योगीराज मे भी इतनी हिमाकत : बिना टेंडर, बिना काम पूरा किये हो गया करोड़ों का भुगतान, बलिया के पूर्व सीएमओ डॉ संजीव वर्मन व कार्यवाहक सीएमओ डॉ विजय यादव का कारनामा
मधुसूदन सिंह
बलिया।। योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति की अगर कही जमकर धज्जियां उड़ायी जा रही है, तो वह है बलिया जनपद। जहां स्वास्थ्य विभाग मे बिना टेंडर, बिना कार्य पूर्ण कराये ही वाराणसी की एक फर्म को करोड़ों का भुगतान किये जाने का मामला सुर्खियों मे है। आलम यह है नियम से हट कर पिछले लगभग दो सालों से इस फर्म से ही निर्माण व मरम्मत के हुए कार्यों का लगभग 80 प्रतिशत कराया गया है। हद तो यह है कि इस फर्म से जहां जहां कार्य कराया गया है, वहाँ वहाँ अभी भी कार्य अधूरे होने की जानकारी मिल रही है, फिर भी शत प्रतिशत भुगतान कर दिया गया है। इस घोटाले के संबंध मे जब संबंधित सीएचसी प्रभारियों से बलिया एक्सप्रेस ने बातचीत की तो उनका कहना था कि रंग रोगन, कुछ मरम्मत के कार्य कराये गये है लेकिन यह भी साफ लफ्जो मे कहां कि उन्हें नही पता है कि कब टेंडर हुआ और कितने कार्यों को करना था और कितना हुआ? इनका कहना था कि हमें सीएमओ साहब ने फोन से कहा कि इनको हमारे आदेश से कार्य करने के लिये भेजा गया है। इन प्रभारियों ने यह भी बताया है कि निर्माण या मरम्मत कार्य पूर्ण हो गया है, इनकी NOC भी इनसे न लेकर सीधे नोडल निर्माण से ली गयी है।
मात्र 10-11 माह के सीएमओ के कार्यकाल बना भ्रष्टाचार का अड्डा
पिछले तीन सालों से आयाराम गयाराम की तर्ज पर बलिया मे सीएमओ की पोस्टिंग भ्रष्टाचार को बढ़ाने मे सबसे बड़ी सहायक बनी है। स्वास्थ्य विभाग के शासन मे बैठे उच्चाधिकारीयों ने बलिया मे 10 माह, 11 माह के कार्यकाल वाले सीएमओ को भेजकर न जाने कौन सा भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की नीति बना रखी है, किसी को समझ मे नही आ रही है। अन्य विभागों मे तो सेवानिवृति से 6 माह पूर्व प्रशासनिक व वित्तीय अधिकार हटा लिये जाते है लेकिन स्वास्थ्य विभाग ऐसा है जहां का सीएमओ अपने सेवानिवृति के दिन तक भुगतान कर सकता है, ट्रांसफर पोस्टिंग कर सकता है, ऐसा बलिया मे साफ देखा जा सकता है। अंतिम समय मे जो भुगतान हो रहा हो या ट्रांसफर पोस्टिंग हो रही हो, वह भ्रष्टाचार मुक्त होंगी, एक अदना आदमी भी नही कर सकता है। बलिया को भ्रष्टाचार मुक्त करने के लिये अधिक दिनों वाले कड़क सीएमओ की जरूरत है।
डॉ संजीव वर्मन ने किया है सीएचसी सिकंदरपुर के मरम्मत के लिये लगभग 34 लाख का भुगतान
बलिया के पूर्व सीएमओ डॉ संजीव वर्मन ने अपने 31 दिसंबर 2025 से कुछ दिन पूर्व ही सीएचसी सिकंदरपुर मे हुए मरम्मत कार्य के लिये लगभग 34 लाख का भुगतान वाराणसी की फर्म को किया है। डॉ वर्मन के कार्यकाल (10 माह ) का अगर गहनता से उच्च स्तरीय जांच करा दी जाय तो करोड़ों रूपये के भुगतान मे गड़बड़ी ही गड़बड़ी मिल सकती है। सब से बड़ा सवाल यह है कि शासन से एक लाख के ऊपर के कार्य के लिये टेंडर या जेम पोर्टल से टेंडर कराने का प्राविधान है तो फिर बिना उपरोक्त प्रक्रिया को अपनाये लाखों करोड़ों का भुगतान कैसे किया गया है।
