Breaking News

बलिया के सोहांव ब्लॉक के गड़हांचल और दियरांचल के ग्रामीण जो आज भी प्रति वर्ष आग से अपना सबकुछ लूट जाने के लिये अभिशप्त, नही है फायर स्टेशन

बलिया के सोहांव ब्लॉक के गड़हांचल और दियरांचल के ग्रामीण जो आज भी प्रति वर्ष आग से अपना सबकुछ लूट जाने के लिये अभिशप्त, नही है फायर स्टेशन

                    (दोनों सांकेतिक फोटो है )
डॉ शंकर सिंह की रिपोर्ट
नरही (बलिया) 7 अप्रैल 2019 ।।
हमारे दर्द की उन तक भला कैसे खबर पहुँचे,
जहां सपने नही जाते वहां कैसे नजर पहुँचे ,
 निराला रूप है संवेदना का आज हर तट पर,
 कोई जब डूब जाए सिसिकियां लेती लहर पहुँचे।। 
   जी हां , यह कोई मन को बहलाने वाली पंक्तियां नही है बल्कि गड़हांचल और दियरांचल में बसे फेफना विधान सभा के सोहांव ब्लॉक के निवासियों की तकदीर और लाचारियों को बयां करती पंक्तियां है । आजादी के इतने वर्षों बाद भी हर राजनैतिक दल की सरकारें बनी , इस क्षेत्र की जनता ने हर सरकार में अपने यहां से प्रतिनिधि ही नही मंत्री भी बनवायी , नेताओ की मनोकामनाएं तो पूर्ण हो गयी , बस पूरी नही हुई तो सोहांव ब्लॉक के निवासियों की आग से बचाव के लिये एक अदद फायर स्टेशन की । पिछली सपा सरकार में बलिया में कुछ ही दिनों के लिये एक ऐसे जिलाधिकारी ने कार्यभार ग्रहण किया था , जो आमजन की पीड़ा को समझते थे उनका नाम था सत्यनारायण श्रीवास्तव । इनके कार्यकाल में जब 4 अप्रैल 2013 को टुटुवारी में लगी आग ने इस गांव के लोगो का सर्वस्व जलाकर खाक ही नही कर दिया था , बल्कि रहने का आशियाना भी छीन लिया था तब तत्कालीन जिलाधिकारी सत्यनारायण श्रीवास्तव ने तत्काल फायर स्टेशन बनाने की अपनी स्वीकृति ही नही दी , नरही पीएचसी( जो आजकल सीएचसी के ही कैम्पस में पीछे हो गयी है ) के अंदर इस फायर स्टेशन को बनाने की स्वीकृति भी तत्काल दे दी । तत्कालीन राजस्व मंत्री अम्बिका चौधरी ने नरही थाने पर एक छोटी गाड़ी को खड़ी भी करवा दिया था । आज के मंत्री उपेंद्र तिवारी जी तब भी इस क्षेत्र के विधायक थे । लेकिन अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि क्षेत्रीय विधायक के मंत्री रहते हुए भी इतने सालों बाद भी क्षेत्रीय जनता गर्मियों में कलेजे पर हाथ रख कर सोती है कि न जाने आग की कौन सी चिंगारी तिनका तिनका एकत्रित करके बनवाये गये आशियाने के साथ सब कुछ जलाकर खाक कर दे और सरकारी अमला हाथ पर हाथ धरे बैठा रहे ।
(2013 में लगी भीषण आग की फ़ाइल फोटो)

 (2013 में लगी भीषण आग की फ़ाइल फोटो)


(2013 से नेताओ और अधिकारियों की उदासीनता से सोहांव ब्लाक के लोगो को मुंह चिढ़ाता बोर्ड )
(2013 में लगी भीषण आग की फ़ाइल फोटो)

इस क्षेत्र के लोग जनप्रतिनिधियों के द्वारा कही जाने वाली बातों पर यकीं करना छोड़कर अपने दर्द को कुछ इस तरह बयां कर रहे है -
हमें दर्द दे वो जीते, हम प्यार करके हारे,
जिन्हें हमने अपना माना, वे न हो सके हमारे।।
ये भी खूब जिन्दगी का कैसा अजब सफर है,
खतरों भरी है सड़कें, कांटों भरे किनारे।।
है राह एक सबकी मंजिल अलग-अलग है,
इससे भी हर नजर में हैं जुदा-जुदा नजारे।।
बातें बहुत होती हैं, सफरों में सहारों की
चलता है पर सड़क में हर एक बेसहारे।।

