दूसरे दिन की कथा मे बोले पंडित प्रदीप मिश्रा -संसार पर भरोसा दुखो का कारण, शिव पर भरोसा करेगा बेड़ा पार
मधुसूदन सिंह
बलिया।। बाबा बालखंडी नाथ के सानिध्य मे आयोजित शिव महापुराण कथा के दूसरे दिन अंतर्राष्ट्रीय सुप्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिव पर भरोसा करने की सलाह दी। पंडित मिश्रा ने कहा कि संसार पर भरोसा करने वाले को निश्चित ही धोखा मिलेगा। वही जो भोलेनाथ पर भरोसा करता है, उसको कभी धोखा नहीं मिलता है और वह सारे सांसारिक सुखों को भोगते हुए अंत मे इस सांसारिक मोह माया से मुक्त हो जायेगा।
कथा का शुभारम्भ पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा व्यासपीठ पर बैठने से पहले विघ्नहर्ता श्री गणेश जी व भोलेनाथ की पूजा करने के बाद किया गया। आयोजक परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह और इनके अनुज धर्मेंद्र सिंह ने व्यासपीठ व पंडित प्रदीप मिश्रा जी का फूल माला पहनाकर अभिनन्दन किया।
शिव पर भरोसा, सारी समस्याओं का हल, बुरी संगत बिगाड़ देगी जीवन
भोलेनाथ पर भरोसा से क्या मिलता है, उसको पंडित मिश्रा ने दो भाइयों की कहानी को सुनाकर समझाया। बोले,स्कन्द पुराण की एक बहुत ही सुन्दर प्रसंग सुनाता हूं। एक गांव मे दो भाई भानु और भोला रहते थे। दोनों भाइयों का नित्य का कार्य शिव मंदिर जा कर भोलेनाथ पर जल चढ़ाना और शिवालय मे सेवा आदि कार्य करना और शिखर का दर्शन करना। कुछ दिनों बाद भानु अपने हिस्से का धन, भोला से लेकर दूसरे शहर चला गया। वहां जाने के बाद उसकी संगति बुरे दोस्तों के साथ हो गयी। वह धन तो बहुत कमाने लगा लेकिन उसको सारे व्यसन जैसे मदिरा पीना आदि का रोग लग गया। कुछ दिनों बाद अपनी बुरी संगति और बुरे व्यसनो के कारण उसके मित्रों ने उसका सारा धन ले लिया। भानु अब कंगाल हो चुका था। तब भानु ने गांव लज्जा सहित जाने का मन बनाया। गांव मे अपने भाई को आया देख, भोला ने गले लगा लिया।
भानु ने पूंछा भाई मैंने तुमसे अपना हिस्सा लेकर बर्बाद कर दिया, तो भी तुम मुझको प्रसन्नचित होकर गले ला रहे हो। तब भोला ने कहा कि सारा धन बर्बाद करने के बाद भी अगर तुम फिर से गांव लौट आये हो तो यह मेरे शिव की ही कोई योजना है। शिव अपने भक्तों को कभी भी संकट मे नहीं छोड़ते है। देखना तुम्हारी सेवा से भोला भंडारी तुम्हारी नष्ट हुई सारी सम्पदा वापस दे देंगे।कहा कि तुमने दोस्तों पर भरोसा किया, तो तुम्हारा सारा धन उन लोगों ने लूट लिया। शिव पर फिर से भरोसा करों, वो तुमको मालामाल कर देंगे।
एक लोटा जल सारी समस्याओ का हल
शिव पर एक लोटा जल चढ़ाने के महात्म को बतलाते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि संसार पर भरोसा करके भानु लूट गया, वही शिव पर भरोसा करने वाला भोला को कुछ नहीं हुआ। कहा कि आपका अगर कोई चीज भूलती है तो आप गुमशुदा केंद्र जाते है। जब कोई पूंछताछ करनी होती है तो पूंछताछ केंद्र जाते है। लेकिन शिव महापुराण की कथा कहती है कि अगर आप दुनिया मे चारो तरफ संकट, विपत्तियों से घिर जाये, कही कोई नजर न आये तो इन समस्याओं को दूर करने का केंद्र है शिव का मंदिर शिवालय। आप दिल से एक लोटा जल चढ़ाना शुरू कीजिये, भोलेनाथ तक आपकी अर्जी पहुंच जायेगी और मेरा शिव सारे कष्टों, संकटो को काट देता है। एक भरोसा शिव के प्रति हमारे सारे संकटो का नाश कर देता है। इसी लिये कहा जाता है, शिव को एक लोटा जल अर्पण करना सारी समस्याओ का समाधान है। जब आप एक लोटा जल लेकर भगवान भोलेनाथ के पास जाते है और संकल्प करते है कि हे शिव मेरा यह एक लोटा जल लेकर मेरा जीवन बदल दो। आपका यही समर्पण, शिव के प्रति आस्था आपका जीवन बदल देगी।
