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दागी अधिवक्ताओं पर यूपी बार काउंसिल का सख्त रुख, 15 दिन में मांगी आपराधिक मामलों वाले वकीलों की सूची

 



इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में सभी बार एसोसिएशनों को निर्देश

आदेश की अनदेखी पर संबद्धता समाप्त करने और रिपोर्ट हाईकोर्ट भेजने की चेतावनी

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में अधिवक्ताओं के विरुद्ध लंबित गंभीर आपराधिक मामलों को लेकर बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने सख्त कदम उठाया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में काउंसिल ने प्रदेश की सभी संबद्ध बार एसोसिएशनों को निर्देश जारी करते हुए ऐसे अधिवक्ताओं का ब्यौरा 15 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने को कहा है, जिनके खिलाफ गंभीर अपराधों में प्राथमिकी दर्ज है, पुलिस द्वारा आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया जा चुका है अथवा जिनके विरुद्ध आपराधिक मुकदमे न्यायालय में विचाराधीन हैं। इस संबंध में बार काउंसिल के सचिव की ओर से 23 जुलाई 2026 को आधिकारिक पत्र जारी कर सभी बार एसोसिएशनों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।


जारी निर्देश के अनुसार प्रत्येक बार एसोसिएशन अपने यहां पंजीकृत अधिवक्ताओं का रिकॉर्ड खंगालकर निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत सूची बार काउंसिल को भेजेगी। काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में की जा रही है। पत्र के साथ न्यायालय के आदेश की प्रति भी उपलब्ध कराई गई है ताकि सभी बार एसोसिएशन निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार समयबद्ध तरीके से जानकारी उपलब्ध करा सकें।


बार काउंसिल ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई बार एसोसिएशन निर्धारित 15 दिनों की अवधि में मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराती है तो इसे आदेश की अवहेलना माना जाएगा। ऐसी स्थिति में संबंधित बार एसोसिएशन की बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश से संबद्धता समाप्त की जा सकती है। इसके अलावा उस बार एसोसिएशन के सदस्यों को बार काउंसिल द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी एवं लाभकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं दिया जाएगा। काउंसिल ने यह भी कहा है कि आदेश की अवमानना से संबंधित रिपोर्ट माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट को भेजी जाएगी।


आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए इसकी प्रतिलिपि प्रदेश के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों, जिलाधिकारियों, पुलिस आयुक्तों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों, पुलिस अधीक्षकों, उपजिलाधिकारियों तथा नायब तहसीलदारों को भी प्रेषित की गई है। संबंधित अधिकारियों से अपेक्षा की गई है कि वे अपने-अपने जिले और तहसील क्षेत्र की प्रत्येक बार एसोसिएशन तक यह आदेश पहुंचाना सुनिश्चित करें, जिससे निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी स्थानों से जानकारी बार काउंसिल को उपलब्ध कराई जा सके।


गौरतलब है कि न्यायालय के समक्ष विचाराधीन मामलों में किसी व्यक्ति के विरुद्ध एफआईआर दर्ज होना या चार्जशीट दाखिल होना दोष सिद्ध होने के समान नहीं माना जाता। किसी भी अधिवक्ता के दोषी या निर्दोष होने का अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय द्वारा ही किया जाएगा। बार काउंसिल की यह कार्रवाई केवल न्यायालय के निर्देशानुसार तथ्यात्मक जानकारी संकलित करने और अधिवक्ता संस्थाओं में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने की प्रक्रिया का हिस्सा है।