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गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक MLC चुनाव में धांधली का आरोप, भाजपा एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने मांगी पुनर्मतगणना





गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव की मतगणना को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा के विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने मतगणना में कथित अनियमितताओं और मतपत्रों में हेराफेरी के आरोप लगाते हुए भारत निर्वाचन आयोग से पुनर्मतगणना कराने की मांग की है। उन्होंने 29 अक्टूबर 2026 को मुख्य निर्वाचन आयुक्त और आयोग के अन्य अधिकारियों को ईमेल भेजकर शिकायत की। पत्र में उन्होंने मतगणना की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए संबंधित मतपेटियों और मतपत्रों की जांच कराने की मांग की है।


देवेंद्र प्रताप सिंह ने अपनी शिकायत में दावा किया कि मतगणना के शुरुआती तीन चरणों में लगभग 42 हजार मतों की गिनती पूरी होने के बाद प्रत्याशी राजीव यादव अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी ध्रुव कुमार त्रिपाठी से 376 मतों से आगे थे। उनके अनुसार, चौथे और अंतिम चरण में 1,612 मतों की गिनती हुई, जिसके बाद परिणाम में बदलाव आया। सिंह ने आरोप लगाया कि अंतिम चरण की मतगणना के दौरान मतपत्रों पर दर्ज वरीयता क्रम में कथित तौर पर हेराफेरी की गई, जिससे चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ।





शिकायत में सबसे गंभीर सवाल मतपत्रों पर दर्ज वरीयता क्रम को लेकर उठाया गया है। देवेंद्र प्रताप सिंह का आरोप है कि राजीव यादव के पक्ष में दर्ज प्रथम वरीयता के कुछ मतों को कथित रूप से चौथी वरीयता में बदल दिया गया और ध्रुव कुमार त्रिपाठी के नाम के आगे प्रथम वरीयता दर्ज कर दी गई। उन्होंने दावा किया कि संबंधित प्रविष्टियों की लिखावट और इस्तेमाल की गई कलम की जांच से इस कथित गड़बड़ी का पता लगाया जा सकता है। इसी आधार पर उन्होंने मतपत्रों की फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।


देवेंद्र प्रताप सिंह ने मतपेटियों की सील को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके पत्र के मुताबिक, देवरिया जिले के बूथ संख्या 84 और मऊ जिले के बूथ संख्या 111 तथा 115 की मतपेटियों की सील टूटी हुई थी। उन्होंने आशंका जताई कि इन मतपेटियों में रखे मतपत्रों के साथ छेड़छाड़ की गई। उनका कहना है कि संबंधित मतपत्रों की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि वरीयता क्रम में कोई बदलाव किया गया था या नहीं।


शिकायत में मऊ जिले के बूथ संख्या 115 पर मतपत्रों की संख्या को लेकर भी सवाल उठाया गया है। सिंह के अनुसार, वहां मतपत्र लेखा में दर्ज संख्या की तुलना में 50 मतपत्र अधिक मिले। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रत्येक चरण की मतगणना के बाद परिणाम की लिखित घोषणा नहीं की गई। इन दावों की पुष्टि के लिए निर्वाचन अधिकारियों के रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी।


भाजपा एमएलसी ने मतगणना केंद्र पर तैनात अधिकारियों के व्यवहार पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रत्याशी राजीव यादव के एजेंटों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई तथा राजीव यादव पर दबाव डालकर अंतिम गणना के प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर कराए गए। ये आरोप भी उनके शिकायत पत्र का हिस्सा हैं। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों का पक्ष और उपलब्ध साक्ष्य सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


देवेंद्र प्रताप सिंह ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि जिन तीन बूथों की मतपेटियों की सील टूटने का आरोप लगाया गया है, वहां दोबारा मतदान कराने के अनुरोध पर विचार किया जाए। इसके अलावा, मतपत्रों की फॉरेंसिक जांच उच्च न्यायालय की निगरानी में कराने, पुनर्मतगणना कराने और यदि जांच में किसी अधिकारी की संलिप्तता प्रमाणित होती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है। उन्होंने यह भी अनुरोध किया है कि विवाद का निपटारा होने तक जारी निर्वाचन प्रमाणपत्र को निलंबित रखा जाए।


इस मामले में राजनीतिक महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि मतगणना पर सवाल उठाने वाले देवेंद्र प्रताप सिंह स्वयं भाजपा के विधान परिषद सदस्य हैं। उनकी शिकायत से चुनावी प्रक्रिया और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बहस शुरू हो सकती है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों को अभी प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया, मतगणना से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज और संबंधित अधिकारियों का पक्ष इस मामले में महत्वपूर्ण होंगे।


फिलहाल, देवेंद्र प्रताप सिंह ने चुनाव आयोग से शिकायत कर पुनर्मतगणना और जांच की मांग की है। अब यह देखना होगा कि आयोग इन आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है और जांच के दौरान कौन-से तथ्य सामने आते हैं। चुनाव की निष्पक्षता से जुड़े इन सवालों का समाधान आधिकारिक जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही संभव होगा।