अफसर पति का शव लेने वर्दी पहनकर एयरपोर्ट पहुंची स्क्वाड्रन लीडर पत्नी

1 मार्च 2019 ।।
(नासिर हुसैन)
भारत-पाकिस्तान में तनाव के बीच 27 फरवरी की सुबह जम्मू-कश्मीर के बडगाम इलाके में इंडियन एयर फोर्स का एक चौपर क्रैश हो गया था. अधिकारियों का कहना था कि ये क्रैश टेक्निकल फेल्यर की वजह से हुआ है. इस घटना में एयर फोर्स के दो अफसर और चार जवान शहीद हुए थे. वहीं एक स्थानीय युवक की भी इस घटना में मौत हो गई थी. शहीद होने वाले चार जवानों में दीपक पांडेय, पंकज सिंह और विशाल कुमार पांडेय यूपी के थे ।
स्कॉड्रन लीडर निनाद मंडावगने ने बेटी से किया था ये वादा
स्कॉड्रन लीडर निनाद मंडावगने ने बेटी से किया था ये वादा
स्कॉड्रन लीडर निनाद मंडावगने की बेटी का कुछ दिन पहले ही बर्थ डे मनाया गया था. हालांकि निनाद बेटी को आर्शीवाद देने नहीं पहुंच सके थे, क्योंकि बॉर्डर पर हालात को देखते हुए सभी की छुट्टियां कैंसिल कर दी गई थी. लेकिन निनाद ने अपनी बेटी से वादा किया था कि ‘क्या हुआ जो आज मैं तुम्हारे बर्थ डे पर नहीं हूं. लेकिन जल्द ही हम सब मिलकर एक बार फिर से तुम्हारा बर्थ डे मनाएंगे और मैं जल्द ही घर आऊंगा.
निनाद क्रेश होने वाले हेलीकॉप्टर एमआई-17 के पायलट थे. इसे दो लोग उड़ा रहे थे. निनाद के पिता अनिल मंडावगने ने कहा है कि मुझे मेरे बेटे पर गर्व है. उसने देश के लिए प्राण न्यौछावर कर दिए. वो मानसिक तौर पर मज़बूत था. और जब से एयर फोर्स जॉइन की थी, वो किसी भी हालात का सामना करने के लिए तैयार था.
स्क्वाड्रन लीडर सिद्धार्थ वशिष्ठ उड़ा रहे थे हेलीकॉप्टर
स्क्वाड्रन लीडर सिद्धार्थ वशिष्ठ चण्डीगढ़ के रहने वाले थे. उनकी पत्नी आरती भी एयर फोर्स स्क्वाड्रन लीडर हैं. पांच साल पहले ही दोनों की शादी हुई थी. शहीद सिद्धार्थ का पार्थिव शरीर पहले दिल्ली और फिर चंडीगढ़ ले जाया गया. शहीद की पत्नी स्क्वाड्रन लीडर आरती वशिष्ठ वर्दी पहनकर शहीद पति के शव को लेने एयरपोर्ट पहुंची. इस दौरान वायुसेना के अधिकारी भी उनके साथ रहे हैं.
सूबेदार पिता को विंग कमांडर ने बताया पंकज शहीद हो गया है
मथुरा के रहने वाले पंकज कुमार एयर फोर्स में कॉरपोरल थे. उनके पिता नौबत सिंह सेना में सूबेदार की रैंक से रिटायर हैं. 15 दिन पहले ही पंजक छुट्टी बिताकर वापस अपनी यूनिट में गए थे. पंकज की शादी 2015 में मेघा से हुई थी. उनका एक पंद्रह महीने का बेटा रुद्राक्ष है. पिता नौबत का कहना है कि देश के लिए तो मैं अपने और बेटों को भी कुर्बान कर सकता हूं.
वाराणसी के विशाल ने मां से कहा था होली पर आऊंगा
विशाल पांडेय वाराणसी के पांडेयपुर स्थित हुकुलगंज के निवासी थे. विशाल के घर में पिता विजय शंकर पांडेय, मां विमला पांडेय, छोटी बहन वैष्णवी व अन्य परिजन हैं. दिसंबर 2017 को बड़ी बहन की शादी हुई थी. विशाल की पत्नी माधवी और दो बच्चे हैं जिनमें सात साल का विशेष, पांच साल की बेटी धारा हैं. पिता विजय शंकर ने कहा मेरा तो सब कुछ चला गया, बस सेना मेरे बेटे का बदला ले. मुझे रोना नहीं है बल्कि की खुशी है, बेटा देश के नाम शहीद हो गया. मां विमला ने कहा कि, मेरे बेटे ने होली पर आने का वादा किया था, लेकिन आया तो तिरंगे में लिपटे हुए.
