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नगरा बलिया : भारी बरसात से गोशाला से पाठशाला बने तालाब, दर्जनों घर गिरे, शिव मंदिर के पास वाला 150 साल पुराना पीपल भी गिरा , मंदिर को नही हुआ कोई नुकसान


 भारी बरसात से गोशाला से पाठशाला बने तालाब, दर्जनों घर गिरे, शिव मंदिर के पास वाला 150 साल पुराना पीपल भी गिरा , मंदिर को नही हुआ कोई नुकसान
संतोष द्विवेदी 







नगरा बलिया 13 जुलाई 2019 ।। क्षेत्र में बुधवार से जारी बारिश शुक्रवार की रात तबाही लेकर आई। पाठशाला से लेकर गोशाला तक तालाब का रूप ले चुके है। क्षेत्र के गांवो में भी पानी घुस चुका है। गावों में कच्ची मकानों को बारिश ने धराशाई कर चुका है। वहीं छतों से भी पानी का टपकना जारी है। क्षेत्र के मार्गो पर पेड़ो के गिरने से आवागमन बाधित रहा, वहीं 72 घंटे से पानी में डूबे गावों में अंधेरा पसरा हुआ है। किसानों की बची खुची फसल व नर्सरी भी डूब गई है। खरीफ की फसल पर ग्रहण लग चुका है, जिससे किसान काफी चिंतित है। बारिश ने पशुओं के सामने चारे का संकट खड़ा कर दिया है। पानी के वजह से गावों में विषैले जंतु घरो में शरण लेना शुरू कर दिए है, जिससे ग्रामीण भयभीत हो गए है।
             मानसूनी बरसात ने पांच दशक का रिकार्ड तोड़ते हुए क्षेत्र में तबाही मचा रखी है। गावों में कच्ची मकानों का गिरना जारी है। वहीं लगातार बारिश से छतों से पानी टपकना शुरू हो गया है। किसानों की खरीफ की फसल पानी में डूब चुकी है। वहीं साग सब्जी आदि को लेकर वो ग्रामीण काफी चिंतित है।जिनकी जीविका सब्जी पर ही आश्रित थी। किसानों की लागत पानी में बह गई है। जो किसान धान की रोपाई नहीं कर पाए है, उनकी बेहन डूब जाने से धान की रोपाई नहीं हो पाएगी। शुक्रवार की रात आई बारिश से क्षेत्र की सड़कों पर पेड़ो के धराशाई होने से आवागमन रातभर बाधित रहा। क्षेत्र के चचया, सरायचावट, कसौंडर, ढेकवारी, नगरा, आदि गावों में पानी घुस गया है। विद्युत पोल धराशाई हो चुके है। वहीं गोशाला से लेकर पाठशाला तक पानी में डूब चुके है। जहरीले जंतुओ का घरों के तरफ रुख से ग्रामीण भयभीत है। वहीं ग्रामीण पशुओं के चारे को लेकर के चिंतित है।नगरा। क्षेत्र में बुधवार से जारी बारिश शुक्रवार की रात तबाही लेकर आई। पाठशाला से लेकर गोशाला तक तालाब का रूप ले चुके है। क्षेत्र के गांवो में भी पानी घुस चुका है। गावों में कच्ची मकानों को बारिश ने धराशाई कर चुका है। वहीं छतों से भी पानी का टपकना जारी है। क्षेत्र के मार्गो पर पेड़ो के गिरने से आवागमन बाधित रहा, वहीं 72 घंटे से पानी में डूबे गावों में अंधेरा पसरा हुआ है। किसानों की बची खुची फसल व नर्सरी भी डूब गई है। खरीफ की फसल पर ग्रहण लग चुका है, जिससे किसान काफी चिंतित है। बारिश ने पशुओं के सामने चारे का संकट खड़ा कर दिया है। पानी के वजह से गावों में विषैले जंतु घरो में शरण लेना शुरू कर दिए है, जिससे ग्रामीण भयभीत हो गए है।
     
