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विभाजन की त्रासदी को याद कर बोले मंत्री, इतिहास जानना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी

 







विभाजन की त्रासदी से सीख लेकर सामाजिक एकता मजबूत करें : विजय राजभर

विभाजन में डेढ़ करोड़ लोग हुए विस्थापित, लाखों ने गंवाई जान : दयाशंकर सिंह

2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में हर नागरिक निभाए जिम्मेदारी : दयाशंकर सिंह

1942 में बलिया ने अंग्रेजी हुकूमत को दी थी चुनौती : दयाशंकर सिंह

बलिया। हर घर तिरंगा अभियान-2026 विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस, 80वा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शुक्रवार को गंगा बहुद्देशीय सभागार में मुख्य अतिथि प्रदेश मंत्री विजय कुमार राजभर एवं परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने मां सरस्वती जी के चित्र पर पुष्प अर्पित एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस एवं स्वतंत्रता दिवस पर बनाई गई लघु फिल्म भी दिखाया गया। 


मुख्य अतिथि प्रदेश मंत्री विजय राजभर ने विभाजन के दौरान हुई त्रासदी को याद करते हुए कहा कि देश के इतिहास के इस काले अध्याय को जानना और आने वाली पीढ़ी को इसके बारे में बताना जरूरी है। उन्होंने कहा कि 14 अगस्त 1947 को एक ओर देश आजादी का जश्न मनाने की तैयारी कर रहा था, वहीं दूसरी ओर विभाजन के कारण लाखों लोगों को विस्थापन, हिंसा और अमानवीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। साथ ही विभाजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की जान गई। महिलाओं और बेटियों के साथ अत्याचार हुए तथा हजारों परिवार अपने घर-बार छोड़ने को मजबूर हुए। उन्होंने कहा कि उस दौर की पीड़ा को शब्दों में बयान करना आज भी कठिन है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे विभाजन की वास्तविक घटनाओं को जानने के लिए इतिहास से जुड़े दस्तावेज, पुस्तकें और उपलब्ध वीडियो सामग्री देखें, ताकि उस समय की परिस्थितियों की जानकारी नई पीढ़ी तक पहुंच सके। उन्होंने कहा कि विभाजन का निर्णय उस समय के कई बड़े नेताओं के लिए भी चिंता और पीड़ा का विषय था। उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अम्बेडकर सहित तत्कालीन कई प्रमुख नेताओं ने देश के विभाजन को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की थीं। उन्होंने लोगों से इतिहास को तथ्यों के साथ समझने और उससे सीख लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के रूप में मनाने की पहल का उद्देश्य उन लोगों को याद करना है, जिन्होंने विभाजन के दौरान अपने प्राण गंवाए और अपने घर-परिवार तथा मातृभूमि से बिछड़ने की पीड़ा झेली। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन हमें इतिहास की गलतियों से सीख लेने और सामाजिक एकता को मजबूत करने की प्रेरणा देते हैं। साथ ही युवाओं और विद्यार्थियों से विशेष रूप से अपील की कि वे विभाजन के इतिहास के बारे में अध्ययन करें और अपने माता-पिता तथा अगली पीढ़ी के लोगों को भी इसकी जानकारी दें। उन्होंने कहा कि इतिहास को जानना इसलिए जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां ऐसी त्रासदी को दोबारा न होने देने के लिए सजग रहें। प्रदेश मंत्री ने बलिया की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की आजादी की लड़ाई से लेकर विभिन्न राष्ट्रीय अभियानों में बलिया हमेशा अग्रणी रहा है। उन्होंने कहा कि हर घर तिरंगा अभियान में भी बलिया को बढ़-चढ़कर भागीदारी करनी चाहिए।

उन्होंने जिलेवासियों से अपील की कि अभी पर्याप्त समय है और सभी लोग अपने-अपने घरों पर तिरंगा लगाकर राष्ट्र के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना को प्रदर्शित करें। उन्होंने युवाओं से इस अभियान को जन- जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।


परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि देश को आजादी 15 अगस्त 1947 को मिली, लेकिन उससे ठीक पहले देशवासियों को विभाजन की भयावह त्रासदी से गुजरना पड़ा। धर्म के आधार पर देश का विभाजन किया गया, जिसके कारण लाखों लोगों को अपना घर, परिवार, संस्कृति और अपनी जमीन छोड़कर अनजान स्थानों पर विस्थापित होना पड़ा। साथ ही अंग्रेजों की ‘फूट डालो और शासन करो’ की नीति के कारण देश को विभाजन का दंश झेलना पड़ा। एक ओर लोग आजादी का जश्न मनाने की तैयारी कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से बेघर होकर सुरक्षित स्थानों की तलाश में भटक रहे थे। उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान माताओं और बहनों को भीषण अत्याचार का सामना करना पड़ा और लाखों लोगों की जान चली गई। करीब डेढ़ करोड़ लोग विस्थापित हुए। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में लगाए गए चित्र उस दौर की भयावहता और लोगों की पीड़ा को सामने लाते हैं। उन्होंने कहा कि देश की आजादी आसानी से नहीं मिली। तिरंगे के सम्मान और देश की स्वतंत्रता के लिए करोड़ों लोगों ने संघर्ष किया और अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति दी। ऐसे में प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह तिरंगे के सम्मान को बनाए रखे और स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों का भारत बनाने में अपना योगदान दे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी के बाद के 75 से 100 वर्ष के कालखंड को अमृतकाल के रूप में देश के विकास के लिए समर्पित किया है। इस अवधि में सभी नागरिकों का दायित्व है कि देश को मजबूत बनाने के लिए अपने स्तर से योगदान दें। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और बलिदानियों के संदेश को हर घर तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि नई पीढ़ी उनके संघर्ष और बलिदान से परिचित हो सके। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, उस समय भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में दसवें स्थान पर था। आज भारत विश्व की प्रमुख आर्थिक शक्तियों में शामिल है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का लक्ष्य है कि वर्ष 2047 में जब देश अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी मनाए, तब भारत एक विकसित राष्ट्र के रूप में विश्व के सामने खड़ा हो और विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब देशवासी तिरंगे के मान- सम्मान और स्वाभिमान को सर्वोच्च स्थान देंगे तथा अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करेंगे। उन्होंने युवाओं और विद्यार्थियों से देश की एकता, अखंडता और विकास के लिए समर्पित होकर कार्य करने का आह्वान किया। साथ ही बलिया के ऐतिहासिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में जिले की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। 1942 के आंदोलन में बलिया ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष में अग्रणी भूमिका निभाई और चित्तू पांडेय के नेतृत्व में आजाद सरकार की स्थापना कर देश में अलग पहचान बनाई। उन्होंने कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत किए गए सांस्कृतिक एवं देशभक्ति कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रस्तुतिकरण बच्चों में राष्ट्रभक्ति और स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति सम्मान की भावना पैदा करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि बलिया के सभी विद्यालयों में स्वतंत्रता संग्राम, बलिदानियों और देश के इतिहास से जुड़ी ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाए, ताकि बच्चे अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकें।


