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बलिया मे चकबंदी विभाग का खेल उजागर, 80 हजार लेकर खेत को बना दिया ताल

 




पीड़ित किसान दर-दर भटकने को मजबूर, कार्रवाई के नाम पर लीपापोती का आरोप

अभयेश मिश्रा 

बलिया। बेल्थरारोड तहसील क्षेत्र के पिपरौली बड़ागांव में चकबंदी विभाग की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि चकबंदी लेखपाल ने भू-अभिलेख में मनमाफिक चक अंकित करने के नाम पर किसान राजेश कन्नौजिया से करीब 80 हजार रुपये वसूल लिए, लेकिन बदले में उनकी उपजाऊ कृषि भूमि को गांव से दूर स्थित ताल में दर्ज बचत भूमि से बदल दिया गया।

पीड़ित किसान के अनुसार, चकबंदी प्रक्रिया में सुधार का झांसा देकर उनसे मोटी रकम ली गई और बाद में ऐसा चक थमा दिया गया, जिससे खेती करना लगभग असंभव हो गया। मामले की शिकायत जब जिलाधिकारी बलिया से की गई तो विभाग में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में चकबंदी अधिकारी द्वारा पीड़ित का बयान भी दर्ज किया गया, लेकिन इसके बावजूद आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कार्रवाई के बजाय विभागीय अधिकारी मामले को टालने और दबाने में जुटे दिखाई दे रहे हैं, जिससे यह आशंका गहराती जा रही है कि कहीं पूरे प्रकरण में लीपापोती तो नहीं की जा रही।

पीड़ित किसान राजेश कन्नौजिया ने साफ शब्दों में कहा है कि उन्हें हर हाल में इंसाफ चाहिए।

उन्होंने दो टूक कहा—

“जहां तक जाना पड़ेगा, जाऊंगा… लेकिन चुप नहीं बैठूंगा।”

अब बड़ा सवाल यह है कि..

 क्या चकबंदी विभाग दोषियों पर कार्रवाई करेगा या मामला फाइलों में ही दफन हो जाएगा?