शंकराचार्य जी के शिष्यों के साथ प्रयागराज में पुलिसिया बदसलूकी घोर निंदनीय: सुशील कुमार पाण्डेय 'कान्हजी'
बलिया: समाजवादी पार्टी के जिला प्रवक्ता सुशील कुमार पाण्डेय 'कान्हजी' ने प्रयागराज माघ मेले में ज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के शिष्यों के साथ पुलिस द्वारा की गई कथित बदसलूकी की कड़े शब्दों में निंदा की है।
जारी एक बयान में 'कान्हजी' ने कहा कि "प्रयागराज की पावन धरती पर, जहाँ श्रद्धालु और संत आस्था के साथ जुटते हैं, वहाँ पूज्य शंकराचार्य जी के शिष्यों के साथ पुलिस का अमर्यादित व्यवहार अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है। यह न केवल संतों का अपमान है, बल्कि सनातन परंपराओं और धार्मिक भावनाओं पर कुठाराघात है।"
उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि इस घटना के दोषी पुलिसकर्मियों पर तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि संतों और उनके अनुयायियों के सम्मान के साथ खिलवाड़ बंद नहीं हुआ, तो समाजवादी पार्टी चुप नहीं बैठेगी। धर्म की आड़ में राजनीति करने वाली सरकार के राज में आज संतों को ही प्रताड़ित किया जा रहा है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
यह है घटनाक्रम
धरने पर बैठे शंकराचार्य, बाद मे बिना स्नान किये गये वापस
प्रयागराज में संगम तट पर मौनी अमावस्या के स्नान के दौरान रविवार को बवाल हो गया. शंकरचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने स्नान करने से इनकार कर दिया।
उन्होंने शिष्यों के साथ मारपीट का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि पुलिस ने उनके शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की की. उनके साथ बदसलूकी की गई. उन्हें स्नान से रोका गया. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वे बिना स्नान अब वापस जा रहे हैं.
पुलिस-प्रशासन ने क्या कहा?
पुलिस का कहना है कि माघ मेले में मौनी अमावस्याके कारण संगम तट पर श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ थी. इस कारण ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को प्रशासन ने रोका गया. भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने शंकराचार्य से रथ से उतरकर तट तक पैदल जाने का आग्रह किया. आग्रह के बावजूद शंकराचार्य के समर्थक और भक्त नहीं माने और आगे बढ़ने लगे. इससे उनकी पुलिस के साथ हुई धक्का-मुक्की और झड़प हुई. फिलहाल शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का जुलूस अभी रुका हुआ है. पुलिस और प्रशासन के आलाधिकारी मौके पर मौजूद हैं.
पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 9 बजे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने लगभग 200 अनुयायियों के साथ उस इलाके में पहुंच गए, जिसे सुरक्षा कारणों से पहले ही बंद कर दिया गया था। वहां बैरियर लगाए गए थे, लेकिन समर्थकों ने उन्हें हटाने की कोशिश की और आगे बढ़ने पर पुलिस से नोकझोंक हो गई। हालात इतने बिगड़े कि धक्का-मुक्की तक की नौबत आ गई। पूरी घटना कैमरों में कैद हो चुकी है।
तीन घंटे तक रास्ता जाम, श्रद्धालु परेशान
पुलिस का कहना है कि स्वामी संगम नोज जाने पर अड़े रहे, जबकि उस समय वहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। सुबह के समय कोहरे की वजह से संगम क्षेत्र पहले ही बेहद संवेदनशील रहता है। पुलिस ने समझाने की कोशिश की कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों और रथ के साथ आगे बढ़ना खतरे से खाली नहीं है, लेकिन बात नहीं बनी। आरोप है कि समर्थकों ने छोटे बच्चों को आगे कर अव्यवस्था फैलाई और करीब तीन घंटे तक वापसी का रास्ता बंद रखा, जिससे आम श्रद्धालुओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।
बिना अनुमति पालकी लेकर पहुंचे, नियमों की अनदेखी
जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बिना किसी अनुमति के पालकी पर सवार होकर संगम स्नान के लिए पहुंचे, जो परंपरा और प्रशासनिक नियमों के खिलाफ है। उस समय संगम क्षेत्र में बेहद ज्यादा भीड़ थी। बार-बार अनुरोध के बावजूद वे अपनी जिद पर अड़े रहे। बैरियर तोड़ने और पुलिस से धक्का-मुक्की की भी जांच की जा रही है और हर पहलू को देखते हुए कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने भी कहा कि बिना इजाजत पालकी लेकर आना और सुरक्षा घेरा तोड़ना गंभीर मामला है। तीन घंटे तक वापसी मार्ग बंद रहने से जनसामान्य को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
विवाद के बाद धरने पर बैठे शंकराचार्य
घटना के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर में धरने पर बैठ गए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक प्रशासन उन्हें पूरे सम्मान और तय प्रोटोकॉल के तहत संगम तक नहीं ले जाएगा, तब तक वे गंगा स्नान नहीं करेंगे। प्रशासन के रवैये से नाराज शंकराचार्य ने मीडिया को भी शिविर में बुलाकर अपनी बात रखने की तैयारी कर ली है।
माघ मेले के बीच इस घटनाक्रम ने व्यवस्था, सुरक्षा और परंपरा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सबकी नजर प्रशासन की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।