स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों एवं छात्र-छात्राओं को किया सम्मानित



प्रदेश मंत्री विजय राजभर एवं परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के परिवारों के आश्रितों को सम्मानित किया। दोनों मंत्रियों ने 11 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों को मिठाई, शाल एवं मोमेंटो प्रदान कर उनके परिजनों के योगदान को नमन किया। कार्यक्रम में कृषि विभाग की ओर से 13 किसानों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इस दौरान किसानों के योगदान और कृषि क्षेत्र में उनकी भूमिका को भी रेखांकित किया गया। इसके अलावा शहीद मंगल पांडेय राजकीय महिला महाविद्यालय, बलिया तथा सतीश चंद्र कॉलेज, बलिया के बीए एवं बीएससी के 10 छात्र-छात्राओं को भी प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। साथ ही जन गण मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता गायन गाया गया। 


हर घर तिरंगा पर विद्यार्थियों की प्रस्तुति ने मोहा मन, परिवहन मंत्री ने किया सम्मानित













हर घर तिरंगा के कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने देशभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में गुलाब देवी बालिका इंटर कॉलेज बलिया, महर्षि वाल्मीकि विद्या मंदिर, आरके मिशन, सनबीम स्कूल, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज बलिया एवं प्राथमिक विद्यालय शेरवाकला के छात्र- छात्राओं ने प्रतिभाग किया। विद्यार्थियों ने ‘हर घर तिरंगा’ अभियान पर विशेष प्रस्तुति के साथ देशभक्ति गीत एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। बच्चों की प्रस्तुतियों में राष्ट्रप्रेम, देश की एकता और तिरंगे के प्रति सम्मान की भावना देखने को मिली। सभागार में मौजूद अतिथियों एवं दर्शकों ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना की।



प्राथमिक विद्यालय शेरवाकला के छात्र- छात्राओं की ‘हर घर तिरंगा’ विषय पर प्रस्तुति विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रही। प्रस्तुति से प्रभावित होकर परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने अपने स्तर से विद्यालय की पूरी छात्र-छात्राओं की टीम को 31 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। साथ ही विद्यार्थियों को तैयार करने वाले शिक्षक को 11 हजार रुपये प्रदान किए। परिवहन मंत्री ने कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले अन्य सभी विद्यालयों के छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियों की भी सराहना की और सभी प्रतिभागी स्कूलों को 31 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा की। इस दौरान अतिथियों ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक एवं देशभक्ति कार्यक्रम बच्चों में राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों से पूरे सभागार में देशभक्ति का माहौल बना रहा।


विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर निकाला गया मौन जुलूस








-विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर शुक्रवार को जिला प्रशासन की ओर से मौन जुलूस निकाला गया। प्रदेश मंत्री विजय कुमार राजभर एवं परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने गंगा बहुद्देशीय सभागार से मौन जुलूस को रवाना किया।

मौन जुलूस गंगा बहुद्देशीय सभागार से प्रारंभ होकर टीडी कॉलेज चौराहा होते हुए कुंवर सिंह चौराहा पहुंचा, जहां इसका समापन किया गया। साथ ही मंत्री ने कुंवर सिंह के चित्र पर माल्यार्पण किया। जुलूस में जिले के विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी, कर्मचारी, विद्यालयों के छात्र-छात्राएं सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान लोगों ने भारत विभाजन के दौरान विस्थापन, पीड़ा और अपने प्राण गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का उद्देश्य विभाजन की त्रासदी को याद करते हुए आने वाली पीढ़ियों को उसके दुष्परिणामों से अवगत कराना तथा आपसी एकता, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव का संदेश देना रहा। मौन जुलूस के दौरान लोगों ने शांति एवं एकता का संदेश दिया। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं की सहभागिता रही। इस कार्यक्रम में जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह, पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह, सीडीओ आलोक कुमार, सीआरओ गुलशन जी, एडीएम अनिल कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट आसाराम वर्मा, जिलाध्यक्ष संजय मिश्रा, राज्य सभा सासद नीरज शेखर, महिला आयोग सदस्य श्रीमति सुनीता श्रीवास्तव, डीडीओ आनंद प्रकाश एवं जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित रहे।