवस में जनपद के समस्त सामुदायिक/प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर एवं कार्यालय पर गोष्ठी आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही मलेरिया रोग के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु विद्यालयों में जनजागरूकता रैली का आयोजन किया जाएगा। वहीं आशा, एएनएम एवं स्वास्थ्य कार्यकर्ता के द्वारा घर-घर ‘हर रविवार मच्छर पर वार’ स्लोगन का प्रचार-प्रसार कर जनमानस को जागरूक किया जाएगा। इसके साथ ही मलेरिया जांच हेतु चयनित ग्राम में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जाएगा।
उन्होने बताया कि मलेरिया एक ऐसी बीमारी है जो परजीवी रोगाणु से होती है तथा मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है। मलेरिया एक परजीवी रोगाणु से होते हैं जिसे प्लाज्मोडियम कहते हैं। यह रोगाणु व्यक्ति की लाल रक्त कोशिकाओं में फैल जाते हैं जिसके कारण मलेरिया होता है।
मलेरिया के लक्षण के बारे में उन्होंने बताया कि कोई भी बुखार मलेरिया हो सकता है। मलेरिया में व्यक्ति को ज्यादा देर तक बुखार आता है और यह बुखार प्रतिदिन 3 से 4 घंटे तक रहता है। मलेरिया 10 से 12 दिन तक व्यक्ति को प्रभावित करता है। मलेरिया में तेज बुखार के साथ ठंड लगना, उल्टी, दस्त तेज पसीना आना तथा शरीर का तापमान 100 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बढ़ जाना, सिर दर्द, शरीर में जलन तथा मलेरिया होने के पश्चात रोगी का शरीर में कमजोरी महसूस होना आदि मलेरिया के लक्षण हैं।
जिले में वर्ष 2016 में 29,119 रक्त पट्टिका बनाईं गई जिसमें से एक भी मलेरिया रोगी नहीं पाया गया। 2017 में 30,467 रक्त पट्टिका बनाईं गई जिसमें 04 मलेरिया के रोगी पाए गए, सभी का सफलतापूर्वक इलाज किया गया। 2018 में 28,508 रक्त पट्टिका बनाई गई जिसमें एक भी मलेरिया के रोगी नहीं मिला। जबकि वर्ष 2019 से मार्च 2019 तक 6,360 रक्त पट्टिका बनाई गई जिसमें मलेरिया का एक भी रोगी नही पाया गया।*
बचाव एवं उपचार के संदर्भ में जिला मलेरिया अधिकारी ने बताया कि जन समुदाय अपने घर के आस-पास साफ- सफाई रखें, जल भराव न होने दें क्योंकि बरसात के समय में गड्ढों में, बड़े बर्तनों में, टायरों में जल जमा हो जाता है तथा ज्यादा दिन तक एक ही स्थान पर इकट्ठा रहने के कारण मच्छर के अंडाणु पानी में पनपते हैं और ज्यादा संख्या में मच्छरों को जन्म देते हैं। इसके अलावा व्यक्ति सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें एवं मास कीटोक्रीम अवश्य लगाएं।
उपचार के संदर्भ में उन्होने बताया कि व्यक्ति बाहर का भोजन कम करें क्योंकि संक्रमित मच्छर खाने पर बैठते हैं और मलेरिया फैलाते हैं। व्यक्ति सदैव पानी उबालकर पिए जिससे मलेरिया जैसी बीमारी को नियंत्रित किया जा सके।



