बिलासपुर में भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के तीन साहित्यकारों का बजा डंका, बलिया से 4 साहित्यकार हुए साहित्य गौरव सम्मान से सम्मानित
भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. सुनील कुमार ओझा बने मुख्य वक्ता
तीन अन्य साहित्यकारों ने भी प्रस्तुत किए शोधपत्र
बलिया।। साहित्य और राष्ट्रीय चिंतन के क्षेत्र में बलिया की साहित्यिक पहचान को एक बार फिर राष्ट्रीय मंच पर गौरव मिला। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में आयोजित विकास संस्कृति साहित्य अकादमी एवं विकास संस्कृति अभियंता अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय अधिवेशन एवं विकास संस्कृति महोत्सव-2026 में बलिया के चार साहित्यकारों को ‘साहित्य गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सम्मान पाने वालों में डॉ. सुनील कुमार ओझा, डॉ. आदित्य कुमार अंशु, फतेहचंद बेचैन तथा डॉ. रमाशंकर वर्मा मनहर शामिल रहे।
बिलासपुर के रिगल होटल, पुराना बस अड्डा में आयोजित समारोह में साहित्य सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार पाठक रहे। कार्यक्रम में साहित्य एवं तकनीकी क्षेत्र से जुड़ी अनेक विभूतियों ने सहभागिता की। आयोजन महान अभियंता एवं साहित्यकार डॉ. एम. विश्वेश्वरैया की 166वीं जयंती के अवसर पर अभियंता दिवस समारोह के रूप में भी आयोजित किया गया।
राष्ट्रीय संगोष्ठी का केंद्रीय विषय ‘राष्ट्रकवि की अवधारणा और भारत के राष्ट्रकवि’ रहा। संगोष्ठी में दो दर्जन से अधिक शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। इसमें बलिया के प्राध्यक डॉ. सुनील कुमार ओझा ने मुख्य वक्ता के रूप में विषय पर अपने विचार रखे, जबकि डॉ. आदित्य कुमार अंशु विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं फतेहचंद बेचैन एवं डॉ. रमाशंकर वर्मा मनहर ने शोधपत्र प्रस्तुत कर संगोष्ठी में सहभागिता की। इस कार्यकम में सबसे मुख्य बात यही रही कि अभियंता और साहित्यकार कृष्ण चरित्र मानस के रचयिता 86 वर्षीय श्री अमर नाथ त्यागी ने 1 करोड़ की राशि विलासपुर में हिंदी भवन बनाए जाने हेतु दिया।
संगोष्ठी में राष्ट्रकवि डॉ. वृजेश सिंह के साहित्य को विशेष केंद्र में रखा गया। उनके चर्चित महाकाव्य ‘आहुति’ और ‘वेदमूर्ति’ को आधार बनाकर डॉ. रविंद्र पूंजाराम ठाकरे द्वारा संपादित लगभग 500 पृष्ठीय ग्रंथ ‘राष्ट्रकवि की अवधारणा और भारत के राष्ट्रकवि’ का विमोचन किया गया तथा इसी विषय पर शोधपरक विमर्श हुआ। कार्यक्रम में आहुति महाकाव्य के संपादक डॉ जितेंद्र कुमार सिंह संजय ने भी अपने विचार रखे। इसके साथ ही डॉ. मोतिम वर्मा गंगा द्वारा रचित पुस्तक ‘राष्ट्रकवि डॉ. बृजेश सिंह के साहित्य में अभिव्यक्त राष्ट्रीय चेतना’ का भी विमोचन किया गया।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रकवि डॉ. बृजेश सिंह भी बलिया की धरती से जुड़े साहित्यकार हैं। इस प्रकार बिलासपुर में आयोजित राष्ट्रीय साहित्यिक मंच पर एक ही आयोजन में बलिया के चार साहित्यकारों का सम्मान तथा बलिया से जुड़े राष्ट्रकवि डॉ. बृजेश सिंह के साहित्य पर केंद्रित विमर्श ने जिले की साहित्यिक उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित किया।