कहा कि जल ही क्यों समर्पित करना है, इसका भी एक कारण है।कहा कि किसी भी संकल्प मे पैसा हो और जल न हो, पैसा हो फल फूल भी हो लेकिन जल न हो तो संकल्प नहीं किया जा सकता है। लेकिन अगर धन व फूल न भी हो और केवल जल ही हो, तो संकल्प किया जा सकता है। इसी लिये शिव पर चढ़ाया गया जल, आपका एक संकल्प होता है। शिव महा पुराण की कथा कहती है कि आप चाहे किसी को भोजन कराओ या न कराओ, जल जरूर पिलाना चाहिये।
अधिक मास मे क्यों दान की जाती है 33 चीजे
अधिक मास को पुरुषोत्तम मास भी कहते है। इस मास मे दान करने का विशेष महत्त्व है। इस मास मे चाहे आप मालपुआ दान करें, पूड़ी दान करें, मिष्ठान दान करें, उसकी संख्या 33 होती है। आपने कभी विचार किया है कि 33 चीजे ही दान क्यों की जाती है, अधिक या कम क्यों नहीं? आपको बताता हूं - 30 चीजे तो महीने के लिये होती है लेकिन 31 वी चीज उसके लिये दान की जाती है जो हमारे बहन बेटी के घर खाना खाने से दोष लगा हो, वह कट जाये। 32 वी चीज उस दोष को दूर करने के लिये दान की जाती है जो अनजाने मे किसी सूतक वाले घर का पानी पीने से लगा होता है। 33 वी चीज उस दोष को दूर करने के लिये दान की जाती है जो गुरु व ब्राह्मण के घर खाने से हमें लगा होता है।
पार्थिव शिव लिंग की महता
पंडित प्रदीप मिश्रा ने पार्थिव शिव लिंग की महत्ता को समझाने के लिये माता पार्वती के मछुआरे के घर लड़की बन कर रहने की कथा सुनाई। कहा कि एक बार माता पार्वती को भगवान भोलेनाथ काशी मे शिव तत्व का रहस्य बतला रहें थे लेकिन माता का चित्त सुनने मे नहीं लग रहा था, वह बहुत चंचल हो गया था। इस पर भोलेनाथ ने क्रोधित होकर माता पार्वती को श्राप दे दिया कि मछली के कारण तुम्हारा चित्त चंचल हो गया है, जाओ मछुआरे के घर निवास करों। श्राप मिलने के बाद माता पार्वती एक छोटी बच्ची का रूप धारण करके एक मछुआरे के घर पहुंची। मछुआरे को कोई संतान नहीं थी, उसने छोटी बच्ची बनी पार्वती जी को पुत्री बनाकर लालन पालन करने लगा। माता पार्वती का मन किसी बात मे नहीं लगता था, वो रेत पर शिव लिंग बनाती, उसको सहलाती और एक तक निहारती रहती थी।
धीरे धीरे माता यह करते हुए बड़ी हो गयी। एक दिन नदी मे एक बहुत बड़ी मछली आ गयी, उसने सारे जाल फाड़ दिया और किसी के भी पकड़ मे नहीं आयी। तब मछुआरे ने यह ऐलान किया कि इस विशाल मछली को जो पकड़ेगा उसी से अपनी सुन्दर बेटी की शादी कर दूंगा। भोलेनाथ एक मछुआरा बन कर बड़ी मछली बने नंदी को पकड़ लिया, फिर से पार्वती जी से शादी कर ली।
शिव की शरण वाला नहीं फँसता है कि जाल मे
पार्वती जी को अपने निवास स्थान पर लाने के बाद भोलेनाथ ने पूंछा देवी मछुआरे के घर रहने के बाद आपको क्या सीख मिली और क्या आपने जाना कि मैंने आपको क्यों श्राप दिया था। पार्वती जी ने कहा कि मेरी समझ मे आ गया है कि मछुआरा जाल फेकता है और सारी मछलियां उसमे फस जाती है लेकिन वह मछली नहीं फंसती है जो मछुआरे के पांव के पास रहती है। यानी जो आपकी शरण मे आ जाता है, वह किसी भी जाल मे नहीं फँसता है।
