जे एन सी यू में बजट पूर्व परिचर्चा का आयोजन
बलिया।। जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय में कुलपति प्रो संजीत कुमार गुप्ता के संरक्षण में विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र एवं वाणिज्य विभाग और पूर्वांचल आर्थिक संघ के संयुक्त तत्वाधान में बजट पूर्व परिचर्चा की गई। यह परिचर्चा "बजट एंड इट्स इम्प्लिकेशन्स" विषयक ऑनलाइन परिचर्चा का आयोजन हुआ।
मुख्य वक्ता नीडोनॉमिक्स स्कूल ऑफ थॉट के प्रणेता, कुरुक्षेत्र-आधारित थिंक टैंक से जुड़े, तीन बार कुलपति रह चुके तथा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त अर्थशास्त्र के प्रोफेसर मदन मोहन गोयल एवं पूर्वांचल आर्थिक संघ के डॉ विश्वनाथ जी रहे।
मुख्य वक्ता गोयल ने केंद्रीय बजट 2026–27 के संदर्भ में भविष्य की प्रत्याशित प्रवृत्तियाँ और अपेक्षाएँ विश्लेषण के माध्यम से भारत की राजकोषीय सोच में मूलभूत परिवर्तन की आवश्यकता पर बल दिया। प्रो. गोयल ने कहा कि विकसित भारत @2047 की दिशा में विश्वसनीय प्रगति तभी संभव है जब बजट निर्माण प्रक्रिया पूर्वानुमानात्मक, सहभागी और वास्तविक आवश्यकताओं पर आधारित हो। उन्होंने प्रभावी एवं समावेशी नीतिगत परिणामों के लिए पूर्व-बजट हितधारक सहभागिता को अनिवार्य बताया। भारत के लगभग 4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर होने के बावजूद, प्रो. गोयल ने कहा कि आर्थिक वृद्धि गंभीर रूप से असमान बनी हुई है। शीर्ष 10 प्रतिशत आबादी खपत के असंगत हिस्से पर काबिज है, जबकि गरीबी, युवा बेरोज़गारी और श्रम का अनौपचारिकीकरण लगातार जारी है। उन्होंने तर्क दिया कि यह असंतुलन “नीडोनॉमिक्स” पर “ग्रीडोनॉमिक्स” के बढ़ते वर्चस्व को दर्शाता है, जो समावेशी, मानवीय और सतत विकास को कमजोर करता है।वैश्विक व्यापार में उभरती अनिश्चितताओं का उल्लेख करते हुए, प्रो. गोयल ने केंद्रीय बजट 2026–27 में “ट्रम्प टेररिज़्म–प्रूफ” निर्यात प्रोत्साहन उपायों की आवश्यकता जताई। उन्होंने भारत के व्यापार हितों और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता की रक्षा के लिए रणनीतिक सौदेबाज़ी, आर्थिक कूटनीति और लचीलापन निर्माण पर विशेष बल दिया। पूर्वांचल आर्थिक संघ के डॉ विश्वनाथ जी ने आगामी बजट के संभावित प्रमुख फोकस क्षेत्रों को रेखांकित किया, जिनमें शामिल हैंसमावेशी विकास.पीएम गति शक्ति के तहत बुनियादी ढाँचे का विस्तार,हरित विकासकौशल-आधारित रोजगार सृजन,महिला सशक्तिकरण,एमएसएमई-आधारित औद्योगिकीकरण,ट्रम्प टेररिज़्म–प्रूफ निर्यात प्रोत्साहन,किसान कल्याण, निजी निवेश का पुनरुद्धार,असंगठित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा ई डॉ विश्वनाथ ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026–27 को रोजगार, समानता, गरिमा और स्थिरता पर केंद्रित करते हुए—विशेषकर मध्यम वर्ग की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप—राजकोषीय प्राथमिकताओं का पुनर्संतुलन करना होगा, तभी भारत विकसित भारत @2047 के संकल्प को वास्तविक अर्थों में साकार कर सकेगा।
कार्यक्रम के समन्वयक वाणिज्य विभाग के डॉ विजय शंकर पाण्डेय ने परिचर्चा के विषय को प्रमुखता से रखा, कार्यक्रम की संयोजिका अर्थशास्त्र विभाग की डॉ प्रज्ञा बौद्ध ने कुशल संचालन किया। अर्थशास्त्र विभाग के डॉ गुंजन कुमार ने वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर वाणिज्य विभाग के विनीत सिंह, डॉ नीलमणि त्रिपाठी, विवेक कुमार, अर्थशास्त्र विभाग के डॉ शशि भूषण, डॉ राम सरन यादव, छात्र कल्याण विभाग के अधिष्ठाता डॉ अजय कुमार चौबे, हिंदी विभाग के डॉ अभिषेक मिश्रा के साथ सभी विभागों के आचार्य गण, पूर्वांचल आर्थिक संघ के सदस्य तथा अर्थशास्त्र एवं वाणिज्य विभाग के छात्र- छात्राओं की गरिमामय उपस्थिति रही।



