गांव गांव पहुंचा बदले स्वरुप मे सुदखोरी का धंधा, महिलाओं को बनाया जा रहा है शिकार
मधुसूदन सिंह
बलिया।। सुदखोरो के चंगुल मे फंस कर जब से बलिया मे आधा दर्जन से अधिक लोगों ने आत्महत्या कर ली है, तब से इस धंधे के संचालकों को काफ़ी नुकसान उठाना पड़ा है। कुछ को तो जेल यात्रा तक करनी पड़ी है। कुछ दिनों के परेशानी को झेलने के बाद सुदखोरों द्वारा अब पुरुषों की जगह महिलाओं को अपना शिकार बनाने क लिये नये तरीके से इस धंधे को परवान चढ़ा रहे है। इस धंधे मे इनका घाटा नहीं बल्कि पहले से ज्यादे मुनाफा कमा रहे है।
ऐसे हो रहा है धंधा
सुदखोरों ने अब सीधे कर्ज न देने की जगह छोटे छोटे स्वर्णकारों को अपना मोहरा बनाया है। इन लोगों ने गांव मे स्वर्णकारों की छोटी छोटी दुकाने खुलवानी शुरू कर दी है। एक तरफ ये स्वर्णकार महिलाओं को गहने बेच कर मुनाफा कमा रहे है, तो दूसरी तरफ सूद पर ऋण देकर उनके गहने बही हड़प रहे है। ये लोग 4-5 प्रतिशत महवारी पर गहना गिरवी रखकर गहना के मूल्य का 60 प्रतिशत ऋण देते है। साथ ही जब ये गरीब महिलाये सूद देने मे देर करती है तो सूद पर बही सूद लगा देते है और कुछ माह नहीं देने पर महिला का गहना जब्त कर लेते है। ऐसे दुकानदारों का न कही रजिस्ट्रेशन है, न ही भरोसा कि कब दुकान बंद करके भाग जाये। ऐसे मे महिलाओं को इनके चंगुल मे फंसने से बचाने के लिये जिला प्रशासन को इनकी जांच व महिलाओं को जागरूक करना चाहिये।









