रेवती थाने मे थर्ड डिग्री पिटाई से युवक की मौत का आरोप, उप निरीक्षक सिपाही प्रधान समेत 6 पर एफआईआर, पर कोई नहीं हुआ है गिरफ्तार
रेवती बलिया ।। रेवती थाने में दलित युवक की 'थर्ड डिग्री' से हुई मौत के आरोप से हड़कंप मच गया है। मृतक की रिश्तेदार किशोरी ने जब डीआईजी आजमगढ़ से कहा कि साहब एफआईआर दर्ज होने के बाद शाम होने को आयी है लेकिन अब तक गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई है तो बड़े साहब बगले झाँकते हुए जबाब देना जरुरी नहीं समझे। आखिर क्यों सच के सवाल से बच रही बलिया पुलिस? गिरफ्तारी के सवाल का डीआईजी ने क्यों नहीं दिया जबाब , चर्चाओ का बाजार गर्म हो गया है।
बता दे कू रेवती थाने में कथित 'थर्ड डिग्री' टॉर्चर से दलित युवक की मौत के मामले में थाने के उप निरीक्षक, सिपाही, प्रधान समेत 6 आरोपियों पर मुकदमा दर्ज होने के बावजूद अब तक स्थानीय पुलिस ने कोई गिरफ्तारी नहीं की है।
इस गंभीर लापरवाही पर जब पीड़ित परिवार और मृतक की बेटी ने इंसाफ की गुहार लगाते हुए सीधे सवाल पूछे, तो डीआईजी (DIG) खुद को संभाल नहीं पाए।
सांत्वना देने और कार्रवाई का भरोसा देने के बजाय डीआईजी साहब जनता के सामने सरेआम पीड़ित बेटी के तीखे सवालों पर बुरी तरह झल्लाते नजर आए।
खाकी का यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया साफ दिखाता है कि बलिया पुलिस सच का सामना करने से बच रही है, आखिर इस बेवश परिवार को न्याय कब मिलेगा?
वाराणसी मे मौत, रास्ते मे परिजनों से शव छीनने का पुलिस ने किया प्रयास
गंभीर हालत मे युवक को पहले सीएचसी रेवती, फिर जिला अस्पताल ले जाने के बाद चिकित्सकों ने वाराणसी के लिये रेफर कर दिया था, जहां इलाज के दौरान युवक की मौत हो गयी थी। आरोप है कि जब परिजन रात को मृतक का शव लेकर आ रहे थे तो रास्ते मे रेवती पुलिस ने शव को अन्य थानो की मदद से छीनने का प्रयास किया था। जिसके बाद जिन परिजनों को युवक की मौत मे पुलिसिया पिटाई पर शक था, वह यकीन मे बदल गया। परिजन शव को लेकर रेवती मे चक्का जाम कर दिये और आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा पंजीकृत करने और गिरफ्तार करने की मांग करते हुए प्रदर्शन करने लगे।
जनता के आक्रोश के आगे अंततः झुकते हुए पुलिस ने अपने ही थाने के उप निरीक्षक व सिपाही, प्रधान समेत 6 लोगों पर हत्या का मुकदमा पंजीकृत करना पड़ा। इसके बावजूद जब प्रदर्शन नहीं रुका तो डीआईजी आजमगढ़ स्वयं प्रदर्शन स्थल व मृतक के घर पहुंचे जहां परिजनों के तीखे सवालों का जबाब नहीं दे पाये। अब देखना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी कब होती है।
थानाध्यक्ष लाइन हाजिर, उप निरीक्षक, सिपाही समेत 6 पर मुकदमा
रेवती थाना क्षेत्र के गायघाट निवासी कामजी गोड़ की कथित पुलिस पिटाई के बाद हुई मौत के मामले में पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। एसपी ने रेवती थाने पर तैनात उपनिरीक्षक सचिन सरोज और आरक्षी अंकित सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं, थानाध्यक्ष राजकेशर सिंह को लाइन हाजिर कर रेवती थाने की कमान उपनिरीक्षक अनिल कुमार सिंह को सौंप दी गई है।
यह कार्रवाई कामजी गोड़ के पुत्र विशाल गोड़ की तहरीर पर 12 जुलाई को दर्ज मुकदमे के बाद की गई। मुकदमा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में दर्ज किया गया है।छुट्टियां व मौसमी आयोजन
क्या है पूरा मामला?
आरोप है कि 7 जुलाई को विशाल गोड़ का खेतन चौराहे पर मुर्गा खरीदने के दौरान दुकानदार सूरज कनौजिया से विवाद हो गया था। अगले दिन 8 जुलाई को पुलिस विशाल को पकड़ने उसके घर पहुंची, लेकिन घर में मौजूद उसके पिता कामजी गोड़ को थाने ले गई। परिजनों का आरोप है कि थाने में उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई। बाद में उन्हें ग्राम प्रधान और अन्य लोगों के साथ ले जाकर फिर पीटा गया।
गंभीर रूप से घायल कामजी गोड़ को पहले सीएचसी रेवती, फिर जिला अस्पताल बलिया और बाद में बीएचयू ट्रॉमा सेंटर वाराणसी रेफर किया गया, जहां 10 जुलाई की रात उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
इन लोगों पर दर्ज हुआ मुकदमा
मृतक के पुत्र विशाल गोड़ की तहरीर पर दुकानदार सूरज कनौजिया, ग्राम प्रधान आशुतोष शंकर सिंह उर्फ लालू, उनके ड्राइवर मनीष यादव, उपनिरीक्षक सचिन सरोज, आरक्षी अंकित सिंह तथा एक अज्ञात रिश्तेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
एसपी ने दिए जांच के आदेश
पुलिस अधीक्षक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों पर कर्तव्य में घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता और स्वेच्छाचारिता का आरोप मानते हुए निलंबन की कार्रवाई की है। साथ ही पूरे प्रकरण की विवेचना क्षेत्राधिकारी लाइन को सौंप दी गई है।








