अधिवक्ताओं की हड़ताल का साइड इफेक्ट :बलिया - न्याय के लिये गुहार लगाती महिला अधिवक्ता ,न्याय मिलने में हड़ताल बन रही है बाधक , महिला अधिवक्ता का एसओसी पर जानबूझ कर नही सुनने का आरोप
अधिवक्ताओं की हड़ताल का साइड इफेक्ट :बलिया - न्याय के लिये गुहार लगाती महिला अधिवक्ता ,न्याय मिलने में हड़ताल बन रही है बाधक , महिला अधिवक्ता का एसओसी पर जानबूझ कर नही सुनने का आरोप
बलिया 25 जुलाई 2019 ।।
हड़ताल जब भी होती है उसमें करने वाले और अन्य लोग भी पिसते है ,लेकिन लोकतंत्र में अपनी मांगों को मनवाने का इससे सबल और लोकतांत्रित तरीका दूसरा है भी नही । जो इससे पीड़ित होता है वह इसको खराब कहता है और जो लाभान्वित होता है वह सही कहता है । सबकी अपनी अपनी तराजू और बांट है जिससे तौलते है । वही अधिवक्ताओं की हड़ताल से वादी प्रतिवादी कैसे पीड़ित होते है , इस का एक नजारा बलिया जनपद के एसओसी न्यायालय में देखने को मिला , जहां इस से पीड़ित वादी जो एक महिला अधिवक्ता भी है ,अपने मुकदमे को सुनने की गुहार लगाती रही पर इनका केस नही सुना गया । वादी महिला अधिवक्ता अफरोज परवीन ने तो एसओसी धनराज यादव पर ही उच्चाधिकारियों और अधिवक्ता संघ के तीन तीन अध्यक्षो के लिखित देने के बावजूद न सुनने का आरोप लगाया है । पीड़ित अधिवक्ता अफरोज का कहना है कि जिलाधिकारी बलिया के दिन प्रतिदिन सुनवाई करके जल्द से जल्द निस्तारण के आदेश के बावजूद और स्वयं एसओसी बलिया द्वारा शासन को जल्द से जल्द निस्तारण करने के अपने लिखित आदेश के बावजूद, सुनवाई न करना शासन और जिला अधिकारी को गुमराह करने का कृत्य है । अफरोज ने सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपने मुकदमे का जल्द से जल्द निस्तारण कराने की अपील की है । बता दे कि अफरोज के पक्ष में बार संघ के तीनों अध्यक्षो ने लिखित देकर बंदोबस्त अधिकारी से अनुरोध किया है कि हमारी हड़ताल की घोषणा की अवधि में इनके मुकदमे को अपने चेम्बर में सुनकर निर्णय करेंगे ,तो हम लोगो को कोई आपत्ति नही होगी । अब देखते है इस पीड़ित महिला अधिवक्ता को कब न्याय मिलता है ।
इस संबंध में जब बंदोबस्त अधिकारी बलिया धनराज यादव से बात की गई तो उनका कहना था कि यह सही है कि शासन से , जिला अधिकारी महोदय के यहां से इनके मुकदमे को जल्द से जल्द निस्तारण करने का आदेश है । यह भी सही है कि बार के तीनों सम्मानित अध्यक्षो में चेम्बर में भी इनके केस कक सुनने के लिये लिखित दिया है । लेकिन यह भी सत्य है कि बुधवार को बार संघ के अध्यक्ष और कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने मुझसे और अफरोज परवीन से सुनवाई कराने की जिद छोड़कर अगली तारीख लेने के लिये अफरोज परवीन से हाथ भी जोड़े । इसके बाद ही इनके केस में अगली तिथि नियत की गई है । मेरा प्रयास है कि इनके मुकदमे का निस्तारण जल्द से जल्द कर दूं ।
बलिया 25 जुलाई 2019 ।।
हड़ताल जब भी होती है उसमें करने वाले और अन्य लोग भी पिसते है ,लेकिन लोकतंत्र में अपनी मांगों को मनवाने का इससे सबल और लोकतांत्रित तरीका दूसरा है भी नही । जो इससे पीड़ित होता है वह इसको खराब कहता है और जो लाभान्वित होता है वह सही कहता है । सबकी अपनी अपनी तराजू और बांट है जिससे तौलते है । वही अधिवक्ताओं की हड़ताल से वादी प्रतिवादी कैसे पीड़ित होते है , इस का एक नजारा बलिया जनपद के एसओसी न्यायालय में देखने को मिला , जहां इस से पीड़ित वादी जो एक महिला अधिवक्ता भी है ,अपने मुकदमे को सुनने की गुहार लगाती रही पर इनका केस नही सुना गया । वादी महिला अधिवक्ता अफरोज परवीन ने तो एसओसी धनराज यादव पर ही उच्चाधिकारियों और अधिवक्ता संघ के तीन तीन अध्यक्षो के लिखित देने के बावजूद न सुनने का आरोप लगाया है । पीड़ित अधिवक्ता अफरोज का कहना है कि जिलाधिकारी बलिया के दिन प्रतिदिन सुनवाई करके जल्द से जल्द निस्तारण के आदेश के बावजूद और स्वयं एसओसी बलिया द्वारा शासन को जल्द से जल्द निस्तारण करने के अपने लिखित आदेश के बावजूद, सुनवाई न करना शासन और जिला अधिकारी को गुमराह करने का कृत्य है । अफरोज ने सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपने मुकदमे का जल्द से जल्द निस्तारण कराने की अपील की है । बता दे कि अफरोज के पक्ष में बार संघ के तीनों अध्यक्षो ने लिखित देकर बंदोबस्त अधिकारी से अनुरोध किया है कि हमारी हड़ताल की घोषणा की अवधि में इनके मुकदमे को अपने चेम्बर में सुनकर निर्णय करेंगे ,तो हम लोगो को कोई आपत्ति नही होगी । अब देखते है इस पीड़ित महिला अधिवक्ता को कब न्याय मिलता है ।
इस संबंध में जब बंदोबस्त अधिकारी बलिया धनराज यादव से बात की गई तो उनका कहना था कि यह सही है कि शासन से , जिला अधिकारी महोदय के यहां से इनके मुकदमे को जल्द से जल्द निस्तारण करने का आदेश है । यह भी सही है कि बार के तीनों सम्मानित अध्यक्षो में चेम्बर में भी इनके केस कक सुनने के लिये लिखित दिया है । लेकिन यह भी सत्य है कि बुधवार को बार संघ के अध्यक्ष और कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने मुझसे और अफरोज परवीन से सुनवाई कराने की जिद छोड़कर अगली तारीख लेने के लिये अफरोज परवीन से हाथ भी जोड़े । इसके बाद ही इनके केस में अगली तिथि नियत की गई है । मेरा प्रयास है कि इनके मुकदमे का निस्तारण जल्द से जल्द कर दूं ।




