सावन को क्यों कहा जाता है सर्वोत्तम मास, सावन मे क्या करें और क्या न करें, कैसे करें भोलेनाथ को प्रसन्न
लखनऊ।। हिंदू सनातन परंपरा में *सावन (श्रावण) मास* को सभी महीनों में सर्वश्रेष्ठ और भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, श्रावण नक्षत्र से युक्त होने के कारण इस मास का नाम 'श्रावण' पड़ा। यह महीना भक्ति, साधना, आत्म-शुद्धि और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने का पावन अवसर है।
1. सावन मास का महात्म्य (शास्त्रीय संदर्भ)
शिव पुराण और स्कंद पुराण में सावन मास के महात्म्य का विस्तार से वर्णन मिलता है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान जब कालकूट विष निकला, तो उसकी तीव्र ज्वाला से सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष को अपने कण्ठ में धारण कर लिया था। विष के ताप को शांत करने के लिए सभी देवों ने उन पर जल अर्पण किया था। इसीलिए सावन में जलभिषेक का विशेष महत्त्व है।
स्कंद पुराण के अनुसार "न श्रावण समो मासो न देवः केशवात्परः।" अर्थात् श्रावण के समान कोई श्रेष्ठ महीना नहीं है और विष्णु के समान कोई देव नहीं है।
2. सावन में किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठान (क्या करें)
सावन में भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित धार्मिक कार्य और अनुष्ठान करने का विधान है-
रुद्राभिषेक
सावन में शिवलिंग पर जल, दूध, दही, शहद, घी, और गंगाजल से रुद्राभिषेक करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।
बिल्वपत्र और भांग-धतूरा अर्पण: शास्त्रों के अनुसार “त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रयायुधम्”—तीन पत्तों वाला बिल्वपत्र शिवजी को अति प्रिय है।
सोमवार व्रत एवं मङ्गला गौरी व्रत
सावन के सोमवार को भगवान शिव का और मंगलवार को माता पार्वती (मङ्गला गौरी) का व्रत रखने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
मंत्र जाप
'ॐ नमः शिवाय' या *महामृत्युंजय मंत्र* का नित्य जाप करने से मानसिक शांति और आरोग्यता प्राप्त होती है।
कांवड़ यात्रा एवं दान
इस माह में गंगाजल लाकर शिवजी को चढ़ाना तथा यथाशक्ति अन्न, वस्त्र और छाते का दान करना शुभ माना जाता है।
3. सावन में वर्जित धार्मिक कार्य (क्या ना करें)
क्रोध और कटु वचन
किसी का अपमान न करें और अपने मन में ईर्ष्या या क्रोध न लाएं।
तामसिक विचारों से दूरी
घर में अशांति या कलह का माहौल न बनने दें।
शिवलिंग पर केतकी का फूल और हल्दी न चढ़ाएं
पौराणिक कथाओं के अनुसार केतकी के फूल को शिव पूजा में वर्जित माना गया है, और हल्दी सौभाग्य सामग्री होने के कारण शिवलिंग (जो वैराग्य का प्रतीक हैं) पर नहीं चढ़ाई जाती।
शरीर पर तेल मलना
सावन के महीने में शरीर पर तेल लगाना और दाढ़ी या बाल कटवाना वर्जित माना गया है।
4. भोजन एवं आहार नियम (शास्त्र और स्वास्थ्य का दृष्टिकोण)
आयुर्वेद और शास्त्रों में सावन महीने में खान-पान को लेकर बहुत स्पष्ट नियम दिए गए है --
क्या चीज़ें वर्जित हैं?
कढ़ी और दही का सेवन
“सावणे वर्जयेच्छाकं भाद्रे दधि तथैव च”*—अर्थात् सावन में साग (हरी पत्तेदार सब्जियां) और भादों में दही का त्याग करना चाहिए।
हरी पत्तेदार सब्जियां (साग)
वर्षा ऋतु में कीट-पतंगों की वृद्धि होती है, जिससे हरी सब्जियों में सूक्ष्म जीव व वात दोष बढ़ाने वाले तत्त्व आ जाते हैं।
दूध का सीमित प्रयोग
सावन में गाय-भैंसें जो चारा खाती हैं, उसमें वर्षा के कारण वात दोष होता है। इसलिए इस माह दूध शिवजी को अर्पित करने का विधान है, स्वयं पीने के बजाय पचाना कठिन होता है।
तामसिक भोजन
मांस, मछली, अंडा, प्याज, लहसुन और मदिरा का पूरी तरह त्याग करें।
बैंगन
आयुर्वेद और शास्त्रों के अनुसार सावन में बैंगन में कीड़े लगने की संभावना अधिक होती है, इसे अशुद्ध माना गया है।
5. स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से सावन में सावधानियां
आयुर्वेद में सावन मास को ''वात दोष'' के प्रकोप का समय माना गया है। वर्षा ऋतु के कारण शरीर की जठराग्नि (पाचन अग्नि) मंद पड़ जाती है।
क्या करें? क्या न करें
पाचन एवं आहार
सुपाच्य, हल्का और ताजा पका हुआ भोजन लें। अदरक, तुलसी और सेंधा नमक का प्रयोग करें। बासी भोजन, अत्यधिक तला-भुना और गरिष्ठ भोजन न खाएं।
जल सुरक्षा
हमेशा पानी उबालकर या स्वच्छ करके पीएं। | दूषित या खुला हुआ पानी न पीएं (क्योंकि जल जनित बीमारियां बढ़ती हैं)।
व्रत और उपवास
सप्ताह में एक दिन व्रत रखें ताकि पाचन तंत्र को आराम मिले। | बिना डॉक्टरी सलाह के अत्यधिक कठिन या निर्जला व्रत न रखें यदि स्वास्थ्य ठीक न हो।
दिनचर्या
हल्का व्यायाम, योग और प्राणायाम करें। | दिन में सोने से बचें (दिन में सोने से कफ और वात दोष बढ़ता है)।
सार रूप में
सावन मास केवल धार्मिक आस्था का ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संतुलन का भी महीना है। ईश्वर की भक्ति के साथ-साथ संयमित आहार और अनुशासित जीवनशैली अपनाकर हम शारीरिक और मानसिक रूप से पूर्णतः स्वस्थ रह सकते हैं।
(राजू बाबू सिंह रिटायर्ड आईपीएस लखनऊ)







