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इंटरनेट से आगे बढ़कर किताबों की दुनिया में कदम रखें, तभी होगा सच्चा विकास - प्रो गीता

 







दुबेछपरा बलिया।। अमरनाथ मिश्र पी.जी. कॉलेज, दुबेछपरा (बलिया) में स्वामी विवेकानंद के विचारों पर आधारित एक प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम राष्ट्रीय सेवा योजना अधिकारी शैलेन्द्र जी की देखरेख में संपन्न हुआ, जिसमें एनएसएस के साथ एनसीसी कोर के कैडेट्स ने भी सक्रिय सहभागिता की। इस अवसर पर एम.ए. भूगोल के विद्यार्थी भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने भी स्वामी विवेकानंद के जीवन और विचारों पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए। बच्चों के वक्तव्यों में आत्मविश्वास, चरित्र निर्माण और राष्ट्रसेवा जैसे विषय प्रमुख रहे।

शिक्षकों के वक्तव्यों में इंटरनेट युग में शिक्षा की सही दिशा पर विशेष जोर दिया गया। डॉ. सत्येन्द्र मिश्र ने कहा कि इंटरनेट उपयोगी है, लेकिन केवल उसी पर निर्भर रहना गहन बौद्धिक विकास में बाधक बन सकता है। डॉ. अजीत यादव ने विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों और संदर्भ ग्रंथों के नियमित अध्ययन की सलाह दी।

कार्यक्रम के संचालक संजय मिश्र जी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी युवाओं के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं और उन्हें जीवन में उतारना आवश्यक है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं प्राचार्य प्रो. गीता मैम ने अपने उद्बोधन में स्पष्ट कहा कि “इंटरनेट की दुनिया से बाहर निकलकर किताबों की दुनिया को भी देखना होगा, तभी वास्तविक और स्थायी विकास संभव है।”

इस अवसर पर डॉ. सुनील कुमार ओझा ने कहा कि केवल विवेकानंद जी के व्यक्तित्व को सुन लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी बातों को आत्मसात करने से ही विकास होगा। उन्होंने कहा, “सबसे पहले विवेकानंद जी को पढ़िए। यदि हम उनके विचारों का मात्र 10 प्रतिशत भी अपने जीवन में उतार लें, तो भारत उनके सपनों जैसा बन सकता है।” उन्होंने विवेकानंद जी को सूर्य की उपमा देते हुए कहा कि आज के अंधकार में यदि युवा थोड़ा-सा भी टिमटिमाने का प्रयास करें, तो विकास निश्चित है और उनका सपना साकार होगा।

कार्यक्रम में डॉ. चंद्रपाल सर, डॉ. ज्ञानेंद्र सर, डॉ. गोपाल सर सहित महाविद्यालय के कर्मचारीगण भी उपस्थित रहे। सभी वक्तव्यों ने विद्यार्थियों को मूल्यपरक शिक्षा, गहन अध्ययन और राष्ट्रनिर्माण की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।