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श्रीनाथ बाबा के वार्षिक रोट पूजनोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब, महामंडलेश्वर स्वामी कौशलेंद्र गिरी बोले— "सनातन संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं ऐसे आयोजन"

 





श्रीनाथ बाबा के वार्षिक रोट पूजनोत्सव में उमड़ा आस्था का सैलाब

  महामंडलेश्वर स्वामी कौशलेंद्र गिरी बोले— "सनातन संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं ऐसे आयोजन"

रसड़ा, बलिया।। रसड़ा क्षेत्र के नागपुर गांव स्थित प्राचीन श्रीनाथ मठ में महान सिद्ध संत श्रीनाथ बाबा का ऐतिहासिक वार्षिक रोट पूजनोत्सव सोमवार को पारंपरिक श्रद्धा, भक्ति और शौर्य के अद्भुत संगम के साथ संपन्न हुआ। आयोजन में बलिया सहित आसपास के कई जिलों से लाखों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर बाबा के चरणों में शीश नवाया। पूरे क्षेत्र में "जय श्रीनाथ बाबा" के जयघोष से भक्तिमय वातावरण गूंज उठा। इस अवसर पर श्रद्धालुओं के बीच 251 क्विंटल से अधिक रोट का महाप्रसाद वितरित किया गया।

मुगलकाल से चली आ रही इस ऐतिहासिक परंपरा का निर्वहन आज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ किया जाता है। बताया जाता है कि लखनेश्वर  डीह परगना से प्रारंभ हुई यह परंपरा सेंगर राजपूतों की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक मानी जाती है। वर्षों से आयोजित हो रहा यह उत्सव, क्षेत्र की धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का केंद्र बना हुआ है।

उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता भक्ति और शौर्य का अद्भुत संगम रही। परंपरा के अनुसार विभिन्न गांवों से हजारों श्रद्धालु ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों से पारंपरिक लाठियां लेकर श्रीनाथ मठ पहुंचे। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने लाठियां तड़तड़ाते हुए पारंपरिक युद्ध कला (लाठी पूजा) का प्रदर्शन किया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। इसके बाद श्रद्धालुओं ने मंदिर की परिक्रमा कर सुख-समृद्धि, खुशहाली और मनोकामना पूर्ण होने की प्रार्थना की। पूजनोत्सव में उपस्थित महामंडलेश्वर स्वामी कौशलेंद्र गिरी महाराज ने अपने संबोधन में कहा कि "श्रीनाथ बाबा का यह पावन रोट पूजनोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी सनातन संस्कृति, लोक परंपरा और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और समाज में प्रेम, भाईचारा तथा आध्यात्मिक चेतना का संचार करते हैं। हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने के लिए इस प्रकार की परंपराओं को आगे बढ़ाना चाहिए।"

यह आयोजन सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल भी बना। सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार मुख्य पूजन शुरू होने से पहले श्रीनाथ बाबा के समकालीन सूफी संत रोशन शाह बाबा की दरगाह पर चादर और रोट अर्पित किया गया। इसके बाद श्रीनाथ मठ में पूजा समिति के अध्यक्ष विजेंद्र प्रताप सिंह एवं अन्य पदाधिकारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजन संपन्न कराया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में प्रभारी निरीक्षक कोतवाली रसड़ा और क्षेत्राधिकारी रसड़ा के netriपुलिस बल की तैनाती रही, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।

आस्था, परंपरा, शौर्य और सामाजिक समरसता का संदेश देने वाला श्रीनाथ बाबा का यह ऐतिहासिक रोट पूजनोत्सव एक बार फिर क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक गौरव का केंद्र बन गया।