कार्यवाहक सीएमओ डॉ विजय यादव की चांदी ही चांदी
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ विजय यादव के लिये 2024 व 2025,सोने की थाली मे भोजन लेकर आने वाला साल साबित हुआ है। इन्होने दो बार के कार्यवाहक सीएमओ बनने के बाद जो सफलता अर्जित की है, वह पूर्ण कालिक सीएमओ को हासिल करने मे भी समय लगता है। वर्ष 2024 के 31 दिसंबर को तत्कालीन सीएमओ डॉ विजय पति द्विवेदी का प्रशासनिक कार्य खत्म हुआ था और वाराणसी मे एक विशेषज्ञ चिकित्सक के रूप मे स्थानांतरित हो गये थे। इसके बाद कार्यवाहक सीएमओ का चार्ज डॉ विजय यादव को मिला था। इस सुनहरे समय का डॉ यादव ने भरपूर फायदा उठाया और मार्च 2025 मे सीएचसी अगाऊर बांसडीह मे मरम्मत कार्य के लिये लगभग 1 करोड़ से ज्यादे का भुगतान वाराणसी की चर्चित फर्म को कर दिया। यहां भी सीएचसी प्रभारी को न कोई सूचना दी गयी, न NOC ही ली गयी। सब से बड़ी बात यह है कि इसका भुगतान डॉ यादव ने कार्यवाहक सीएमओ के रूप मे अपने कार्यकाल मे किया। यह भी सूच्य हो कि पिछले कई साल से डॉ यादव ही निर्माण के नोडल अधिकारी भी है।
लोगों मे चर्चा : क्या स्वास्थ्य विभाग मे हुए इस घोटाले की होंगी जाँच? क्या बलिया मे लूट के लिये ही बनाये जाते है कार्यवाहक
जिस जनपद मे स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी हो, प्रशासन धन की कमी का रोना रोता हो, वहाँ करोड़ों का घोटाला, कही न कही इसकी जड़ों के ऊपरी स्तर तक जुड़े होने की तरफ भी इशारा जरूर कर रहा है। भ्रष्टाचार के बढ़ने के कारणों मे सेवानिवृति से पूर्व उत्तराधिकारियो की शासन स्तर से नियुक्ति न करना भी है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग मे कार्यवाहक को वित्तीय व प्रशासनिक दायित्व की मिली शक्तियां भी लूट की छूट देती है। प्रदेश सरकार को इस पर ध्यान देना बहुत जरुरी है।
साथ ही वाराणसी की चर्चित फर्म के द्वारा पिछले दो सालों कराये गये कार्यों, किये गये भुगतान और कार्य देने मे तकनिकी बारिकियों की जाँच आवश्यक हो गयी है। अगर ऐसा हो गया तो बलिया के स्वास्थ्य विभाग से भ्रष्टाचार रूपी कैंसर का समूल इलाज हो जायेगा।
अब कह रहे है जांच कराने की बात
इस संबंध मे जब कार्यवाहक सीएमओ डॉ विजय यादव से बातचीत की गयी तो इनका कहना था कि इन प्रकरणों की जांच कराऊंगा और दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी। अब सीएमओ साहब को कौन समझाये कि साहब आप ही तो वह अधिकारी है जो निर्माण के नोडल है, आप ही हैंडओवर से पूर्व NOC देते है और अंत मे सीएमओ के रूप मे भुगतान भी किये है। अब किस बात की जांच कराएंगे?



