Breaking News

डुमरांव साहित्य महोत्सव में डॉ. शैलेश सिंह 'शौर्य' को मिला नारायण सिंह स्मृति सम्मान

 





 भोजपुरी में लिखी पढ़ी जा, आई आगे बढ़ी जा : डॉ शैलेश 

डुमरांव साहित्य महोत्सव का भव्य आयोजन, राजा भोज की भूमि से भोजपुर राज्य की मांग का हुवा शंखनाद 


 पूर (बलिया)।।भोजपुरी भाषा के प्रति जागरूक एवं समर्पित राष्ट्रीय संगठन भोजपुरी सरधा मंच (राष्ट्रीय), बिहार इकाई के द्वारा साहित्यिक संस्था साहित्योदय व समाजसेवी संगठन के संयुक्त तत्वाधान में राष्ट्रीय साहित्य सम्मेलन सह डुमरांव महोत्सव का भव्य आयोजन डुमरांव स्थित त्यागी पैलेस के सभागार में हुवा।

      उक्त समारोह में क्षेत्र के गढ़मलपुर सहुलाई निवासी, रामनरेश सिंह एजुकेशनल फाउंडेशन के संस्थापक महासचिव / डी.बी. कॉलेज, जयनगर के युवा शिक्षाविद डॉ. शैलेश सिंह शौर्य को वर्ष 2025 के नारायण सिंह स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। विद्वत है कि साहित्य के प्रखर आलोचक स्व. नारायण सिंह जी की स्मृति में डॉ. शैलेश को मुख्य अतिथि नंद कुमार तिवारी, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जनार्दन सिंह, प्रख्यात लेखक लक्ष्मण दुबे लहरी बाबा, कुमार अजय सिंह, व राष्ट्रीय महासचिव संतोष ओझा प्रभाकर, प्रदेश अध्यक्ष बिहार गुड्डू गुलशन यदुवंशी के द्वारा सम्मान स्वरूप अंगवस्त्र, प्रतीक चिन्ह और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।

     


 डॉ. शैलेश सिंह शौर्य को उनकी कृति मेरे राम के साथ साथ साहित्यिक रुचि, रचनाधर्मिता के लिए यह पुरस्कार मिला है, इससे पूर्व भी डा. शैलेश सिंह को कलकत्ता, सोलापुर, दरभंगा, मुंबई, काशी में विभिन्न पुरस्कारो से नवाजा जा चुका है।

    इस अवसर पर डॉ. शैलेश कुमार सिंह ने संयोजक आयोजक मंडल के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि, इस तरह के अकादमिक साहित्यिक आयोजन से भोजपुरी भाषा की प्रमुख मांग संवैधानिक दर्जा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का मार्ग प्रशस्त होगा। 




        साथ ही डॉ. सिंह ने कहा कि, वर्तमान समय में स्वघोषित नेतागण भोजपुरी के नाम पर सिर्फ अपनी रोटी सेक रहे हैं। पूर्व सांसद स्व. चंद्रशेखर जी ने भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का जो मुद्दा उठाया था उसे पूरा करने के लिए उ.बि. (यूपी - बिहार) के युवाओं को आगे आना होगा।  भोजपुरी भाषा को सिर्फ संवैधानिक दर्जा ही नहीं चाहिए, बल्कि अब भोजपुर राज्य बनाने का समय आ गया है। और राजा भोज की तपोभूमि से भोजपुर राज्य की मांग का हम शंखनाद करते हैं।

         इस अवसर पर लोक गायिका ममता चौबे, रंजना राय, डिम्पल राय, राय वैष्णवी, वरिष्ठ साहित्यकार रामबहादुर राय,  भोजपुरी योद्धा लाखन सिंह, शशिकांत ओझा, नितेश नवीन, ऋषिकेश ओझा, श्याम कुंवर भारती, गोपाल कृष्ण ओझा, सुमन मिश्रा, डॉ रुद्र किंकर वर्मा, डॉ जमील हसन अंसारी, डॉ अखिलेश श्रीवास्तव ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बधाई दी है।