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11 महीने बाद जेल से बाहर आते ही आजम खान को ED ने लिया हिरासत में, बेटे अब्दुल्ला हुए रिहा; बोले- मुसलमान होने की सजा मिली

 



रामपुर, 31 अक्टूबर।। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को करीब 11 महीने बाद रामपुर जिला जेल से रिहाई मिली, लेकिन जेल के मुख्य द्वार से बाहर निकलते ही उनकी मुश्किलें फिर बढ़ गईं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया। शनिवार शाम हुए इस घटनाक्रम के दौरान आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम भी जेल से बाहर आए, लेकिन उन्हें रिहा कर दिया गया और वे अपने घर के लिए रवाना हो गए। आजम खान को ED की टीम अपनी गाड़ी में बैठाकर साथ ले गई। इस कार्रवाई के बाद आजम खान ने कहा कि उन्हें मुसलमान होने की सजा मिल रही है। वहीं, अब्दुल्ला आजम ने भी परिवार के साथ बीते आठ वर्षों में हुए घटनाक्रम को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की।


जानकारी के मुताबिक, आजम खान और अब्दुल्ला आजम पिछले करीब 11 महीने से रामपुर जेल में बंद थे। दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद दोनों की रिहाई का रास्ता साफ हुआ था। शनिवार को जेल में रिहाई की औपचारिकताएं पूरी की जा रही थीं। इसी बीच आजम खान के जेल से बाहर आने से करीब 15 मिनट पहले ED की टीम जेल परिसर पहुंच गई। जेल के बाहर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई थी। किसी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सीआरपीएफ के 24 जवान तैनात किए गए थे।


जेल से बाहर निकलते ही ED अधिकारियों ने आजम खान से पूछताछ शुरू कर दी। इस दौरान अधिकारियों और आजम खान के बीच काफी देर तक बहस होने की खबर है। पूछताछ के बाद ED ने उन्हें हिरासत में ले लिया और अपनी गाड़ी में बैठाकर अपने साथ ले गई। दूसरी ओर, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को रिहा कर दिया गया। वे जेल परिसर से निकलकर घर के लिए रवाना हो गए। रिहाई के तुरंत बाद हुई इस कार्रवाई ने रामपुर से लेकर प्रदेश की राजनीति तक हलचल पैदा कर दी।


ED की यह कार्रवाई जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में बताई जा रही है। जांच एजेंसी को आरोप है कि यूनिवर्सिटी के निर्माण और उससे जुड़ी गतिविधियों में धन के स्रोत तथा वित्तीय लेन-देन में अनियमितताएं हुईं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, एजेंसी इस मामले में यूनिवर्सिटी की संपत्तियों को भी कुर्क कर चुकी है। हालांकि, इन आरोपों और जांच से जुड़े तथ्यों पर अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।


हिरासत में लिए जाने के दौरान आजम खान ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “कहने को क्या है, कहने को अब रहा क्या। मुझे मुसलमान होने की सजा मिली है।” उन्होंने आगे कहा कि उनका गुनाह यह है कि उन्होंने मुसलमान होकर यूनिवर्सिटी बनाई। आजम खान के इस बयान के बाद उनके समर्थकों और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई।



जेल से बाहर आने के बाद अब्दुल्ला आजम ने भी मीडिया से बातचीत में परिवार के साथ हुए व्यवहार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पिछले आठ वर्षों में उनके परिवार के साथ जो कुछ हुआ, वैसा शायद किसी और के साथ नहीं हुआ होगा। उन्होंने आजम खान को टीवी और फ्रिज चोरी के मामलों में मिली सजा का जिक्र करते हुए कहा कि जिन जगहों पर मकान ही नहीं थे, वहां से चोरी के आरोप लगाए गए। अब्दुल्ला ने भावुक होते हुए कहा कि अगर उनका नाम अब्दुल्ला नहीं होता तो शायद वे सच साबित कर पाते। उन्होंने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा कि उनके पास कोई अधिकार नहीं हैं और इतनी बेइज्जती तथा जिल्लत के बाद भी वे जिंदा हैं।



आजम खान की दोबारा हिरासत पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि आज के हुक्मरानों को याद रखना चाहिए कि वक्त बदलने पर तख्त भी बदल जाता है। अखिलेश यादव ने आजम खान के खिलाफ मुकदमों को साजिश बताते हुए आरोप लगाया कि एक उम्रदराज नेता को बार-बार मुकदमों में फंसाकर जेल भेजना निंदनीय और कायराना कार्रवाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि सत्ता की ओर से गलत परंपरा को बढ़ावा देने वालों को वक्त बदलने पर खुद भी उसका सामना करना पड़ सकता है।


इस पूरे घटनाक्रम के दौरान रामपुर जेल के बाहर सुरक्षा के इंतजाम रहे। करीब 11 महीने बाद रिहाई की उम्मीद लेकर जेल से निकले आजम खान को बाहर आते ही ED की कार्रवाई का सामना करना पड़ा, जबकि उनके बेटे अब्दुल्ला आजम घर लौट गए। अब इस मामले में ED की आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच की दिशा पर नजर रहेगी।

इस कार्यवाही पर पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने ट्वीट करके कहा है कि