शिव भक्त क्यों रहता है निश्चिन्त
प्रदीप मिश्रा जी ने शिव भक्तों की निश्चिन्ता का कारण एक उदाहरण के द्वारा समझाया। कहा कि बंदूक धारियों द्वारा बंदूक को टांगते समय उसकी नली को ऊपर रखा जाता है। उसको डर होता है कि अगर नली को नीचे किया गया तो कोई दुर्घटना होने की संभावना हो सकती है, दाये बाये करने पर भी यही सम्भावना है। लेकिन अगर नली का मुंह ऊपर करके रखा जाय तो दुर्घटना होने की संभावना कम होती है। इसी तरह शिव भक्त भी अलमस्त जीवन जीते हुए सिर्फ शिव की शरण मे रहते है। उनको पता है कि अगर कोई भी आपदा आएगी तो ऊपर बैठा भोला भंडारी संभाल लेगा।
शिव लिंग की उत्पत्ति की कथा
एक बार ब्रह्मा जी को भ्रम हो गया कि इस सृष्टि की रचना मै ही कर रहा हूं। इस पर विष्णु जी ने समझाया कि ब्रह्म देव सारी सृष्टि की रचना भोलेनाथ ने की है, यही सत्य है, इसको स्वीकार कीजिये। फिर भी ब्रह्मा जी नहीं माने। तब भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी के साथ एक विशाल पर्वत को लेकर समुद्र मे मथना शुरू किया। इसके कारण विशाल शिव लिंग प्रकट हुआ। भगवान विष्णु ने कहा कि अब तो स्वीकार कर लीजिये कि सृष्टि की रचना भोलेनाथ ने ही की है। तब ब्रह्मा जी ने शिव लिंग के शिखर का पता लगाने के लिये और विष्णु जी उत्पत्ति की जड़ का पता लगाने के लिये निकले लेकिन दोनों को न शिखर मिला, न ही जड़। हार कर ब्रह्मा जी ने मान लिया कि इस सृष्टि की रचना शिव ने ही की है। यह कहानी बताती है कि जिसको शिव पर भरोसा होता है, उसको भटकना नहीं पड़ता है।
दूसरे उदाहरण से समझाते हुए कहा कि नदियों की इच्छा समुन्द्र मे मिलने की रहती है। जब बारिश होती है तो नदियाँ बारिश के पानी के साथ उछलते हुए समुद्र मे मिल जाती है। वैसे ही शिव से जुड़ा हुआ व्यक्ति जब उसपर संकट आता है तो और तेजी व श्रद्धा के साफ शिव की शरण मे जाता है, और अपने सारे संकटो से मुक्ति प्राप्त कर लेता है।
शिव को भगवान नहीं मानो पिता
भक्तों को शिवत्व के और करीब ले जाने के लिये श्री प्रदीप मिश्रा ने कहा कि आप शिव को भगवान नहीं बल्कि पिता के रूप मे स्वीकार करें। एक पिता ही होता है जो अपने बेटों और बेटियों को कभी भी अपने घर से खाली हाथ नहीं भेजता है। कहा इस दुनिया मे हमारे दो ही रिश्तेदार है -एक पिता के रूप मे भोलेनाथ और माता के रूप मे पार्वती जी। कहा कि भोलेनाथ ने ही माता से रुष्ट होकर घर छोड़कर जाने वाले कार्तिकेय जी के कान मे कहा था कि जब तुम संकट मे फंसो तो सिर्फ मां कह देना। मां शब्द तुम्हारे अंदर ऊर्जा भर देगा और तुम समस्या से बाहर निकल जाओगे। असुरो से युद्ध के समय जब भगवान कार्तिकेय परेशान हो गये तो उन्होंने मां कह दिया। इतना सुनना था कि माता पार्वती ने जबरदस्ती भोलेनाथ को साथ लेकर अपने पुत्र के पास पहुंच गयी। आज भी मलिकार्जुन के रूप मे भोलेनाथ माता के साथ विराजमान है।
अंत मे यजमान अर्द्ध नारिश्वर के रूप मे मंच पर आये। पूरा पांडाल अर्द्ध नारिश्वर भगवान के जयकारे से गूंज उठा।
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, पूर्व सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त, जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा, धर्मेंद्र सिंह आदि गणमान्य लोगों ने भोलेनाथ की आरती की। इसके बाद दूसरे दिन की कथा का विश्राम हुआ।







