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बच्चों में झूठ बोलने की बढ़ती प्रवृत्ति और परिवार पर असर

 




बलिया।।

बलिया एक्सप्रेस के उपसंपादक डॉ सुनील की अशोक मेहता से विशेष बातचीत

विषय: बच्चों में झूठ बोलने की बढ़ती प्रवृत्ति और परिवार पर असर


अशोक मेहता—परिचय

अशोक मेहता इंदौर के वरिष्ठ लेखक, पत्रकार एवं पर्यावरणविद् हैं।बीते दो दशकों में वे समाज, शिक्षा, पर्यावरण और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर निरंतर लेखन कर रहे हैं। कई राष्ट्रीय व क्षेत्रीय अख़बारों में उनके लेख प्रकाशित होते रहे हैं।

मेहता जी समाजिक जागरूकता, बच्चों के व्यवहार, नैतिक शिक्षा और पर्यावरण-संरक्षण पर व्याख्यान भी दे चुके हैं। सरल भाषा, स्पष्ट विचार और जनहित से जुड़े विषय उनके लेखन की पहचान हैं।


  बलिया एक्सप्रेस

आजकल यह चर्चा का विषय है कि बच्चे और स्टूडेंट्स अपनी कई बातें माता-पिता से छुपाने लगे हैं। आपके लेख में भी यह चिंता दिखाई देती है। आप इसे कैसी सामाजिक प्रवृत्ति मानते हैं?


     अशोक मेहता

यह सच है कि बच्चों में झूठ बोलने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। माता-पिता उन पर भरोसा करते हैं, लेकिन कई बच्चे शहरों में हॉस्टल में रहने के दौरान गलत संगत में पड़ जाते हैं—सिगरेट, शराब, गलत रिश्ते, घूमने-फिरने की आदतें—और इन्हें घरवालों से छुपाते हैं। यह व्यवहार उनका भविष्य खराब करता है और परिवार को भी तनाव देता है।


  बलिया एक्सप्रेस

क्या यह समस्या केवल बड़े विद्यार्थियों तक ही सीमित है?


  अशोक मेहता

नहीं, यह समस्या छोटे बच्चों में भी दिख रही है। मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया के कारण बच्चे छुप-छुप कर चैटिंग करते हैं, गलत कंटेंट देखते हैं और माता-पिता से झूठ बोलते हैं। डिजिटल दुनिया ने सुविधाएँ दी हैं, पर इससे जिम्मेदारी और अनुशासन की चुनौती भी बढ़ी है।

  बलिया एक्सप्रेस

आपके अनुसार इस समस्या का मूल समाधान क्या है?


अशोक मेहता

समस्या का सबसे बड़ा समाधान है—संवाद। जिन घरों में माता-पिता और बच्चे खुलकर बातचीत करते हैं, वहां गलत आदतें पनपती नहीं। बच्चों को चाहिए कि वे माता-पिता से अपनी हर बात साझा करें। झूठ कभी समाधान नहीं होता, बल्कि भविष्य को अंधेरा करने की शुरुआत होता है।

माता-पिता को भी चाहिए कि वे बच्चों पर भरोसा रखें, पर साथ ही समय-समय पर उनकी गतिविधियों पर सकारात्मक नजर रखें।

  बलिया एक्सप्रेस

आप अपने लेख के माध्यम से क्या संदेश देना चाहते हैं?


  अशोक मेहता

मेरी कोशिश है कि बच्चों को यह समझ में आए कि उनके माता-पिता उनकी भलाई से बढ़कर कुछ नहीं चाहते। वे सिर्फ यह चाहते हैं कि बच्चे सच्चाई, अनुशासन और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ें। झूठ बोलना या बातें छुपाना केवल समस्याएँ बढ़ाता है। परिवार में जितनी खुलकर बातचीत होगी, उतना ही भविष्य उज्ज्वल बनेगा।


  बलिया एक्सप्रेस

बहुत-बहुत धन्यवाद, मेहता जी। यह विषय आज हर परिवार के लिए कसौटी बन चुका है।


अशोक मेहता

मैं बलिया एक्सप्रेस का धन्यवाद करता हूँ कि आपने इस महत्वपूर्ण मुद्दे को अपनी जगह दी। समाज में जागरूकता ही बदलाव का सबसे प्रभावी माध्यम है।