जानिए कब और किसने बदला संविधान, कैसे हुआ संविधान में जातिगत संशोधन
सामान्य वर्ग (ब्राह्मण क्षत्रिय भूमिहार लाला बनिया के साथ ही शेख पठान सैय्यद सिख ईसाई जिनको आरक्षण नहीं मिलता है ), ओबीसी (लगभग 78%) को नियंत्रित करता 22-24% आबादी वाला एससी/एसटी क़ानून
लखनऊ।। जानिए कब और किसने बदला संविधान, कैसे हुआ संविधान में जातिगत संशोधन
सन 1951 सर्व दल की सरकाओ, प्रधानमंत्री थे जवाहरलाल नेहरू ,उन्होंने पहला संशोधन किया और 10 साल के लिए शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत आरक्षण लागू किया।
सन 1959 कांग्रेस की सरकार, प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने आठवां संशोधन करके लोकसभा विधानसभा में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति का आरक्षण 10 वर्ष के लिए बढ़ा दिया।
सन 1969 कांग्रेस की सरकार प्रधानमंत्री थीं श्रीमती इंदिरा गांधी, 23 वा संविधान संशोधन करके लोकसभा विधानसभा में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति का आरक्षण 10 वर्ष के लिए बढ़ा दिए गए।
सन 1980 कांग्रेस की सरकार,प्रधानमंत्री थीं श्रीमती इंदिरा गांधी, 45 वा संविधान संशोधन करके लोकसभा विधानसभा में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति का आरक्षण 10 वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया।
सन 1990 जनता दल की सरकार बीपी सिंह प्रधानमंत्री,ने 62 वा संविधान संशोधन करके अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण को 10 वर्ष के लिए बढ़ा दिया।
सन 1993 कांग्रेस की सरकार थी और प्रधानमंत्री थे नरसिंह राव, इन्होंने 73 वा संविधान संशोधन करके,पंचायत में अनुसूचित जाति अनुसूचित और ओबीसी को आरक्षण देने का कानून बना दिया।
सन 1993 कांग्रेस की सरकार प्रधानमंत्री नरसिंहा राव ने 74 वा संविधान संशोधन करके शहरी निकायों में एससी एसटी ओबीसी को आरक्षण देने का कानून बनाया।
सन 1995 कांग्रेस की सरकार प्रधानमंत्री नरसिंहा राव ने 77 वा संविधान संशोधन के द्वारा अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति को पदोन्नति में आरक्षण का कानून बनाया।
सन 1999 भाजपा की सरकार प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने 79 वा संविधान संशोधन करके लोकसभा विधानसभा में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण को 10 साल के लिए बढ़ा दिया।
सन 2000 भाजपा की सरकार, अटल बिहारी वाजपेई प्रधानमंत्री ने 81 वा संविधान संशोधन करके योग उम्मीदवारों के न मिलने की दशा में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति की सीटों को खाली छोड़ने का कानून बनाया।
सन 2000 भाजपा की सरकार,अटल बिहारी वाजपेई प्रधानमंत्री ने 82 वा संविधान संशोधन करके नौकरी व पदोन्नति में अनुसूचित जनजाति अनुसूचित जाति के लिए मेरिट कम करने की छूट का कानून बनाया।
सन 2001 भाजपा की सरकार, अटल बिहारी वाजपेई प्रधानमंत्री ने आरक्षण में पदोन्नति पाने वाले अनुसूचित जाति जनजाति को वरिष्ठता का लाभ देने का कानून बनाया।
सन 2003 भारतीय जनता पार्टी की सरकार, अटल बिहारी वाजपेई प्रधानमंत्री ने 89 वा संविधान संशोधन करके अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के लिए अलग-अलग राष्ट्रीय आयोग बनाने का कानून बनाया।
सन 2006 कांग्रेस की सरकार, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 93 वा संविधान संशोधन करके प्राइवेट शिक्षण संस्थानों में भी अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति ओबीसी के छात्रों के लिए आरक्षण का कानून बनाया।
सन 2009 कांग्रेस की सरकार, मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री ने 95वा संविधान संशोधन करके लोकसभा विधानसभा में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण को 10 वर्ष के लिए बढ़ाया।
सन 2019 भाजपा की सरकार, नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री ने 104 वा संविधान संशोधन करके लोकसभा विधानसभा में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के आरक्षण को 10 वर्ष के लिए बढ़ाया।
विशेष...
