यूपी सरकार ने सरकारी वकीलों की फीस बढ़ाई, महाधिवक्ता को मिलेगा 1.25 लाख मासिक मानदेय
जिला न्यायालय से लेकर उच्च न्यायालय तक अधिवक्ताओं की रिटेनर और बहस फीस में संशोधन, 5 जून से लागू हुआ नया आदेश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के विभिन्न न्यायालयों में सरकार की ओर से पैरवी करने वाले सरकारी अधिवक्ताओं और विधि अधिकारियों को बड़ी राहत देते हुए उनकी रिटेनर फीस और बहस शुल्क में वृद्धि कर दी है। न्याय विभाग द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार जिला न्यायालयों, उच्च न्यायालय तथा अन्य न्यायिक मंचों पर कार्यरत अधिवक्ताओं के मानदेय में संशोधन किया गया है।
नए आदेश के तहत महाधिवक्ता को अब प्रतिमाह 1.25 लाख रुपये रिटेनर फीस तथा प्रति कार्य दिवस 60 हजार रुपये बहस शुल्क मिलेगा। प्रदेश से बाहर अथवा दिल्ली में मुकदमों की तैयारी के लिए अतिरिक्त भुगतान की भी व्यवस्था की गई है।
जिला न्यायालयों में कार्यरत जिला शासकीय अधिवक्ता को 14 हजार रुपये प्रतिमाह और 2500 रुपये प्रतिदिन बहस शुल्क दिया जाएगा। इसके अलावा अपर जिला शासकीय अधिवक्ता, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता और उप जिला शासकीय अधिवक्ताओं की फीस में भी संशोधन किया गया है। न्याय मित्रों और विशेष अधिवक्ताओं के लिए भी नई दरें निर्धारित की गई हैं।
उच्च न्यायालय में सरकार का पक्ष रखने वाले अपर महाधिवक्ताओं, मुख्य स्थायी अधिवक्ताओं, स्थायी अधिवक्ताओं और ब्रीफ होल्डरों की फीस में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड और विभिन्न श्रेणी के पैनल अधिवक्ताओं को मिलने वाले भुगतान को भी नए सिरे से तय किया गया है।
सरकार का मानना है कि फीस संरचना में यह बदलाव न्यायिक कार्यों में दक्ष और अनुभवी अधिवक्ताओं की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ सरकारी मुकदमों की प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करेगा। शासनादेश को वित्त विभाग की स्वीकृति के बाद जारी किया गया है और संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
यह फैसला राज्य की न्यायिक व्यवस्था में सरकार की कानूनी पैरवी को अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।





