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अब खुलेगा सीएमओ कार्यालय का भ्रष्टाचार, डीएम ने नगर मजिस्ट्रेट को बनाया जांच अधिकारी

 



एक सप्ताह मे डीएम को दी जायेगी जांच रेपोर्ट 

बलिया।। मुख्य चिकित्सा अधिकारी बलिया के कार्यालय मे पनपी भ्रष्टाचार की गहरी जड़ो को उखाड़ने के लिये जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने नगर मजिस्ट्रेट आशाराम को जाँच अधिकारी बनाकर एक सप्ताह मे जांच रिपोर्ट तलब की है। जिलाधिकारी के इस आदेश से स्वास्थ्य विभाग मे हड़कंप मच गया है।

बता दे कि तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ विजय पति द्विवेदी के समय से वाराणसी के एक ठेकेदार की इंट्री क्या हुई, पूरा का पूरा सीएमओ ऑफिस जैसे इस ठेकेदार का मुरीद हो गया। इस ठेकेदार ने सबको ऐसा बनारसी चूना लगाया कि आज पूरा स्वास्थ्य विभाग जांच के फेरे मे आ गया है।

सूच्य हो कि इस ठेकेदार का इतना रसूख है कि चाहे कोई सीएमओ हो, उसका भुगतान बिना कार्य पूर्ण किये ही होता रहा। करोड़ों रूपये का भुगतान लेने वाला ठेकेदार पहली बार जांच के चक्कर मे फंसा है, नही तो यह कैसी भी जांच हो, पाक साफ बनकर निकल जाता है।

बिना टेंडर, बिना कार्य पूर्ण किये होता रहा भुगतान 

पूर्व सीएमओ डॉ संजीव बर्मन के द्वारा चर्चित ठेकेदार का जब भुगतान अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों मे किया गया तो सीएमओ कार्यालय के अन्य ठेकेदारों ने विरोध शुरू किया। इस विरोध का ही नतीजा था कि सीएमओ डॉ संजीव बर्मन ने अपना बिदाई समारोह भी नही कराये और चले गये।

बता दे कि इस ठेकेदार का इतना रसूख है कि इसके लिये चाहे डॉ विजय पति द्विवेदी रहे हो, इनके जाने के बाद डॉ विजय यादव कार्यवाहक सीएमओ, डॉ संजीव बर्मन और फिर कार्यवाहक सीएमओ डॉ विजय यादव ने इसके लिये सारे नियम क़ानून को ताक पर रख कर कार्य आवंटित किये बल्कि बिना कार्य पूर्ण हुए ही शत प्रतिशत भुगतान करने मे तनिक भी देर नही की।

पूरे प्रदेश मे एक लाख से ऊपर के कार्य कराने के लिये टेंडर या जेम पोर्टल के माध्यम से ई टेंडेंरिंग की प्रक्रिया अपनानी जरुरी है। लेकिन यह बलिया जनपद के सीएमओ कार्यालय के लिये नही जान पड़ती है क्योंकि लोग कहते है बलिया जिला नही देश है और किसी देश मे किसी दूसरे का क़ानून लागू ही नही होता है। इन करोड़ों के भुगतान मे एक कड़ी हर जगह शामिल है, वह है नोडल निर्माण कार्य। सीएमओ कार्यालय मे यह पद डॉ विजय यादव के पास है और साहब वर्तमान मे कार्यवाहक सीएमओ है। पिछली बार जब ये कार्यवाहक सीएमओ थे तो इन्होने सीएचसी अगाऊर बांसडीह के मरम्मत के कार्य के लिये इस ठेकेदार को 1.10 करोड़ का भुगतान किये। यह भी सूच्य हो कि साहब ने पहले नोडल निर्माण के रूप मे हस्ताक्षर किये, फिर सीएमओ बनकर भुगतान कर दिया। निर्माण के अवर अभियंता की भी भूमिका संदिग्ध है।