             मानसूनी बरसात ने पांच दशक का रिकार्ड तोड़ते हुए क्षेत्र में तबाही मचा रखी है। गावों में कच्ची मकानों का गिरना जारी है। वहीं लगातार बारिश से छतों से पानी टपकना शुरू हो गया है। किसानों की खरीफ की फसल पानी में डूब चुकी है। वहीं साग सब्जी आदि को लेकर वो ग्रामीण काफी चिंतित है।जिनकी जीविका सब्जी पर ही आश्रित थी। किसानों की लागत पानी में बह गई है। जो किसान धान की रोपाई नहीं कर पाए है, उनकी बेहन डूब जाने से धान की रोपाई नहीं हो पाएगी। शुक्रवार की रात आई बारिश से क्षेत्र की सड़कों पर पेड़ो के धराशाई होने से आवागमन रातभर बाधित रहा। क्षेत्र के चचया, सरायचावट, कसौंडर, ढेकवारी, नगरा, आदि गावों में पानी घुस गया है। विद्युत पोल धराशाई हो चुके है। वहीं गोशाला से लेकर पाठशाला तक पानी में डूब चुके है। जहरीले जंतुओ का घरों के तरफ रुख से ग्रामीण भयभीत है। वहीं ग्रामीण पशुओं के चारे को लेकर के चिंतित है।नगरा। क्षेत्र में बुधवार से जारी बारिश शुक्रवार की रात तबाही लेकर आई। पाठशाला से लेकर गोशाला तक तालाब का रूप ले चुके है। क्षेत्र के गांवो में भी पानी घुस चुका है। गावों में कच्ची मकानों को बारिश ने धराशाई कर चुका है। वहीं छतों से भी पानी का टपकना जारी है। क्षेत्र के मार्गो पर पेड़ो के गिरने से आवागमन बाधित रहा, वहीं 72 घंटे से पानी में डूबे गावों में अंधेरा पसरा हुआ है। किसानों की बची खुची फसल व नर्सरी भी डूब गई है। खरीफ की फसल पर ग्रहण लग चुका है, जिससे किसान काफी चिंतित है। बारिश ने पशुओं के सामने चारे का संकट खड़ा कर दिया है। पानी के वजह से गावों में विषैले जंतु घरो में शरण लेना शुरू कर दिए है, जिससे ग्रामीण भयभीत हो गए है।
     
       वहीं साग सब्जी आदि को लेकर वो ग्रामीण काफी चिंतित है।जिनकी जीविका सब्जी पर ही आश्रित थी। किसानों की लागत पानी में बह गई है। जो किसान धान की रोपाई नहीं कर पाए है, उनकी बेहन डूब जाने से धान की रोपाई नहीं हो पाएगी। शुक्रवार की रात आई बारिश से क्षेत्र की सड़कों पर पेड़ो के धराशाई होने से आवागमन रातभर बाधित रहा। क्षेत्र के चचया, सरायचावट, कसौंडर, ढेकवारी, नगरा, आदि गावों में पानी घुस गया है। विद्युत पोल धराशाई हो चुके है। वहीं गोशाला से लेकर पाठशाला तक पानी में डूब चुके है। जहरीले जंतुओ का घरों के तरफ रुख से ग्रामीण भयभीत है। वहीं ग्रामीण पशुओं के चारे को लेकर के चिंतित है।नगरा। क्षेत्र में बुधवार से जारी बारिश शुक्रवार की रात तबाही लेकर आई। पाठशाला से लेकर गोशाला तक तालाब का रूप ले चुके है। क्षेत्र के गांवो में भी पानी घुस चुका है। गावों में कच्ची मकानों को बारिश ने धराशाई कर चुका है। वहीं छतों से भी पानी का टपकना जारी है। क्षेत्र के मार्गो पर पेड़ो के गिरने से आवागमन बाधित रहा, वहीं 72 घंटे से पानी में डूबे गावों में अंधेरा पसरा हुआ है। किसानों की बची खुची फसल व नर्सरी भी डूब गई है। खरीफ की फसल पर ग्रहण लग चुका है, जिससे किसान काफी चिंतित है। बारिश ने पशुओं के सामने चारे का संकट खड़ा कर दिया है। पानी के वजह से गावों में विषैले जंतु घरो में शरण लेना शुरू कर दिए है, जिससे ग्रामीण भयभीत हो गए है।
     


शिव मंदिर के पास वाला 150 साल पुराना पीपल भी गिरा , मंदिर को नही हुआ कोई नुकसान
 नगरा।  नगरा कस्बे के मलप मोड़ पर शिव मन्दिर के पास स्थित डेढ़ सौ साल पुराना पीपल का वृक्ष भारी बारिश में गिर गया।आश्चर्यजनक रहा कि मन्दिर के तरफ झुका पीपल का वृक्ष ठीक विपरित सड़क के तरफ गिर गया, जिससे मन्दिर में दरार तक नहीं आई है। पेड़ का ठीक विपरित दिशा में गिरने को आमजन भगवान की शिव की कृपा मान रहे है।