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वैदिक मंत्रोचार के साथ दनौरी माता स्वरुप मां दुर्गा की दिव्य प्रतिमा स्थापित, माता रानी के जयकारें से गुंजायमान हुआ पूरा क्षेत्र

 






डॉ सुनील कुमार ओझा 

हल्दी बलिया।।भरखोखा डीह पर स्थित दनौरी माई के नाम से विख्यात वन देवी के प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार के बाद गुरुवार को सुबह पंचांग पूजन, प्रधान वेदी पर दूर्गा जी का आवाह्न -पूजन,सभी औषधियों से देवी स्नान,नेत्र उन्मिलन,(आंख खोलना) हरिनाम संकीर्तन आदि का कार्यक्रम क्षेत्र के विद्वान आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार से किया गया। 

हल्दी - सोनवानी मार्ग बसुधरपाह गांव के पूरब डीह पर दनौरी माता का प्रसिद्ध स्थान है, जहां क्षेत्र के हल्दी, भरसौता,भरखोखा, बादिलपुर, सुल्तानपुर,बसुधरपाह,कृपालपुर,बबुआपुर, सोनवानी,बिगहीं,बहुआरा आदि गांवों के लोगों का वन देवी में अथाह आस्था है। परिवार में जब कोई शुभ कार्य होता है तो घर की महिलाएं यहां हलुआ व साड़ी चढ़ाती है । इसके अलावा लोग देवी का स्मरण कर मन्नतें मांगते हैं । मनोकामनाएं पूरी होने पर माता के विधिवत पूजा की जाती है। उस स्थान के समीप ही डीह पर वर्ष में एक बार एक महान संत श्री स्वामी कैलाश दास वेदांती जी महाराज का आगमन प्रति वर्ष होता। 

सूच्य हो कि जंगल नुमा डीह अक्सर विरान रहता है लेकिन जब स्वामी  जी का आगमन होता है तो सैकड़ों की संख्या में भक्त गण वहां जमे रहते हैं। स्वामी जी की प्रेरणा से क्षेत्रीय लोगों ने वनदवी का भव्य मंदिर बनाने का संकल्प लिया था।जो आज बनकर पूरी तरह से तैयार हो जाने के उपरांत दनौरी माता के स्वरुप मां दुर्गा का दिव्य प्रतिमा स्थापित की गयी।करीब एक एकड़ से अधिक में  चबूतरा का भी निर्माण किया गया है। जिसमें आचार्य मंटू शास्त्री, उमेश उपाध्याय,लक्ष्मण उपाध्याय, शौनक द्विवेदी, पंडित अमन ने वैदिक मंत्रोच्चार से पूजन आरती की।