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फाइलेरिया से बचाव के लिए चलेगा ट्रिपल ड्रग थेरेपी ‘आईडीए’ अभियान

 





●जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई दूसरी जिला टास्क फोर्स की बैठक

● स्वास्थ्य टीम घर-घर जाकर अपने समक्ष खिलाएंगे फाइलेरिया से बचाव की दवा

बलिया,03 फरवरी 2026।।राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जनपद में 10 फरवरी से 28 फ़रवरी तक फाइलेरिया से बचाव के लिए ट्रिपल ड्रग थेरेपी ‘आईडीए’ (आइवर्मेक्टिन, डीईसी, अल्बेंडाजॉल) अभियान चलेगा। इसको लेकर मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स की दूसरी बैठक आयोजित हुई। 

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण अभियान है। सभी संबंधित विभाग निर्धारित समय में अपनी कार्य योजना प्रस्तुत करें।उन्होंने निर्देशित किया कि आपसी समन्वय स्थापित कर इस अभियान को सफल बनाने में संबंधित विभाग अपना सहयोग प्रदान करें, जिससे फाइलेरिया बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सके।  उन्होने निर्देशित किया की स्कूलों और कॉलेजों में प्रार्थना सभाओ में बच्चों को जागरूक कर इस अभियान को सफल बनाए। साथ ही ग्राम प्रधान और कोटेदार अपने स्तर से जागरूकता गतिविधियां सम्पादित करें।और अभियान के दिन खुद समुदाय के सामने दवा खा कर इस अभियान का उद्घाटन करें।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय यादव ने बताया कि फाइलेरिया एक लाइलाज बीमारी है | इस बीमारी के लक्षण 5 से 15 वर्षों के बाद देखने को मिलते हैं। शुरूआत में इसके कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। फाइलेरिया एक संक्रमित व्यक्ति से दूसरे स्वस्थ व्यक्ति में मच्छर के काटने से फैलता है। इस बीमारी से हाथ, पैर, स्तन और अंडकोष में सूजन पैदा हो जाती है। सूजन के कारण फाइलेरिया प्रभावित अंग भारी हो जाता है और दिव्यांगता जैसी स्थिति बन जाती है। प्रभावित व्यक्ति का जीवन अत्यंत कष्टदायक एवं कठिन हो जाता है। इस बीमारी से बचाव के लिए वर्ष में एक बार दवा खाना जरूरी है।

वेक्टर जनित बीमारियों के नोडल अधिकारी डॉ. अभिषेक मिश्रा ने कहा कि जनपद में 10 फरवरी से 28 फ़रवरी तक फाइलेरिया उन्मूलन के लिए ट्रिपल ड्रग थेरेपी आईडीए अभियान चलाया जायेगा। इस अभियान के अन्तर्गत एक वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से ग्रसित व्यक्तियों को छोड़कर सभी को फाइलेरिया से सुरक्षित रखने के लिए उम्र एवं लंबाई के सापेक्ष निर्धारित फाइलेरिया से बचाव की दवा घर-घर जाकर स्वास्थ्य कर्मी अपने सामने खिलाएँगे एवं किसी भी स्थिति में दवा का वितरित नहीं की जाएगी।

डॉ अभिषेक ने बताया कि फाइलेरिया मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है जिसे सामान्यता हाथीपाँव के नाम से भी जाना जाता है। पेशाब में सफेद रंग के द्रव्य का जाना जिसे काईलूरिया भी कहते हैं जो फाइलेरिया का ही एक लक्षण है। फाइलेरिया शरीर के लटकने वाले अंगों में होता है जैसे  पैरों व हाथों में सूजन, पुरुषों में हाइड्रोसील (अंडकोष में सूजन) और महिलाओं में ब्रेस्ट में सूजन की समस्या आती है। फाइलेरिया होने के बाद इसका कोई इलाज नहीं है। उन्होंने बताया कि इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज, महिला एवं बाल विकास विभाग, शिक्षा विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग, आपूर्ति विभाग सहित अन्य विभाग समन्वय बनाकर कार्य करेंगे। 

जिला मलेरिया अधिकारी राजीव त्रिपाठी ने बताया कि जनपद में अब तक कुल फाइलेरिया के 4264 मरीज है।उन्होंने बताया कि आईडीए अभियान में लक्षित आबादी को फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाई जाएगी। यह दवा पूरी तरह सुरक्षित व प्रभावी है। सामान्य लोगों को इन दवाओं के खाने से किसी भी प्रकार के दुष्प्रभाव नहीं होते हैं। अगर किसी को दवा खाने के बाद उल्टी, चक्कर, खुजली या जी मिचलाने जैसे लक्षण होते हैं तो यह इस बात का प्रतीक है कि उस व्यक्ति के शरीर में फाइलेरिया के कीटाणु मौजूद हैं, जोकि दवा खाने के बाद कीटाणुओं के मरने के कारण उत्पन्न होते हैं। उन्होंने बताया कि साल में एक बार और लगातार पाँच साल तक फाइलेरिया रोधी दवा खाने से इसके संक्रमण से बचा जा सकता है।

बैठक में  संबंधित जनपदस्तरीय अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी एवं मलेरिया व फाइलेरिया विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी,  प्रतिनिधि संस्था WHO, पाथ, पीसीआई और सीफार संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।