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कबीर के विचारों और भोजपुरी अस्मिता की गूंज से सराबोर हुआ इसारी सलेमपुर, विचार एवं कवि गोष्ठी सम्पन्न

 






डॉ सुनील कुमार ओझा


सलेमपुर बलिया।। डॉ. राम सेवक विकल साहित्य कला संगम सेवा ट्रस्ट (न्यास) के तत्वावधान में विश्व भोजपुरी दिवस एवं संत कबीर प्राकट्य दिवस के अवसर पर सोमवार को इसारी सलेमपुर स्थित डॉ. सियाराम यादव के नवनिर्मित भवन में भव्य विचार गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. फतेहचन्द 'बेचैन' तथा संचालन डॉ. आदित्य कुमार 'अंशु' ने किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती एवं संत कबीर के चित्र पर माल्यार्पण और पुष्प अर्पण के साथ हुआ। मुख्य अतिथि बिहार के मधुबनी-मधुबन से पधारे साहित्यकार डॉ. शैलेश कुमार सिंह तथा विशिष्ट अतिथि विन्ध्याचल सिंह का अंगवस्त्र एवं माल्यार्पण कर सम्मान किया गया। सरस्वती वंदना शेषनाथ विद्यार्थी द्वारा प्रस्तुत की गई।

वक्ताओं ने संत कबीर के निर्भीक चिंतन, सामाजिक समरसता और मानवीय मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए भोजपुरी भाषा के संरक्षण और संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. सियाराम यादव ने कहा कि कबीर के विचारों को समझना सरल नहीं है, उन्होंने गुरु की महिमा को सर्वोच्च स्थान दिया। डॉ. आदित्य कुमार अंशु ने प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर भोजपुरी भवन स्थापित करने की मांग उठाई।

कवि गोष्ठी में विन्ध्याचल सिंह, खुर्शीद आलम, अफजल अहमद, डॉ. रामविलास चौहान, डॉ. सेराज अहमद तथा डॉ. शैलेश सिंह ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भोजपुरी भाषा, समाज और बदलते परिवेश की मार्मिक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। डॉ. सेराज अहमद ने भोजपुरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने की आवश्यकता बताई।

अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. फतेहचन्द 'बेचैन' ने संवेदनशील काव्य पाठ कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम में डॉ. भोला प्रसाद आग्नेय, रमाशंकर मनहर, गयाशंकर प्रेमी, देवेन्द्र यादव, पंकज श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। अंत में आयोजक डॉ. आदित्य कुमार 'अंशु' ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।