लखनऊ अग्निकांड: लाइब्रेरी और ट्रेनिंग सेंटर बना मौत का जाल, 15 छात्रों की मौत,जान बचाने को केबल पकड़कर उतरे छात्र
प्रशासनिक चूक और अग्निशमन विभाग की घोर लापरवाही
लखनऊ।। राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र स्थित सेक्टर-डी, महाकवि जयशंकर प्रसाद वार्ड में सोमवार को हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रदेश को शोक में डुबो दिया। बहुमंजिला कमर्शियल भवन में लगी आग में 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। प्रशासन द्वारा जारी सूची में 9 घायलों के नाम सामने आए हैं। मृतकों में अधिकांश छात्र-छात्राएं शामिल हैं।
हादसा उस बहुमंजिला भवन में हुआ जहां लाइब्रेरी, एनिमेशन एवं ट्रेनिंग सेंटर समेत अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही थीं। ग्राउंड फ्लोर पर ड्रूल्स पेट शॉप थी, जबकि ऊपरी मंजिलों पर छात्रों के लिए अध्ययन और प्रशिक्षण की व्यवस्था थी। घटना के समय भवन में बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे। बताया जा रहा है कि हेड हॉपर्स एनिमेशन सेंटर में ही करीब 25 छात्र मौजूद थे।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगने के कुछ ही मिनटों में पूरा भवन धुएं से भर गया। अचानक बिजली चली गई और अंदर मौजूद छात्रों के बीच अफरा-तफरी मच गई। बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिलने पर कई छात्रों ने अपनी जान बचाने के लिए खिड़कियों का सहारा लिया।
घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कुछ छात्र अपनी जान बचाने के लिए भवन के बाहर लगे बिजली के केबलों को पकड़कर नीचे उतरते दिखाई दे रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जिन छात्रों ने हिम्मत दिखाई, वे किसी तरह केबल के सहारे नीचे उतरने में सफल रहे और अपनी जान बचा ली। वहीं कुछ छात्रों ने घबराकर खुद को बाथरूम और कमरों में बंद कर लिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार धुएं से दम घुटने के कारण कई लोगों की मौत हुई।
मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार दो छात्रों ने साहस दिखाते हुए पहली मंजिल से नीचे छलांग लगा दी थी। दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका इलाज ट्रामा सेंटर में चल रहा है। कई अन्य छात्रों ने भी ऊंचाई से कूदकर अपनी जान बचाने का प्रयास किया।
घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की करीब 10 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म की मदद से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। घने धुएं और आग की लपटों के कारण रेस्क्यू अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया। बचाव दल को भवन के पीछे की दीवार तोड़कर अंदर प्रवेश करना पड़ा। घंटों तक चले अभियान के बाद एक-एक कर लोगों को बाहर निकाला गया।
डॉक्टरों के अनुसार हादसे में 15 लोगों की मौत हुई है। राहत एवं बचाव कार्य के दौरान कई झुलसे छात्रों को बाहर निकाला गया। घायलों का इलाज केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर और अन्य अस्पतालों में जारी है। प्रशासन द्वारा जारी सूची में 9 घायलों के नाम दर्ज किए गए हैं।
हादसे की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना अलीगढ़ दौरा तत्काल रद्द कर दिया। अलीगढ़ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि लखनऊ में हुई दुखद घटना की जानकारी मिलने के बाद वह तुरंत राजधानी लौट रहे हैं। उन्होंने पुलिस महानिदेशक और अपर मुख्य सचिव गृह को मौके पर पहुंचकर पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
लखनऊ पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री सीधे घटनास्थल पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्यों का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने केजीएमयू पहुंचकर घायलों तथा मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने परिजनों को आश्वस्त किया कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति या अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
घटनास्थल और अस्पताल का दौरा करने के बाद मुख्यमंत्री ने अपने सरकारी आवास पर हाई लेवल बैठक बुलाई। बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस विभाग और अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये तथा घायलों को पचास-पचास हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को पचास हजार रुपये की सहायता राशि देने का ऐलान किया।
घटनास्थल पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, डीजीपी राजीव कृष्ण, पुलिस आयुक्त, जिलाधिकारी और अग्निशमन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी लगातार मौजूद रहे। हादसे की जानकारी देते समय उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भावुक हो गए और मृतकों का जिक्र करते हुए उनकी आंखें नम हो गईं।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हादसे में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने घायलों के बेहतर इलाज और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी घटना पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
हादसे के बाद भवन की सुरक्षा व्यवस्था, फायर एनओसी, आपातकालीन निकास मार्ग और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन में पर्याप्त निकासी मार्ग नहीं थे। कई लोगों ने सवाल उठाया है कि यदि भवन में बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहते थे, तो सुरक्षा मानकों का पालन किस स्तर तक किया गया था। अब जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस दर्दनाक हादसे के पीछे लापरवाही किस स्तर पर हुई।
इनकी गयी है जान
हादसे में जान गंवाने वालों में सागर, निलेश, अनामिका, संयम, अनुराधा, सुखमनी, आदित्य श्रीवास्तव, ज्योति, भविष्य, अब्दुल रहमान, सूरज शाह, माहजान, जयनिल चक्रवर्ती, मोहम्मद अमार और सुमल्ला शामिल हैं। वहीं घायलों में जयंत, लवप्रीत, मोहम्मद आसिफ, भुवन श्रीवास्तव, पंकज, शैलेन्द्र, अभिषेक, पंकज जोशी और गौरव कुमार के नाम सामने आए हैं।
लखनऊ का यह अग्निकांड केवल एक हादसा नहीं, बल्कि शहरी क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़ा सवाल बनकर सामने आया है। 15 परिवारों ने अपने बच्चों और प्रियजनों को खो दिया है, जबकि कई अन्य परिवार अब भी अपने घायलों के स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं। पूरे प्रदेश की निगाह अब जांच रिपोर्ट और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।







