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बलिया : श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का एक दिन पूर्व ही हुआ समापन,कोरोना के चलते उठाया गया कदम, भंडारा भी रद्द

श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का एक दिन पूर्व ही हुआ समापन,कोरोना के चलते उठाया गया कदम, भंडारा भी रद्द


बलिया 20 मार्च 2020 ।।
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा रामलीला मैदान, बलिया उत्तर प्रदेश मे दिनांक १४ मार्च से २० मार्च २०२० तक ‘श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ’ का अद्भुत, भव्य व विशाल आयोजन किया जा रहा है।
भागवताचार्या महामनस्विनी विदुषी सुश्री पद्महस्ता भारती जी ने रुक्मिणी विवाह प्रसंग का उल्लेख किया। इस प्रसंग में उन्होने रुक्मिणी रुपी जीवात्मा का अपने प्रभु प्रियतम के प्रति विरह दर्शाया। साथ ही,  यह भी प्रकट किया गया कि कैसे इस आत्मा की पुकार पर वह परमात्मा उसे समस्त बंधनों से स्वतंत्र कर अपने कभी न टुटने वाले प्रणय-सूत्रों में बांध लेते है।
कथा का समापन करते हुए विदुषी जी ने कहा कि राजा परीक्षित, भय व असुरक्षा से ग्रस्त है, जिसके समक्ष हर क्षण मौत मुँह बाए खड़ी थी। फिर भी परीक्षित की मुक्ति केवल हरि चर्चा या कृष्ण लीलाओं को श्रवण करने मात्र से नही हुई थी, अपितु पुर्ण गुरु श्री शुकदेव जी महाराज के द्वारा प्रभु के तत्व रुप को अपने अंदर जान लेने पर हुई थी। शास्त्रानुसार ‘भिद्यते हृदय ग्रंथि सछिध्यंते सर्व संशयाः’ हृदय ग्रंथि अर्थात अज्ञांनता व सभी संशयों का नाश गुरु द्वारा दिव्य नेत्र प्राप्त होने पर ही होता है। भगवान कृष्ण ने अर्जुन का मोह व मोहजनित  संशय नष्ट करने हेतु भी उसे यही कहा था-
                      ‘दिव्यं ददामि ते चक्षु पश्यमेयोगमैश्वरम्‌’
अर्थात मै तुझे दिव्य चक्षु प्रदान करता हुँ। दिव्य चक्षु से परमात्मा के शाश्वत स्वरुप का दर्शन करते ही उसकी समस्त दुर्बलताएँ ऐसे विलीन हो गई, जिस प्रकार सुर्य के उदित होने पर कुहासा छत जाता है। राजा परीक्षित को भी शुकदेव जी ने ब्रह्मज्ञान प्रदान कर, दिव्य नेत्र जागृत कर उनके लिए मुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया था।
अंत में साध्वी जी ने बताया कि आज दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान में सर्व श्री आशुतोष महाराज जी द्वारा ब्रह्म्ज्ञान प्राप्त कर असंख्य लोगो ने परीक्षित की ही तरह मुक्ति के मार्ग को पाया है। इस प्रकार संस्थान आज विश्व शांति, बंधुत्व व एकता की स्थापना की ओर बढ़ रहा है। संस्थान व आयोजको की ओर से भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ सप्ताह के आयोजन व उसमे भारी संख्या में सम्मिलित होने के लिए क्षेत्रवासियों का धन्यवाद करते हुए भागवताचार्या महामनस्विनी साध्वी सुश्री पद्महस्ता भारती जी ने कहा कि क्षेत्र निवासियों का यह सहयोग चिरस्मरणीय रहेगा। संस्थान सभी को ब्रह्म्ज्ञान प्राप्ति हेतु आमंत्रित करता है व भविष्य में ऐसे ही सहयोग की अभिलाषा करता है।
इस कथा की मार्मिकता व रोचकता से प्रभावित होकर अपार जन समुह के साथ-साथ शहर के विशिष्ट नागरिक भी इन कथा प्रसंगों को श्रवण करने के लिए पधारे। ‘श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ’ में भाव विभोर करने वाले मधुर संगीत से ओत-प्रोत भजन संकीर्तन को श्रवण कर भक्त श्रद्धालु मंत्र
मुग्ध होकर झुमने को मजबूर हो गए।
कोरोना से बचाव के लिये कहा- रहिये सतर्क,सरकार के निर्देशों का करे पालन

पद्महस्ता भारती जी ने पूरे विश्व पर छाये कोरोना के भय के सम्बंध में श्रद्धालुओं को बताते हुए कहा कि इस बीमारी से बचने का सबसे बड़ा हथियार सतर्क रहना है । साथ ही सरकार द्वारा समय समय पर दिये गए निर्देशों का पालन करके इस महामारी को अपने से दूर रखा जा सकता है । सुश्री ने इस महामारी से बचाव के निमित्त सामूहिक  मंत्र जाप भी किया ।




इसके अतिरिक्त स्वामी अर्जुनानंद जी ने अपने विचारों में संस्थान के बारे में बताते हुए कहा कि संस्थान आज सामाजिक चेतना व जन जाग्रति हेतु आध्यात्मिकता का प्रचार व प्रसार कर रही है। माँ सरस्वती ने आज जिनके कंठ में अपने दिव्य स्वर दिए- साध्वी सुश्री पद्‌मप्रभा भारती जी, साध्वी सुश्री अभिनंदना भारती जी,  साध्वी सुश्री सुमन भारती जी, साध्वी सुश्री अवनि भारती जी, गुरु भाई शिवम जी व गुरु भाई राम जी। इन भजनों को ताल व लयबद्ध किया- साध्वी सुश्री दीपा भारती जी, साध्वी सुश्री अपर्णा भारती जी, साध्वी सुश्री प्रियंका भारती जी, साध्वी सुश्री निधि भारती जी, साध्वी सुश्री उज्जैशा भारती जी और गुरुभाई आशीष जी व गुरुभाई पवन जी ने।
स्वामी अर्जुनानन्द जी ने बताये एक दिन पूर्व श्रीमद्भागवत की कथा यज्ञ के समापन की क्या थी मजबूरी

श्री स्वामी अर्जुनानन्द जी ने बताया कि आज पूरे विश्व पर कोरोना वायरस के चलते महामारी फैली हुई है , हमारे देश मे भी संक्रमण हुआ है । हमारे प्रधानमंत्री मंत्री जी ने और राज्य सरकार ने इस महामारी से बचाव के लिये एडवाइजरी जारी की है जिसको अमल करना हर भारतीय का कर्तव्य है । यही कारण है कि हम लोगो ने भी सुरक्षात्मक कारणों से व पीएम मोदी जी के सुझाव पर इस कथा यज्ञ को एक दिन पूर्व ही समाप्त करने का निर्णय किया है ।