देवरिया : कालाजार से दो .दो हाथ को स्वास्थ्य महकमा तैयार ..बिहार के सीमावर्ती गांवों में फैल रहा कालाजार ..पांच वर्षों में मिले 96 मरीज
देवरिया : कालाजार से दो .दो हाथ को स्वास्थ्य महकमा तैयार
..बिहार के सीमावर्ती गांवों में फैल रहा कालाजार
..पांच वर्षों में मिले 96 मरीज
कुलदीपक पाठक
देवरिया 6 अप्रैल 2019 ।। स्वास्थ्य महकमा इन दिनों जिले में कालाजार प्रभावित गांवो को लेकर सतर्क है। प्रति वर्ष बढ़ रहे मरीजों की संख्या पर नियंत्रण के लिए विभाग ने कर कास ली है। विभाग इससे लगातार संघर्ष कर रहा है। चिह्नित गांवों में छिड़काव व निरोधात्मक कार्य लगातार जारी है। विभाग द्वारा प्रत्येक दो माह पर सर्वे कार्य लगातार जारी है।
सीएमओ डॉ धीरेन्द्र कुमार ने बताया कि जिले में कालाजार के मरीजों की बढ़ती संख्या को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क है और जिले प्रभावित चिह्नित गांवों में निरोधात्मक कार्य कराए जा रहे हैंए जिसमें छिड़काव के साथ ही बीमारी के बारे में जानकारी दी जा रही है। इसे जड़ से समाप्त करने का हमारा प्रयास है हमारी टीम बेहतर कार्य कर रही है। सीएमओ ने बताया कि जिले के तीन ब्लाक भाटपाररानीए बनकटा व भटनी विकास खंड के गांवों से सर्वाधिक मरीज निकल रहें हैं। भाटपाररानी ब्लाक का टडवा गांवए भटनी ब्लाक का बनकटा शिवए पिपरा बिट्ठल व बनकटा विकास खंड का सर्वाधिक मरीज मिले हैंए जिसमें सुन्दरपारए रामपुर बाजारएखुरवसिया उत्तरए खुरवसिया दक्षिण पट्टीए बैंकुंठपुरए पकड़ी नरहियांए जानकी कुटियाभरए नियरवाए सिकटियां बाजारए राजापुरएगजहड़वाए पकड़ी बाजारए कड़सरवा बुजुर्ग गांव शामिल है। वहीँ पथरदेवाए भलुअनीए रामनाथ देवरिया व गरूलपर में भी कालाजार के मरीज मिले हैं। इन गांवों पर स्वास्थ्य विभाग की पैनी नजर है और इन गांवों में छिड़काव व निरोधात्मक कार्य कराया जा रहा है। इसके अलावा सर्वे के दौरान देसही देवरिया पथरदेवा व महेन में भी एक एक मरीज मिले। पिछले पांच वर्ष के आकड़ों पर गौर करें तो 2014 में 2, 2015 में 4, 2016 में 11, 2017 में 29, 2018 में 41 वही मार्च 2019 तक 9 मरीज कालाजार के मिले हैं। सीएमओ डॉ धीरेन्द्र कुमार ने बताया कि कालाजार बालू मक्खी से फैलने वाली बीमारी है। ये मक्खी नमी वाले स्थानों पर अंधेरे में पाई जाती है। यह तीन से चार फीट ही उड़ पाती है। इसके काटने के बाद मरीज बीमार हो जाता है। उसे बुखार होता है और रुक.रुक कर बुखार चढ़ता.उतरता है। पंद्रह दिन से अधिक समय तक अगर एंटी बायोटिक व एंटी मलेरियल दवा खाने के बाद बुखार नहीं ठीक हो रहा है तो मरीज को चिकित्सक को दिखाना चाहिए। इस बीमारी में मरीज का पेट फूल जाता है। भूख कम लगती है। शरीर काला पड़ जाता है। इस बीमारी से बचाओ के बारे में बताए हुए सीएमओ ने बताया कि बालू मक्खी से बचाव के लिए घर में छिड़काव करवाना चाहिएए जिससे मक्खियां मर जाए। घर की दीवारों में नमी कत्तई न रहने दें। मिट्टी के घरों की पोताई करते रहें और सुराखों को बंद कर दें। पक्की मकान में अगर प्लास्टर न हो तो उसे प्लास्टर करा दें। इन सुराखों व नमी वाले स्थान ही बालू मक्खी का निवास है। बचाव के लिए जमीन पर न सोए चारपाई व तख्ते पर सोए। जिला मलेरिया अधिकारी शिव प्रसाद तिवारी कहते हैं कि अगर किसी मरीज को पन्द्रह दिन से अधिक बुखार हो तो प्रत्येक पीएचसीए सीएचसी व जिला चिकित्सालय में जांच उपलब्ध है। कालाजार के इलाज के लिए एम्बीसोम इंजेक्शन निशुल्क लगाया जाता है।
