हनुमान जी का सम्पूर्ण जीवन साधना और समर्पण का प्रतीक: प्रो गिरीश चन्द्र त्रिपाठी
वक्ताओं ने कहा कि लोक कथाओं में हनुमान एक अमूल्य धरोहर
प्रयागराज।।झूंसी स्थित सेंट्रल एकेडमी प्रांगण में रविवार को वरिष्ठ साहित्यकार एवं रचयिता श्री प्रमोद बरार की नवीनतम पुस्तक 'लोक कथाओं में हनुमान' (हिंदी एवं अंग्रेजी संस्करण) का भव्य लोकार्पण समारोह संपन्न हुआ।
समारोह के मुख्य अतिथि बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो० गिरीश चन्द्र त्रिपाठी ने पुस्तक का विमोचन करते हुए कहा कि, "श्री प्रमोद बरार जी द्वारा रचित यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करेगी। हनुमान जी का संपूर्ण जीवन साधना और समर्पण का प्रतीक है, जिन्होंने अपने शरीर को ही भक्ति की प्रयोगशाला बनाया। लोक कथाओं के माध्यम से उनके इस पावन स्वरूप को जन-जन तक पहुँचाने का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है।"
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सेंट्रल एकेडमी के निदेशक श्री एस. के. तिवारी ने कहा कि विद्यालय प्रांगण में ऐसी कालजयी रचना का लोकार्पण होना समस्त संस्थान के लिए गौरव की बात है। विशिष्ट अतिथि पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री विजय शंकर शुक्ल एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ० विजयानन्द ने पुस्तक की विषय-वस्तु और लोक-संस्कृति में हनुमान जी की अनकही कथाओं के संकलन की प्रशंसा की।
इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। विषय प्रवर्तक डॉ० भगवान प्रसाद उपाध्याय (संपादक एवं संयोजक, भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ) ने पुस्तक के वैचारिक एवं साहित्यिक पक्ष पर विस्तार से प्रकाश डाला।
समारोह का कुशल संचालन श्री शंकर देव त्रिपाठी ने किया। अंत में रचयिता श्री प्रमोद बरार ने सभी आगत अतिथियों एवं विद्वज्जनों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक, साहित्य प्रेमी एवं प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।







