मुकेश साहनी के गोरखपुर दौरे पर सियासी घमासान, कार्यक्रम पर रोक के बाद काफिला भी रोका गया
गोरखपुर। विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और बिहार सरकार के पूर्व मंत्री मुकेश साहनी का रविवार का गोरखपुर दौरा राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बना रहा। जिला प्रशासन ने पहले गोरखपुर क्लब में प्रस्तावित उनके राजनीतिक कार्यक्रम को अनुमति देने से इनकार कर दिया और बाद में शहर में प्रवेश के दौरान असुरन चौराहे पर उनके काफिले को कुछ समय के लिए रोक दिया। पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच नोकझोंक भी हुई, हालांकि स्थिति को शांतिपूर्वक नियंत्रित कर लिया गया।
प्रशासन की ओर से गोरखपुर क्लब प्रबंधन को जारी पत्र में कहा गया था कि कार्यक्रम के लिए आयोजकों ने पूर्व अनुमति नहीं ली है। साथ ही जनपद में प्रस्तावित वीआईपी मूवमेंट और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए बिना अनुमति राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। प्रशासन ने क्लब प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य में भी किसी राजनीतिक कार्यक्रम की बुकिंग प्रशासनिक अनुमति के बिना न की जाए। साथ ही चेतावनी दी गई कि आदेशों का उल्लंघन होने पर संबंधित पक्षों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसी के मद्देनजर क्लब परिसर और आसपास सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।
दोपहर में गोरखपुर पहुंचने पर मुकेश साहनी का काफिला असुरन चौराहे पर पुलिस ने रोक लिया। बताया गया कि करीब आधे घंटे से अधिक समय तक उनके वाहन आगे नहीं बढ़ सके। इस दौरान मौके पर मौजूद वीआईपी कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया और प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए। पुलिस अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कार्यकर्ताओं को समझाया, जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई।
बाद में मीडिया से बातचीत में मुकेश साहनी ने कहा कि उन्होंने प्रशासन के निर्णय का सम्मान करते हुए प्रस्तावित कार्यक्रम नहीं किया, लेकिन किसी होटल में ठहरने या अपने समर्थकों से मिलने से रोकना समझ से परे है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया, मानो उन्होंने कोई अपराध किया हो। उनके अनुसार लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी राजनीतिक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष को इस तरह रोकना उचित नहीं है।
वीआईपी प्रमुख ने उत्तर प्रदेश सरकार पर भी राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि पिछड़े, अति पिछड़े और वंचित वर्गों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों के मुद्दों पर संघर्ष जारी रखेगी तथा लोकतांत्रिक मूल्यों से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी।
मुकेश साहनी ने इस दौरान निषाद समाज के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री एवं निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद का नाम लेते हुए कहा कि समाज के आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अब अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने दावा किया कि यदि समाज के हित सर्वोपरि हैं तो इस विषय पर सभी को एकजुट होकर संघर्ष करना चाहिए।
मुकेश साहनी के दौरे को लेकर हुए घटनाक्रम ने गोरखपुर की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। प्रशासन इसे सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ा निर्णय बता रहा है, जबकि वीआईपी इसे लोकतांत्रिक अधिकारों में हस्तक्षेप करार दे रही है। ऐसे में यह मामला अब राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।










