Breaking News

बोले पूर्व मंत्री रामगोविंद चौधरी : बजट आंकड़ों का मायाजाल या उम्मीदों का झुनझुना,कुलपति बोले -विकसित भारत @2047 के लिये संकल्पित है बजट

 




बलिया।।हर साल जब वित्त मंत्री लाल ब्रीफकेस (या अब डिजिटल टैबलेट) लेकर संसद की सीढ़ियां चढ़ती हैं, तो देश के करोड़ों लोगों की निगाहें इस उम्मीद में टिकी होती हैं कि शायद इस बार उनकी थाली में रोटी और जेब में कुछ बचत के अवसर बढ़ेंगे। लेकिन संसद के भीतर मेजों की गड़गड़ाहट और बाहर आम आदमी की खामोशी के बीच का अंतर इस बार भी कम होता नहीं दिख रहा।पूर्व मंत्री व यूपी विधानसभा मे पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने इस बजट को आंकड़ों का मायाजाल और उम्मीदों का झुनझुना बताया है।

मेजों की गड़गड़ाहट और कागजों का पुलिंदा

संसद के भीतर जब वित्त मंत्री बजट भाषण की एक-एक पंक्ति पढ़ती हैं, तो सत्ता पक्ष के सांसद उसे ऐतिहासिक बताते हुए मेजें थपथपाते हैं। लेकिन विडंबना यह है कि जब वह भाषण समाप्त होता है और संसद की चौखट से बाहर आता है, तो जनता के हाथ में केवल 'बजट की प्रतियां' ही होती हैं—अधिकारों और राहत का वह वास्तविक हिस्सा गायब रहता है जिसकी उसे दरकार थी।

किसान, मजदूर और नौजवान: हाशिये पर खड़े लोग

इस बजट को यदि बारीकी से देखा जाए, तो समाज के उन स्तंभों के लिए निराशा अधिक दिखती है जो देश की अर्थव्यवस्था की नींव रखते हैं

 1. नौजवान: 'रोजगार' शब्द बजट भाषणों में एक रस्म की तरह इस्तेमाल होता है, लेकिन ठोस रोडमैप की कमी युवाओं के लिए इसे महज एक 'झुनझुना' साबित करती है। डिग्रियों के बोझ तले दबे युवाओं को आंकड़ों के खेल से ज्यादा नौकरियों के अवसरों की तलाश है।

 2. किसान: एमएसपी (MSP) की कानूनी गारंटी और लागत के दोगुने दाम की मांग आज भी फाइलों के नीचे दबी है। खेती की बढ़ती लागत और अनिश्चित मौसम के बीच किसान को मिली मामूली राहत 'ऊंट के मुंह में जीरा' जैसी है।

 3. मजदूर और आम जन: कमरतोड़ महंगाई के दौर में मध्यम वर्ग और मजदूर वर्ग को उम्मीद थी कि टैक्स स्लैब या सब्सिडी के जरिए कुछ सीधी राहत मिलेगी, लेकिन बजट का ढांचा उन्हें फिर से बाजार के रहमों-करम पर छोड़ देता है।


बजट केवल आय और व्यय का लेखा-जोखा नहीं होना चाहिए, बल्कि यह देश के अंतिम व्यक्ति की मुस्कान का दस्तावेज होना चाहिए। जब तक बजट के आंकड़े आम आदमी की रसोई और नौजवान के रोजगार कार्ड तक नहीं पहुंचते, तब तक इसे 'ऐतिहासिक' कहना केवल एक राजनीतिक मुहावरा ही रहेगा। जनता को भाषण नहीं, राशन और शासन में अपनी हिस्सेदारी चाहिए।


     

प्रोफेसर संजीत कुमार गुप्ता कुलपति जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय ने  कहा -बजट 2026:विकसित भारत @2047 हेतु संकल्पित

 

केंद्रीय बजट में तीन कर्तव्य पथों की चर्चा की गई है - *विकास, समावेशन और सुधार* ताकि समावेशी विकास का लक्ष्य पूरा हो सके तथा लोगों को संसाधनों तक पहुंच बन सके l विकसित भारत की संकल्पना के साथ भारत सरकार इस बजट के माध्यम से सुनिश्चित करना चाहती है कि विकास का लाभ किसान,अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित -जनजाति, महिलाओं तथा युवाओं तक पहुंचे l  बजट में वित्तीय वर्ष 2026 -27 के लिए राजकोषीय नीतियों को विकसित भारत @2047 के लक्ष्य के अनुकूल संतुलित किया गया है l इस बजट में रिकॉर्ड पूंजीगत व्यय लगभग  12.2 लाख करोड़ तक बढ़ाने का प्रस्ताव है जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और आर्थिक वृद्धि को मजबूत कर निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाने का संपूर्ण प्रयास हो सके l मानसिक स्वास्थ्य को मजबूती प्रदान करने के लिए NIMHANS- 2 का बजट प्रस्ताव हैl बजट में चार राज्यों (उड़ीसा, केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश ) के लिए विशेष दुर्लभ पृथ्वी गलियारे स्थापित करने का प्रस्ताव है l बजट 2026 -27 में प्रस्ताव है कि पूर्वोत्तर राज्यों में बौद्ध सर्किट का विकास एवं मेडिकल टूरिज्म हेतु पांच क्षेत्रीय केंद्र स्थापित किया जाएगा l बजट में पांच नई यूनिवर्सिटी टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव है, जो पी पी पी मॉडल के आधार पर विकसित किए जाएंगेl यह टाउनशिप राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उच्च शिक्षा के केंद्र रहेंगे l महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए हर जिले में एक महिला छात्रावास विकसित करने का प्रस्ताव है, बजट में सूक्ष्म,लघु और मध्यम उद्योग के क्षेत्र में 10,000 करोड रुपए अतिरिक्त सहायता का प्रस्ताव है, ताकि उन्हें वृद्धि और रोजगार देने में मदद मिल सके l बजट में स्वास्थ्य और फार्मा सेक्टर को विशेष प्राथमिकता देने का प्रस्ताव है l बजट में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की घोषणा की गई है इसकी इसके लिए 40,000 करोड रुपए खर्च करने का प्रस्ताव है, इससे उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।


कर्मचारियों के आशानुकूल नही है बजट : वेद प्रकाश पांडेय कर्मचारी नेता

 राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष वेदप्रकाश पाण्डेय ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि आम बजट  2026 कर्मचारियों के लिए आशा के अनुकूल नहीं है। इस बजट में न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्ट्रर पर चुप्पी है। इसमें संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण पर कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया है। हर बार की तरह इस बार भी बजट में कर्मचारियों पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया है। जबकि कर्मचारी राष्ट्र निर्माण की नींव हैं।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलामंत्री विनोद मिश्रा ने बजट को कर्मचारी हितों के विपरीत बताया। उन्होंने कहा कि इनकम टैक्स स्लैब और स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाए जाने की अपेक्षा थी।