कानपुर के थे शहीद होने वाले कारपोरल दीपक पांडेय
एयरफोर्स के शहीद जवान दीपक पांडेय का पार्थिव शरीर गुरुवार शाम कानपुर पहुंच गया था. कानपुर के चकेरी एयर फोर्स स्टेशन पर एयरफोर्स के अफसरों, परिवार के लोगों के साथ रिटायर अफसर भी थे. शहीद का पार्थिव शरीर सेवन एयरफोर्स हॉस्पिटल लाया गया. देर हो जाने के कारण गुरुवार को अंतिम संस्कार नहीं हो सका था. शहीद दीपक चकेरी मंगला विहार सेकेंड के रहने वाले थे.
स्थानीय निवासी किफायत की भी गई जान
बडगाम में जिस जगह हेलीकॉप्टर क्रेश हुआ वहीं स्थानीय निवासी किफायत गनई काम कर रहे थे. तभी वो इस घटना का शिकार हो गए. गनई की मौत पर कई स्थानीय अधिकारी उनके घर अफसोस जाहिर करने भी पहुंचे. जिला उपायुक्त बडगाम डॉ. सईद सहरीश असगर अधिकारियों के एक दल के साथ किफायत गनई के घर पहुंचे. उन्होंने किफायत की मौत पर दुख जताते हुए उनके परिजनों एसडीआरएफ के तहत चार लाख रुपये की राहत राशि का एक चेक भी सौंपा. और यकीन दिलाया कि प्रशासन उनकी हर तरह से मदद करेगा. वहीं वह एयरफोर्स के अधिकारियों से भी बात करेंगे कि वो गनई के परिवार की कुछ मदद करें.
हादसे के दो दिन बाद मिली पिस्टल
ग्रेंद कलां में जहां हादसे के बाद हेलीकॉप्टर गिरा है, वहां मलबे की तलाशी लेते हुए एक किशोर को एक पिस्टल मिली है. पिस्टल को लेकर जैसे ही वो अपने घर पहुंचा, उसके परिजनों ने पिस्टल अपने कब्जे में ले ली. इसके बाद पुलिस को सूचित किया. पुलिस ने मौके पर पहुंच कर पिस्टल को अपने कब्जे में ले लिया. अधिकारियों ने बताया कि यह पिस्टल हादसे में मारे गए वायुसेना के किसी एक अधिकारी का होगा.
रूस में बना है MI-17 चौपर
MI रूस में बनने वाले सैन्य चौपर हैं. MI-17 का मतलब है इस सीरीज का एक चौपर. ऐसे कई दूसरे चौपर भी हैं. इसका इतिहास पुराना है. इन्हें रोस्टेक स्टेट कॉर्पोरेशन बनाती है, जो रूस की पब्लिक सेक्टर कंपनी है. इसी कंपनी का एक विंग है रशियन हेलिकॉप्टर्स. MI-17 को बनाने का जिम्मा इसी के पास है. पहली बार 1980 के दशक में ये भारत लाया गया था ।
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MI-17 मिलिट्री ट्रांसपोर्ट हेलिकॉप्टर है. मतलब, आर्मी के जवान और ज़रूरी सामान ट्रांसपोर्ट करने के काम आता है. इसका इस्तेमाल सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन में भी किया जा सकता है. ज़रूरत होने पर इसमें हथियार लगाए जा सकते हैं. MI-17 को 1980 के दशक में इंडियन फोर्स में शामिल किया गया था. बाद में नए अपग्रेड आए और ज़रूरत मुताबिक भारत इसे खरीदता रहा. रशिया 2008 से 2014 तक कुल 160 MI-17V-5 चौपर भारत को सौंप चुका है ।
(साभार न्यूज18)
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Reviewed by बलिया एक्सप्रेस
on
March 01, 2019
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