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सूत्रों से बड़ी खबर : पंकज चौधरी के हाथों मे यूपी बीजेपी की कमान ! गोरखपुर की गलियों से महराजगंज की राजनीति और अब लखनऊ की बड़ी जिम्मेदारी तक पहुँची यात्रा

 





नई दिल्ली।। सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश बीजेपी में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर जो चर्चा भीतर खाने चल रही है, उसमें केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री और महराजगंज के सात बार के सांसद पंकज चौधरी सबसे मजबूत दावेदार के रूप में सामने आए हैं। लखनऊ में हाल के दिनों में हुई संगठनात्मक बैठकों के बाद जो संकेत छनकर बाहर आए हैं, वे बताते हैं कि पार्टी नेतृत्व किसी शांत, अनुभवी और ओबीसी समाज में प्रभावशाली चेहरे को आगे लाना चाहता है और इस मानक पर पंकज चौधरी को शीर्ष प्राथमिकता दी जा रही है और इनका अध्यक्ष बनना तय माना जा रहा है।


सूत्र बताते हैं कि पार्टी का फोकस 2027 विधानसभा चुनावों की सामाजिक समीकरणों पर है, खासकर गैर-यादव ओबीसी समुदाय पर, जिसमें कुर्मी समाज की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यही कारण है कि चौधरी का नाम लगभग “फाइनल सूची” में पहुंच चुका माना जा रहा है।

         ऐसा है पंकज चौधरी का सियासी सफर 

गोरखपुर की स्थानीय राजनीति से उठकर महराजगंज की जनता के बीच गहरी पैठ बनाने वाले पंकज चौधरी की शुरुआत बेहद साधारण रही। सूत्र याद दिलाते हैं कि 1989 में उन्होंने गोरखपुर नगर निगम से पार्षद बनकर राजनीतिक सफर शुरू किया था। उसी साल गोरखपुर से अलग होकर महराजगंज जिला घोषित हुआ और इसके बाद ही चौधरी ने फैसला किया कि वे अपनी राजनीति को पूरी तरह महराजगंज की जमीन से जोड़ेंगे।


सूत्र कहते हैं कि पार्षद की कुर्सी से लेकर सात बार लोकसभा तक पहुंचना कोई सामान्य बात नहीं। 1991 में पहली जीत के बाद उन्होंने 1996, 1998, 2004, 2014, 2019 और 2024 में लोकसभा चुनाव जीतकर यह साबित किया कि महराजगंज में उनका जनाधार मजबूत और स्थायी है। दो चुनाव वे हारे भी, लेकिन उनकी पकड़ और स्वीकार्यता में कभी कमी नहीं आई।


सूत्रों ने यह भी बताया कि पार्टी चौधरी की सामाजिक जड़ों और पारिवारिक राजनीतिक अनुभव को भी महत्व दे रही है। पिता स्व. भगवती प्रसाद चौधरी का जमींदार परिवार होना, बड़े भाई प्रदीप चौधरी का जिला पंचायत अध्यक्ष बनना और उनकी माता उज्ज्वला चौधरी का दो बार महराजगंज जिला पंचायत की अध्यक्ष रहना,इन सबने चौधरी को शुरू से ही एक स्थायी सामाजिक आधार दिया।

ओबीसी कार्ड को मजबूत करना चाह रही है बीजेपी 

सूत्रों के मुताबिक बीजेपी को 2024 में ओबीसी समीकरण में आई हलचल के बाद ऐसे चेहरे की जरूरत है, जो पूर्वांचल में कुर्मी समाज व अन्य पिछड़े वर्गों में पार्टी का विश्वास मजबूत कर सके। इसी रणनीति के कारण चौधरी का नाम तेजी से ऊपर आया है। उनकी शांत-स्वभाव वाली छवि, विवादों से दूरी और लगातार क्षेत्रीय सक्रियता उन्हें संगठन के लिए सुरक्षित विकल्प बनाती है।


लखनऊ में मौजूद पार्टी के सूत्र साफ संकेत दे रहे हैं कि संगठन चौधरी के नाम पर अंतिम मोहर लगाने की दिशा में आगे बढ़ चुका है। औपचारिक घोषणा का इंतजार है, पर राजनीतिक हलकों में यह लगभग तय माना जा रहा है कि पार्षद से सांसद और फिर केंद्रीय मंत्री बनने वाले पंकज चौधरी की यात्रा अब यूपी बीजेपी की कमान तक पहुँच सकती है।सूत्रों की मानें तो यह फैसला न सिर्फ संगठनात्मक रणनीति बल्कि सामाजिक समीकरणों के लिहाज से भी बड़ा कदम साबित होगा।