..बिहार के सीमावर्ती गांवों में फैल रहा कालाजार
..पांच वर्षों में मिले 96 मरीज
कुलदीपक पाठक
देवरिया 6 अप्रैल 2019 ।। स्वास्थ्य महकमा इन दिनों जिले में कालाजार प्रभावित गांवो को लेकर सतर्क है। प्रति वर्ष बढ़ रहे मरीजों की संख्या पर नियंत्रण के लिए विभाग ने कर कास ली है। विभाग इससे लगातार संघर्ष कर रहा है। चिह्नित गांवों में छिड़काव व निरोधात्मक कार्य लगातार जारी है। विभाग द्वारा प्रत्येक दो माह पर सर्वे कार्य लगातार जारी है।
सीएमओ डॉ धीरेन्द्र कुमार ने बताया कि जिले में कालाजार के मरीजों की बढ़ती संख्या को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क है और जिले प्रभावित चिह्नित गांवों में निरोधात्मक कार्य कराए जा रहे हैंए जिसमें छिड़काव के साथ ही बीमारी के बारे में जानकारी दी जा रही है। इसे जड़ से समाप्त करने का हमारा प्रयास है हमारी टीम बेहतर कार्य कर रही है। सीएमओ ने बताया कि जिले के तीन ब्लाक भाटपाररानीए बनकटा व भटनी विकास खंड के गांवों से सर्वाधिक मरीज निकल रहें हैं। भाटपाररानी ब्लाक का टडवा गांवए भटनी ब्लाक का बनकटा शिवए पिपरा बिट्ठल व बनकटा विकास खंड का सर्वाधिक मरीज मिले हैंए जिसमें सुन्दरपारए रामपुर बाजारएखुरवसिया उत्तरए खुरवसिया दक्षिण पट्टीए बैंकुंठपुरए पकड़ी नरहियांए जानकी कुटियाभरए नियरवाए सिकटियां बाजारए राजापुरएगजहड़वाए पकड़ी बाजारए कड़सरवा बुजुर्ग गांव शामिल है। वहीँ पथरदेवाए भलुअनीए रामनाथ देवरिया व गरूलपर में भी कालाजार के मरीज मिले हैं। इन गांवों पर स्वास्थ्य विभाग की पैनी नजर है और इन गांवों में छिड़काव व निरोधात्मक कार्य कराया जा रहा है। इसके अलावा सर्वे के दौरान देसही देवरिया पथरदेवा व महेन में भी एक एक मरीज मिले। पिछले पांच वर्ष के आकड़ों पर गौर करें तो 2014 में 2, 2015 में 4, 2016 में 11, 2017 में 29, 2018 में 41 वही मार्च 2019 तक 9 मरीज कालाजार के मिले हैं। सीएमओ डॉ धीरेन्द्र कुमार ने बताया कि कालाजार बालू मक्खी से फैलने वाली बीमारी है। ये मक्खी नमी वाले स्थानों पर अंधेरे में पाई जाती है। यह तीन से चार फीट ही उड़ पाती है। इसके काटने के बाद मरीज बीमार हो जाता है। उसे बुखार होता है और रुक.रुक कर बुखार चढ़ता.उतरता है। पंद्रह दिन से अधिक समय तक अगर एंटी बायोटिक व एंटी मलेरियल दवा खाने के बाद बुखार नहीं ठीक हो रहा है तो मरीज को चिकित्सक को दिखाना चाहिए। इस बीमारी में मरीज का पेट फूल जाता है। भूख कम लगती है। शरीर काला पड़ जाता है। इस बीमारी से बचाओ के बारे में बताए हुए सीएमओ ने बताया कि बालू मक्खी से बचाव के लिए घर में छिड़काव करवाना चाहिएए जिससे मक्खियां मर जाए। घर की दीवारों में नमी कत्तई न रहने दें। मिट्टी के घरों की पोताई करते रहें और सुराखों को बंद कर दें। पक्की मकान में अगर प्लास्टर न हो तो उसे प्लास्टर करा दें। इन सुराखों व नमी वाले स्थान ही बालू मक्खी का निवास है। बचाव के लिए जमीन पर न सोए चारपाई व तख्ते पर सोए। जिला मलेरिया अधिकारी शिव प्रसाद तिवारी कहते हैं कि अगर किसी मरीज को पन्द्रह दिन से अधिक बुखार हो तो प्रत्येक पीएचसीए सीएचसी व जिला चिकित्सालय में जांच उपलब्ध है। कालाजार के इलाज के लिए एम्बीसोम इंजेक्शन निशुल्क लगाया जाता है।