हम बात कर रहे है विकासखंड सोंहाव अंतर्गत गडहांचल के तटीय इलाके दियरांचल में गर्मी का मौसम आते ही प्रतिदिन कहीं न कहीं आग का तांडव शुरू हो जाता है और अपनी आंखों के सामने ही तिनका तिनका बटोर कर हाड तोड़ मेहनत करके बनाया गया गरीबों का आशियाना पल भर में खाक हो जाता है।और बेबस मजबूर होकर गरीब अपने बच्चे को भूख से बिलबिलाते तड़पता हुआ अपनी आंखों से देखता रहता है।खुले आसमान के नीचे बैठकर अपने भाग्य पर आंसू बहाते हुए कहता है कि भगवान हमने क्या बिगाड़ा था जो ऐसी सजा हमको मिली है।माताएं अपनी लड़कियों को देखकर छाती पीटकर दहाड़े मार कर चिल्लाती है की बेटी की शादी कैसे होगी।सब कुछ तो चला गया जनप्रतिनिधि और शासन प्रशासन के लोग पहुंचकर घड़ियाली आंसू बहाते हैं।और राहत के नाम पर कुछ बांट कर अपनी जिम्मेदारी पूरी समझते हैं। काश यह लोग क्षेत्र की जनता का दुख दर्द समझकर बचाव की व्यवस्था में पहले से लग जाते तो गरीबों के आशियाने कुछ तो बस जाते।
  गणहांचल में आग से बचाव के लिए जिला मुख्यालय पर ही फायर ब्रिगेड की व्यवस्था है।सूचना पाकर मौके पर जब तक गाड़ी पहुंचती है तब तक सब कुछ जलकर नष्ट हो चुका होता है।
   4 अप्रैल 2013 को क्षेत्र के टुटुवारी गांव में लगी भीषण आग ने ग्रामीणों के मेहनत पर पानी फेर दिया था। अगले ही दिन तत्कालीन जिलाधिकारी सत्यनारायण श्रीवास्तव ने प्रशासनिक अमले के साथ मौके पर पहुंच कर इलाकाई लोगों का दर्द समझा। और वहां से लौटकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नरही के पुराने भवन का निरीक्षण कर वहीं फायर स्टेशन को अस्तित्व में लाने का निर्णय लिया गया था और वहां फायर स्टेशन का बोर्ड भी लगा दिया गया। तत्कालीन मंत्री अंबिका चौधरी ने भी मौके का निरीक्षण कर अग्निशमन केंद्र निर्माण की मुहर लगा दी। लेकिन अब तक गरीबों के अरमानों को पंख नहीं लगपाया। हालांकि अंबिका चौधरी ने उसी समय एक फायर सर्विस की छोटी गाड़ी नरही थाने पर उपलब्ध कराई थी।जो प्रतिवर्ष नरही थाने पर गर्मी में आती है कुछ घटनाएं हो जाने के बाद फिर जून में चली जाती है।
   गडहांचल और दियरांचल में कृषि या पशुपालन से ही लोग अपनी जीविका चलाते हैं और इस क्षेत्र में आज भी अधिकांश गरीबों के पास रहने के लिए एक अदद छत और भोजन की सुचारू व्यवस्था नहीं है।किसी तरह मेहनत करके फूस की पलानी (झोपड़ी )डालकर रात दिन मेहनत मजदूरी करके अपना घर गृहस्ती चलाते हैं।पर आग और पानी इन्हें तबाह कर देते हैं,गजहांचल और दियरांचल के मजदूर मेहनतकश गरीबों की गाथा और दर्द आखिर कौन समझेगा। सुबे में सत्ता परिवर्तन के बाद गरीबों के हितैषी होने का दंभ भरने वाली सरकार के आने से लोगों में उम्मीद जगी थी कि गडहांचल की जनता को एक फायर स्टेशन मिल जाएगा। लेकिन इस सरकार की भी नजरें इनायत नहीं हो पाई।क्षेत्रीय लोगो ओपी राय,खुर्शीद आलम,राम प्रवेश सिंह,सोनू वर्मा आदि का कहना है कि आग से फौरी राहत के लिए इलाके में फायर सर्विस की तत्काल आवश्यकता है।