सन 1989 में कांग्रेस की सरकार के प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति एक्ट को पारित किया लेकिन चुनाव के अंतिम क्षण में या कानून बनने के कारण इसको लागू नहीं कर पाए
सन 1990 में जनता दल और बीजेपी की संयुक्त सरकार इसके प्रधानमंत्री बीपी सिंह ने एबीपी सिंह थे ने राजीव गांधी द्वारा पारित अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति एक्ट को लागू किया
सन 2015 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति एक्ट में संशोधन करके अपराधों की संख्या को 22 से 47 किया। इसी संशोधन में अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के दिवंगत महापुरुषों के निरादर को अपराध की श्रेणी में माना गया। इसका अर्थ यह हुआ कि अगर कोई दलित समुदाय का व्यक्ति रावण को अपना महापुरुष मानकर रामलीला मे उसको जलाने को दलितों के महापुरुषों का निरादर मानकर तहरीर दे दे तो मुकदमा आयोजकों पर दर्ज हो जायेगा, या कोई बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर को केवल भीम राव अम्बेडकर ही कह दे और किसी को यह निरादर लग जाये तो मुकदमा दर्ज हो जायेगा।
इस कानून के बनने के बाद महाराष्ट्र में सरकारी संस्थान के डायरेक्टर काशीनाथ महाजन पर उनके चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने हहरिजन एक्ट का मुकदमा कायम कर दिया जिसको लेकर श्री महाजन सर्वोच्च न्यायालय की शरण मे गये,जिसमें सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि यह कानून अतिरेक्त है,संविधान के मूलभूत फंडामेंटल राइट के खिलाफ है और इस पर रोक लगा दिया। साथ ही इसको लागू करने के लिए कुछ गाइडलाइन जारी कर दी।
सन 2016 में बीजेपी की नरेंद्र मोदी सरकार ने अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति रूल्स में संशोधन करके शिकायतकर्ता को एक लाख से लेकर 8 लाख तक हर्जाना देने का कानून पारित कर दिया, चाहे शिकायतकर्ता को भौतिक या अन्य कोई क्षति पहुंची हुई या ना पहुंची हो उसको यह राशि मिलने का कानून बना दिया गया, इसमें शिकायतकर्ता को एक लाख से लेकर 8 लख रुपए तक के हर्जाना देने का क़ानून है।25% मुकदमा लिखते ही, 50% चार्जशीट कोर्ट मे जाते ही मिल जाती है।
सन 2018 में भारतीय जनता पार्टी की नरेंद्र मोदी सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति कानून पर दिए गए निर्णय को पलटते हुए अग्रिम जमानत पर रोक लगाने का कानून पारित कर दिया।
आरक्षण का खेला, क्या सामान्य व ओबीसी ने है समझा
मूल संविधान लागू हो , सारे आरक्षण के संशोधन खत्म हो, इस बात से कितना सहमत है?
आंखे खोलिये सामान्य व ओबीसी, देखिये आपके साथ कितना धोखा हुआ है,22- 24 प्रतिशत को इतने अधिकार, 78 % सामान्य व ओबीसी लाचार
आखिर इस वर्ग पर इतनी मेहरबानी क्यों?
सिर्फ लोकसभा मे 131 एससी /एसटी सांसद के लिये तीन चौथाई को प्रताड़ित करना कब होगा बंद
देश मे सरकार ने जनता को आरक्षण के आधार पर चार वर्गों मे बांट रखा है -
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सामान्य ओबीसी एससी एसटी
आरक्षण नहीं क्रीमी लेयर को नहीं अमीर गरीब सभी को
EWS को 10% 8 लाख से नीचे वाले सभी अमीर गरीब को
गरीबों को गरीबों को
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सामान्य व ओबीसी की आबादी लगभग 78 प्रतिशत
एससी / एसटी की आबादी लगभग 22-24 प्रतिशत
कुल 17 संविधान संशोधनों (एससी /एसटी क़ानून ) मे से 14 सामान्य व ओबीसी के खिलाफ, शेष तीन मे भी एससी/ एसटी शामिल
(पंकज त्रिपाठी क़ानून विशेषज्ञ )







