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सरकारी डाक्टर कर रहे है धड़ल्ले से प्रेक्टिस, स्वास्थ्य विभाग खामोश ?

सरकारी डाक्टर कर रहे है धड़ल्ले से प्रेक्टिस, स्वास्थ्य विभाग खामोश ?
ए कुमार

सोनभद्र 9 अप्रैल 2019 ।।
पैसे की हवस के चलते धरती के भगवान कहे जाने वाले डाक्टर अपने कर्तब्य को ही भूल गए है। अपनी मान मर्यादाओ को तार तार करते हुए अपने धर्म को भूल गए है। जनता की सेवा करने के लिए सरकार बेतन के रूप में मोटी रकम भी देती है। प्राइवेट प्रेक्टिस न करे इस लिए सरकार इन्हें 20 से 25 हजार रुपये (N P A ) नान प्रेक्टिस अलाउंस भी देती है। इसके बावजूद डॉक्टरों ने खुद को प्राइवेट प्रेक्टिस से अलग नही कर पा रहे है। अधिकांश सरकारी डाक्टर  अपनी प्राइवेट हॉस्पिटल खोलकर   अधिकांश समय अपने हास्पिटल को देते है और जहाँ उनकी सरकारी चिकित्सालय पर नियुक्त डाक्टरो के इस गैर जिम्मेदराना रवैये से मरीज मजबूरन झोला छाप डाक्टरो के सरन में जानें को विवश हो जाते है जिससे उनका आर्थिक शारीरिक और मानसिक शोषण किया जाता है। यहाँ तक कि कभी कभी जीवन से हाथ भी धोना पड़ जाता है और ये सब कार्य स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के देख रेख में होता है। जनपद में अधिकांश डाक्टरो द्वारा प्राइवेट प्रेक्टिस डंके की चोट पर किया जा रहा है कई बार शिकायत के बावजूद जांच के नाम पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मोटी रकम लेकर मामले को रफा दफा कर देते है और ऐसे भ्रष्ट डाक्टरो को निर्दोष साबित कर देते है। जिला संयुक्त चिकित्सालय लोढ़ी में मरीजो को दवा का अभाव बताते हुए अपने प्राइवेट चिकित्सालय का पता बताते है और मरीजो को जाने पर जांच के नाम पर कमीशन खोरी शुरू हो जाती है साथ ही दवा के नाम पर शोषण का दौर शुरू हो जाता है। इन डाक्टरो के इस अमानवीय ब्यवहार के चलते गरीब मरीज कर्ज में डूब जाता है और तिल तिल मारने को मजबूर हो जाता है। ऐसे वो तमाम डाक्टर पूरे जनपद में मानवीय मूल्यों को दरकिनार करते हुए अपने कर्तब्य से बंचित होकर डॉक्टरी पेशे को शर्मसार कर रहे है।  डाक्टरो द्वारा प्राइवेट प्रेक्टिस करना कानूनन जुर्म है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी खामोश है।