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जाने सीमा से लगे कश्मीर के इस गांव में मात्र 10 लोगो ने ही क्यो डाला वोट ? गोलाबारी में बर्बाद हो चुके ग्रामीणों ने कहा - हमे कोई फर्क नही पड़ता कौन जाएगा संसद
जाने सीमा से लगे कश्मीर के इस गांव में मात्र 10 लोगो ने ही क्यो डाला वोट ? गोलाबारी में बर्बाद हो चुके ग्रामीणों ने कहा - हमे कोई फर्क नही पड़ता कौन जाएगा संसद

12 अप्रैल 2019 ।।
(आकाश हसन)
पिछले महीने उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के लंगेट क्षेत्र के बाबागुंड गांव में आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई गोलीबारी में तेरह घर पूरी तरह से तबाह हो गए. लश्कर ए तैयबा के आतंकियों से 72 घंटे तक मुठभेड़ चली. जिसमें लश्कर ए तैयबा के दो आतंकवादी एवं एक स्थानीय पाकिस्तानी नागरिक मारे गए. सीआरपीएफ के तीन जवान एवं दो पुलिसकर्मी भी शहीद हो गए थे. इस मुठभेड़ में एक भारतीय नागरिक की भी मौत हो गई थी.
पिछले महीने उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के लंगेट क्षेत्र के बाबागुंड गांव में आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई गोलीबारी में तेरह घर पूरी तरह से तबाह हो गए. लश्कर ए तैयबा के आतंकियों से 72 घंटे तक मुठभेड़ चली. जिसमें लश्कर ए तैयबा के दो आतंकवादी एवं एक स्थानीय पाकिस्तानी नागरिक मारे गए. सीआरपीएफ के तीन जवान एवं दो पुलिसकर्मी भी शहीद हो गए थे. इस मुठभेड़ में एक भारतीय नागरिक की भी मौत हो गई थी.
गोलीबारी इतनी भयानक थी कि पचास से ज्यादा लोग बेघर हो गए. इस घटना को एक महीने बीत चुके हैं, लेकिन सेब के बगान वाला ये गांव अभी भी उजड़ा हुआ है. देशभर की 91 लोकसभा सीटों पर गुरुवार सुबह मतदान शुरू हुआ. यहां भी पोलिंग स्टेशन सजे, लेकिन लोकतंत्र धराशायी दिखा. इस गांव में कुल 836 मतदाता हैं. दोपहर तक केवल दो वोट पड़े थे और मदान खत्म होने तक यह आंकड़ा 10 तक ही सिमट कर रहा गया.
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने मतदान का बहिष्कार इसलिए किया क्योंकि गोलीबारी के बाद कोई भी उनकी मदद करने नहीं आया. मुठभेड़ में अपना घर खो चुके मुश्ताक अहमद ने कहा, 'हम अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों के सहारे गुजर बसर कर रहे हैं. इस दौरान कोई ये देखने नहीं आया कि हम जिंदा हैं या मर गए.'
नाम न उजागर करने की शर्त पर एक पीड़ित परिवार के सदस्य ने कहा, 'हमारे पास पैसा नहीं है, हम घर का निर्माण कैसे करेंगे.' उनके मकान खंडहर में तब्दील है. कुछ लोग अपने खंडहर हो चुके मकान पर काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नहीं मालूम कि इसे दोबारा कैसे खड़ा करना है.
शायद इसलिए इन ग्रामिणों के लिए चुनाव और मतदान का कोई मतलब नहीं है. एक अन्य ग्रामीण शाह ने कहा, 'हमारा जीवन नष्ट हो गया है. हमने उस भुठभेड़ में अपना सबकुछ खो दिया. यहां से कोई संसद में जाता है या नहीं, हमें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है.'
जब ये मुठभेड़ शुरू हुई तो उस वक्त ज्यादात्तर लोग अपने खेतों में काम कर रहे थे. उन लोगों ने अपने मवेशियों को भी खो दिया है. जबकि बाबागुंद के आस पड़ोस के गांव मतदान को लेकर उत्साहित थे. लोगों ने भारी संख्या में वोट डाले. लेकिन, बाबागुंद गांव के ज्यादात्तर लोगों ने मतदान का बहिष्कार किया.
जबकि बांदीपोरा के हाजिन क्षेत्र में भी यही स्थिति थी. यहां पर 2,236 वोटर हैं, लेकिन केवल 10 वोट पड़े. 22 मार्च को यहां लश्कर के एक शीर्ष कमांडर सहित दो आतंकवादी मारे गए. आतंकवादियों ने एक 12 वर्षीय लड़के को भी बंधक बनाकर रखा था. वे बच्चा भी गोलीबारी में मारा गया था.
मतदान के दौरान हाजिन शहर पूरी तरह से बंद था और लोग चुनाव के प्रति उदासीन दिख रहे थे. एक स्थानीय नागरिक शबीर अहमद मीर ने कहा, 'हम यहां पर हर दिन खून-खराबे देखते हैं. यहां चुनाव का कोई मतलब नहीं है
(साभार न्यूज18)
जाने सीमा से लगे कश्मीर के इस गांव में मात्र 10 लोगो ने ही क्यो डाला वोट ? गोलाबारी में बर्बाद हो चुके ग्रामीणों ने कहा - हमे कोई फर्क नही पड़ता कौन जाएगा संसद
Reviewed by बलिया एक्सप्रेस
on
April 12, 2019
Rating: 5
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