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टाउन पी.जी. कॉलेज, बलिया, के कृषि विद्यार्थियों का कृषि विज्ञान केन्द्र, माँझी, सारण में शैक्षणिक भ्रमण

 








डॉ सुनील कुमार ओझा

बलिया।।श्री मुरली मनोहर टाउन पी.जी. कॉलेज, बलिया, उत्तर प्रदेश के बी.एससी. कृषि चतुर्थ सेमेस्टर के विद्यार्थियों का शैक्षणिक भ्रमण कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), मांझी, सारण में आयोजित किया गया। भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान केंद्र की विभिन्न गतिविधियों, आधुनिक कृषि तकनीकों, कृषि यंत्रीकरण तथा RPCAU की शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार गतिविधियों के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर डॉ. आर. के. तिवारी, वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान, कृषि विज्ञान केन्द्र सारण, प्रो. बृजेश सिंह, प्रो. विजयानंद पाठक, डॉ. जितेन्द्र चंद्र चंदोला, डॉ. सुषमा टम्टा, डॉ. संजीत कुमार सिंह, डॉ. जय प्रकाश सिंह, डॉ. कौशल कुमार पाण्डेय एवं डॉ. विजय कुमार उपस्थित रहे।

डॉ. आर.के. तिवारी, वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान, कृषि विज्ञान केन्द्र, सारण ने विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान केंद्र की विभिन्न गतिविधियों, किसानों के लिए आयोजित प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रमों तथा डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय (RPCAU), पूसा की शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रसार गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

डॉ. जितेन्द्र चंद्र चंदोला ने विद्यार्थियों को पोषण वाटिका, उद्यानिकी फसलों, फल एवं सब्जी उत्पादन तथा पोषण सुरक्षा** के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने में उद्यानिकी फसलों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला।

डॉ. सुषमा टम्टा ने विद्यार्थियों को कृषि यंत्रीकरण एवं आधुनिक कृषि मशीनरी के बारे में जानकारी देते हुए विभिन्न कृषि यंत्रों का व्यावहारिक परिचय कराया। उन्होंने विशेष रूप से जीरो टिलेज मशीन (Zero Till Seed Drill), लेजर लैंड लेवलर (Laser Land Leveller), मल्टी-क्रॉप प्लांटर (Multi-Crop Planter) तथा बूम स्प्रेयर (Boom Sprayer) के उपयोग एवं महत्व के बारे में बताया। विद्यार्थियों को समझाया गया कि इन आधुनिक कृषि यंत्रों के प्रयोग से समय, श्रम, बीज, पानी एवं कृषि लागत की बचत** के साथ-साथ खेती की कार्यक्षमता में वृद्धि की जा सकती है।

उन्होंने धान की खेती में गीला-सूखा विधि (Alternate Wetting and Drying–AWD) के उपयोग, जल संरक्षण एवं वैज्ञानिक सिंचाई प्रबंधन के बारे में भी विद्यार्थियों को जानकारी दी।

डॉ. विजय कुमार ने विद्यार्थियों को औषधीय एवं सुगंधित पौधों के महत्व एवं उपयोग के बारे में जानकारी दी। साथ ही उन्होंने मृदा नमूना लेने की वैज्ञानिक विधि एवं मृदा परीक्षण के महत्व को भी समझाया तथा संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में जानकारी दी।

शैक्षणिक भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान केन्द्र, माँझी परिसर में स्थापित विभिन्न प्रदर्शन इकाइयों एवं तकनीकी केंद्रों का भ्रमण कराया गया। विद्यार्थियों ने टेक्नोलॉजी पार्क, कृषि मशीनरी इकाई, सीड हब, प्राकृतिक खेती इकाई, अमरूद, नींबू एवं लीची की सघन बागवानी सहित विभिन्न प्रदर्शन इकाइयों का अवलोकन किया।

विद्यार्थियों को जीरो टिलेज तकनीक के माध्यम से बिना अथवा न्यूनतम जुताई में फसल स्थापना, लेजर लैंड लेवलर द्वारा खेत को समतल करने से सिंचाई जल के समान वितरण, मल्टी-क्रॉप प्लांटर द्वारा विभिन्न फसलों की समय एवं श्रम बचाने वाली बुवाई तथा बूम स्प्रेयर द्वारा कम समय में समान एवं प्रभावी तरीके से फसल संरक्षण दवाओं के छिड़काव के बारे में जानकारी दी गई।

इसके अतिरिक्त विद्यार्थियों को प्राकृतिक खेती के विभिन्न घटकों एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों से भी परिचित कराया गया। साथ ही पार्थेनियम/गाजर घास जागरूकता अभियान के अंतर्गत गाजर घास की पहचान, इसके दुष्प्रभाव तथा इसके नियंत्रण एवं प्रसार को रोकने के उपायों की जानकारी दी गई।

शैक्षणिक भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को कक्षा में प्राप्त सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक कृषि परिस्थितियों से जोड़ना तथा आधुनिक कृषि यंत्रीकरण, जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी एवं फसल उत्पादन की नवीन तकनीकों से परिचित कराना रहा।

विद्यार्थियों ने कृषि विज्ञान केन्द्र सारण की विभिन्न प्रदर्शन इकाइयों एवं आधुनिक कृषि मशीनरी में विशेष रुचि दिखाई तथा वैज्ञानिकों से कृषि संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण से उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त करने में काफी मदद मिली। कार्यक्रम में कुल 112 छात्र एवं छात्राओं ने भाग लिया।

कृषि विज्ञान केन्द्र माँझी से कार्यक्रम को सफल बनाने में अमितेश कुमार गौरव, राकेश कुमार, उमाशंकर कुमार एवं अवनीश कुमार पाण्डेय ने अपना सहयोग दिया।