पुस्तक लोकार्पण एवं कवि सम्मेलन सम्पन्न
श्री देव दीप साहित्य संगम गोरखपुर (श्री दीप साहित्यिक सेवा संस्थान गोरखपुर द्वारा संचालित) द्वारा किया गया आयोजन
गोरखपुर।। श्री देव दीप साहित्य संगम गोरखपुर के तत्वावधान में श्री विश्वकर्मा मंदिर, मानसरोवर, गोरखनाथ, गोरखपुर में भव्य पुस्तक लोकार्पण एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर 4 महत्वपूर्ण कृतियों का लोकार्पण हुआ --
1. 'कंसबध' - रचनाकार: दिनेश गोरखपुरी
2. 'दीपशिखर काव्यलोक' - संकलनकर्ता: दिनेश गोरखपुरी
3. 'प्रेम शतक' - रचनाकार: गीता पाण्डेय 'अपराजिता'
4. 'मेरे गीतों का संसार' - रचनाकार: आशा शर्मा
प्रथम सत्र का मंच संचालक डॉ० अमिताभ पाण्डेय ने और अध्यक्षता प्रो० रामदरश राय ने किया। इस सत्र के मुख्य अतिथि प्रो० अनिल राय और विशिष्ट अतिथि प्रो० आद्या प्रसाद द्विवेदी, कवि सौदागर सिंह, कवि सुभाष यादव, डॉ० ओमप्रकाश द्विवेदी 'ओम', डॉ० राकेश श्रीवास्तव (अंतरराष्ट्रीय भोजपुरी गायक) थे।
कार्यक्रम की शुरुआत मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई। तत्पश्चात कवयित्री प्रतिभा गुप्ता 'प्रबोधिनी' द्वारा मां सरस्वती की वंदना प्रस्तुत की गई। इसके बाद मंचासीन अतिथियों का अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह एवं माल्यार्पण कर सम्मान किया गया। फिर वंदना सूर्यवंशी द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया।मुख्य कार्यक्रम के अंतर्गत चारों पुस्तकों का लोकार्पण सम्पन्न हुआ।
-प्रो० अनिल राय मुख्य अतिथि ने 'कंसबध' को 16 खण्डों का प्रामाणिक लघु काव्य ग्रंथ बताया। कहा कि यह नवीन शैली में रचित पठनीय पुस्तक है। 'दीपशिखर काव्यलोक' के संकलन हेतु संकलनकर्ता व प्रकाशक को बधाई दी। 'प्रेम शतक' पर कहा कि भगवत भजन प्रेम के बिना अधूरा है। 'मेरे गीतों का संसार' के लिए रचनाकार को शुभकामनाएं दीं।
कवि सौदागर सिंह ने 'कंसबध' व अन्य पुस्तकों पर विचार व्यक्त करते हुए एक भोजपुरी रचना सुनाई। डॉ० राकेश श्रीवास्तव ने श्रोताओं की मांग पर भोजपुरी गीत प्रस्तुत कर सभागार को गूंजायमान किया।कवि सुभाष यादव ने सभी पुस्तकों पर विचार व्यक्त किए।
डॉ० रामकृपाल राय ने कहा "आज पहली बार एक रचनाकार को प्रकाशक व साहित्यिक सृजन दोनों साथ-साथ करते हुए देखा। प्रो० रामदरश राय ने अध्यक्षीय उद्बोधन मे कहा कि सभी पुस्तकों पर सारगर्भित व्याख्या देते हुए प्रथम सत्र का समापन किया।
द्वितीय सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि सुभाष यादव ने और मंच संचालन वरिष्ठ कवयित्री वंदना सूर्यवंशी ने किया। इस सत्र के मुख्य अतिथि संयुक्त रूप से कवि सौदागर सिंह व डॉ० राकेश श्रीवास्तव रहे। इस सत्र के विशिष्ट अतिथि के रूप मे डॉ० गीता पाण्डेय 'अपराजिता' , अर्चना आनंद, अनुप्रिया, व नीरजा राय उपस्थित रही।
इस सत्र में काव्य पाठ मां सरस्वती वंदना से प्रारंभ हुआ। प्रतिभा गुप्ता 'प्रबोधिनी',जगदीश खेतान,आशा शर्मा,बद्री विश्वकर्मा 'सवरिया',राजेश मृदुल,अविनाश श्रीवास्तव 'डोपामिन',वंदना मिश्रा,निर्मल कुमार गुप्त 'निर्मल',नीरजा सिंह,अनुप्रिया राय,प्रीति मिश्रा,निशा पासवान,अर्चना आनंद,वंदना सूर्यवंशी,सुमन झा 'माहे',प्रेमलता 'रस बिन्दु',कमलेश मिश्रा,अनुरीता अवध,ईश्वर चन्द्र विद्यावाचस्पति,पं० दानिका प्रसाद 'इंजीनियर',विजय प्रताप शाही,सुनील श्रीवास्तव 'राज',शैलेश कुमार चौधरी,राकेश कुमार सक्सेना,प्रदीप सत्यदेव,डॉ० गीता पाण्डेय 'अपराजिता',अल्का रानी अग्रवाल,नन्दलाल मणि त्रिपाठी 'पीतांबर',दिनेश गोरखपुरी,डॉ० भारतेन्द्र सिंह आदि ने अपनी रचनाओं से शमा बांधी।
सभी रचनाकारों को सम्मान-पत्र व पुस्तक देकर सम्मानित किया गया। अंत में अध्यक्ष सुभाष यादव ने सभी रचनाओं की भरपूर प्रशंसा की। राष्ट्रीय संरक्षक नन्दलाल मणि त्रिपाठी 'पीतांबर' ने आभार व्यक्त कर सभा विसर्जित की।








