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जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया एवं राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज के मध्य साइन हुआ एमओयू

 






जेएनसीयू बलिया में खुलेगा क्षेत्रीय एवं अध्ययन केंद्र

बलिया।। जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय, और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज के बीच बुधवार को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञाप (एमओयू) सम्पन्न हुआ। इसके अंतर्गत जेएनसीयू परिसर में राजर्षि टंडन मुक्त विवि के क्षेत्रीय केंद्र व अध्ययन केंद्र स्थापित किए जाने पर सहमति बनी। इस क्षेत्रीय केंद्र से बलिया के अतिरिक्त मऊ और आज़मगढ़ के भी अध्ययन केंद्र जुड़े रहेंगे। इस केंद्र का लाभ निकटवर्ती बिहार के विद्यार्थियों को भी प्राप्त होगा। इस एमओयू के माध्यम से दोनों विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी, शोधार्थी एवं प्राध्यापक शिक्षा, शोध और नवाचार की गुणवत्ता को बढ़ाने हेतु एक-दूसरे के शैक्षणिक संसाधनों का उपयोग कर सकेंगे। समझौते के अंतर्गत दोनों विश्वविद्यालय क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप अंतर-अनुशासनात्मक शोध परियोजनाओं पर संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। शोध एवं अध्यापन के उद्देश्य से प्राध्यापक लघु एवं दीर्घ अवधि के लिए परस्पर एक-दूसरे के विश्वविद्यालय में सेवाएँ दे सकेंगे, जिससे विषय-विशेषज्ञता का लाभ दोनों संस्थानों की अकादमिक प्रगति में संभव होगा। दोनों विश्वविद्यालय सांस्कृतिक गतिविधियों के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देंगे, जिससे न केवल क्षेत्रीय संस्कृति के संरक्षण और प्रसार को नई ऊर्जा मिलेगी, बल्कि विद्यार्थियों व प्राध्यापकों के मध्य बेहतर समन्वय भी स्थापित होगा।


बलिया परिसर में आयोजित संवाद कार्यक्रम में जेएनसीयू के कुलपति प्रो. संजीत कुमार गुप्ता और राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत्यकाम ने विद्यार्थियों से संवाद किया। प्रो. सत्यकाम ने कहा कि दूरस्थ शिक्षा पद्धति परम्परागत शिक्षा पद्धति की प्रतिस्पर्धी नहीं बल्कि परिपूरक है। इससे विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों का विकल्प मिलेगा। वे अपनी अधूरी शिक्षा इस माध्यम से पूरी कर सकेंगे। एनइपी के नये नियमों के अनुसार विद्यार्थी एक साथ एक डिग्री नियमित और एक दूरस्थ शिक्षा से ले सकते हैं। इस अवसर पर प्रो. संजीत गुप्ता ने विश्वास व्यक्त किया कि यह सहयोग न केवल दोनों विश्वविद्यालयों, बल्कि उनके संपूर्ण क्षेत्रीय विकास के लिए भी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। कहा कि बलिया और प्रयागराज की भाषिक, सामाजिक और सांस्कृतिक निकटता विद्यार्थियों को सहज रूप से दूसरे विश्वविद्यालय की सुविधाओं का लाभ उठाने में सक्षम बनाएगी। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन डॉ. अजय चौबे, संचालन डॉ. प्रमोद शंकर पाण्डेय एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रो. देवेश रंजन त्रिपाठी ने किया। इस अवसर पर राजर्षि टंडन विवि के कुलसचिव कर्नल विनय कुमार, डॉ. प्रेम प्रकाश कुशवाहा, जेएनसीयू की शैक्षणिक निदेशक डॉ. पुष्पा मिश्रा, डॉ. नीरज सिंह, डॉ. संजीव कुमार, प्रो. अशोक सिंह आदि प्राध्यापक, विद्यार्थी एवं विभिन्न अध्ययन केंद्रों के समन्वयक उपस्थित रहे।



बेटियों को शिक्षित करना विवि का उद्देश्य: प्रेसवार्ता में बोले कुलपति


कार्यक्रम के बाद आयोजित पत्रकार वार्ता में कुलपति प्रो. सत्यकाम ने कहा कि राजर्षि टंडन विवि का लक्ष्य युवाओं को रोजगारपरक शिक्षा प्रदान करना है। विद्यार्थी अपनी अधूरी शिक्षा विवि से पूरी कर सकते हैं। विद्यार्थियों को उपस्थिति की चिंता नहीं करनी है। उन्हें अध्ययन सामग्री, अंकपत्र, डिग्री सब घर पर उपलब्ध होगी। केवल उन्हें परीक्षा देने परीक्षा केंद्र जाना होगा। इसलिए वे संरक्षक जो अपनी बेटियों को पढ़ने के लिए कॉलेज भेजने में असुविधा महसूस करते हैं, वे चिंतामुक्त हो अपनी बेटियों को राजर्षि टंडन विवि से पढ़ा सकते हैं। मेरा यही उनसे निवेदन है कि अपनी बेटियों को पढ़ाएं। विवि एकल विषय से स्नातक की भी सुविधा देता है, जिससे विद्यार्थियों को विषयों का काम्बिनेशन बनाने में मदद मिलती है जो आगे टीजीटी जैसी परीक्षाओं में जरूरी होता है।