श्रीराम कथा के दूसरे दिन शिव मय हुआ पूरा पंडाल : गुरु शिष्य की जोड़ी ने शिव विवाह प्रसंग को गाकर बनाया मंगलवार की शाम को बनाया मंगलमय
दूसरे दिन राजन जी महाराज के संगीतमय प्रवचन को सुनने उमड़ी भीड़
मधुसूदन सिंह
बलिया।। टीडी कालेज मैदान में प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के संकल्प से चल रहे श्रीराम कथा के दूसरे दिन प्रेम भूषण जी महाराज व राजन जी महाराज ने श्री शिव विवाह की कथा सुनाई। पूज्य श्री प्रेम भूषण जी महाराज के प्रिय शिष्य व प्रसिद्ध कथा वाचक राजन जी महाराज ने पांडाल मे पहुंच कर सबसे पहले देवी गीत -निमिया के डारि मैया..... गाकर पूरे पांडाल को भक्ति मय बना दिया। फिर श्री प्रेम भूषण जी के आदेश पर भगवान शिव को गण किस तरह से दूल्हा बना रहे है, को गाकर सबके हृदय मे भगवान शिव के प्रति अगाध आस्था को जागृत किया। इसके बाद अपने पूज्य गुरुदेव को सादर नमन कर सुदूर देश के बर्लिन मे दो दिन बाद होने वाली श्रीराम कथा को कहने के लिये रवाना हो गये। राजन जी व प्रेम भूषण जी का एक दूसरे को आत्मीय आलिंगन व गुरु द्वारा शिष्य को आशीष देने के बाद सर को चूम कर बिदा देना पूरे पांडाल को भावविभोर कर दिया।
गुरु शिष्य का एक साथ हुआ पांडाल मे आगमन
श्रीराम कथा के दूसरे दिन कथा वाचक पूज्य श्री प्रेम भूषण जी अपने शिष्य पूज्य श्री राजन जी के साथ पांडाल मे प्रवेश किया।इनके साथ राज्य सभा सदस्य नीरज शेखर, डॉ संजय सिंह, डॉ संजय गौड़, परिवहन मंत्री के अनुज धर्मेंद्र सिंह, पूर्व ब्लॉक प्रमुख गुड्डू राय, ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि पुन्ना सिंह, जिलाध्यक्ष बीजेपी संजय मिश्र आदि गणमान्य लोग भी मौजूद रहें।
शिव विवाह की कथा के माध्यम से दिया संदेश
कथा के माध्यम से पूज्य श्री प्रेम भूषण जी नव कई सन्देश दिया। अत्याधुनिक क़ानून लिव इन रिलेशन शिप को बताया सनातन विरोधी बताते हुए इसको खत्म करने की बात कही। साथ ही शादी विवाह को कुछ रिश्तेदारों के कहने मात्र से ही करने की सोच पर भी प्रहार करते हुए, जांच पड़ताल के बाद ही करने की सलाह दी।
मैना माता के द्वारा पार्वती जी को विदाई के समय जो सीख दी गयी, वह आज भी प्रासंगिक है और हर मां को इस सीख को अपनी पुत्रियों को विदाई के समय जरूर देनी चाहिये जिससे उनका दाम्पत्य जीवन खुशहाल और सुखमय बना रहे।
परिवहन मंत्री की माता श्री ने दूल्हा बने भगवान शिव व दुल्हन माता पार्वती का किया पूजन
कथा के दौरान जब भगवान शिव दूल्हा स्वरुप मे पर्वतराज के द्वार पर पहुंचे और माता पार्वती को जयमाला पहनाया, उस स्वरुप को स्मरण कर परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह की माता श्री ने पुष्प चढ़ाकर, मिष्ठान चढ़ाकर विधि विधान से पूजन अर्चन किया है।
भगवान कार्तिकेय के सेनापति बनने तक चली कथा
विवाह के बाद भगवान शिव व माता पार्वती के कैलाश पहुंचने का सजीव वर्णन पूज्य श्री प्रेम भूषण जी ने किया। तत्पश्चात भगवान कार्तिकेय का जन्म व सेनापति बनने तक की कथा को सुनाकर कथा का विश्राम दिया गया। इसके बाद परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह व अन्य गणमान्य लोगों ने भगवान शिव की आरती की।
इस दौरान परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के अनुज धर्मेंद्र सिंह आदि ने व्यास पीठ का पूजन किया। कथा में अनिल पांडेय, अवनीश शुक्ल, अशोक सिंह, सुरजीत सिंह, अमरीश पांडेय, हर्ष सिंह आदि मौजूद रहे।












