प्रेस क्लब में सपा की प्रेस वार्ता के दौरान विवाद से संगठन भंग करने तक पहुंचा मामला, अंशुमान निष्कासित जिला-महानगर समेत सभी कमेटियां भंग
गोरखपुर। समाजवादी पार्टी की गोरखपुर इकाई में शनिवार को प्रेस क्लब में हुई मारपीट की घटना के बाद शुरू हुआ विवाद अब बड़े संगठनात्मक फैसले तक पहुंच गया है। प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी के साथ कथित मारपीट और थप्पड़ मारे जाने के मामले में पार्टी ने उसी दिन पूर्व चेयरमैन अंशुमान सिंह को अनुशासनहीनता के आरोप में निष्कासित कर दिया था। इसके अगले दिन रविवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की अनुमति से गोरखपुर की जिला और महानगर कार्यकारिणी समेत सभी फ्रंटल संगठनों की कार्यकारिणियां तत्काल प्रभाव से भंग कर दी गईं। इस फैसले के साथ मौजूदा पदाधिकारियों और सदस्यों को उनके पदों से कार्यमुक्त कर दिया गया है।
मामले की शुरुआत शनिवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब में सपा की ओर से आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ-वोट बचाओ’ प्रेस वार्ता के दौरान हुई। कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष बृजेश कुमार गौतम, महानगर अध्यक्ष शब्बीर कुरैशी, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रहलाद यादव, पूर्व जिलाध्यक्ष अवधेश यादव, पूर्व विधायक विजय बहादुर यादव, काजल निषाद, संजय पहलवान, पूर्व दर्जा प्राप्त मंत्री डॉ. मोहसिन, जय प्रकाश यादव और रणजीत पासवान समेत कई नेता व पदाधिकारी मौजूद थे। पत्रकार भी कार्यक्रम को कवर कर रहे थे।
प्रेस वार्ता के दौरान बैठने की जगह को लेकर विवाद की स्थिति बनी। बताया गया कि अंशुमान सिंह के पुत्र कमलेश प्रेस क्लब पहुंचे और काजल निषाद के पास बैठने का प्रयास किया। इसी दौरान उनकी पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी से बातचीत हुई और जगह को लेकर कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और आरोप है कि नगीना साहनी के साथ हाथापाई करते हुए उन्हें थप्पड़ मारा गया। मौके पर मौजूद लोगों के हस्तक्षेप के बाद स्थिति को संभाला गया।
घटना उस समय हुई जब प्रेस वार्ता चल रही थी। पत्रकारों के कैमरों में घटनाक्रम रिकॉर्ड हुआ, जबकि प्रेस क्लब परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी इस पूरे विवाद को समझने में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विवाद किस बात से शुरू हुआ और किस तरह कहासुनी मारपीट तक पहुंची, इसे उपलब्ध वीडियो फुटेज के आधार पर स्पष्ट किया जा सकता है।
घटना के बाद प्रेस क्लब में माहौल तनावपूर्ण हो गया। जिस कार्यक्रम में लोकतंत्र और मतदान से जुड़े मुद्दों को लेकर सपा अपनी बात रख रही थी, उसी दौरान पार्टी नेताओं के बीच हुए विवाद ने पूरी प्रेस वार्ता का रुख बदल दिया। घटना को लेकर मौके पर मौजूद पत्रकारों के बीच भी नाराजगी देखी गई। इसी बीच प्रेस क्लब परिसर में असलहा लेकर पहुंचने की बात भी सामने आई, हालांकि इस आरोप की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
घटना के बाद सपा जिलाध्यक्ष बृजेश कुमार गौतम ने इसे गंभीर और निंदनीय मामला बताते हुए पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व को जानकारी देने तथा अनुशासनहीनता करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही। इसके कुछ ही समय बाद पार्टी ने कार्रवाई करते हुए पूर्व चेयरमैन अंशुमान सिंह को समाजवादी पार्टी से निष्कासित कर दिया। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की ओर से जारी कार्यालय ज्ञाप में पत्रांक 568/2026 और 3 अक्टूबर 2026 की तारीख दर्ज है। इसमें अंशुमान सिंह, पूर्व चेयरमैन बांसगांव, निवासी पैडलेगंज, गोरखपुर को अनुशासनहीनता के कारण पार्टी से निष्कासित किए जाने की जानकारी दी गई है।
शनिवार की घटना और उसी दिन हुई कार्रवाई के बाद रविवार को पार्टी ने गोरखपुर संगठन को लेकर एक और बड़ा फैसला लिया। 4 अक्टूबर 2026 को जारी कार्यालय ज्ञाप के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की अनुमति से गोरखपुर की जिला कार्यकारिणी और महानगर कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया। इसके साथ ही सभी फ्रंटल संगठनों की जिला और महानगर इकाइयों की कार्यकारिणियां भी समाप्त कर दी गईं।
फैसले का दायरा केवल जिला और महानगर इकाइयों तक सीमित नहीं रहा। गोरखपुर से संबंधित समाजवादी पार्टी की राज्य कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों तथा सभी फ्रंटल संगठनों की प्रदेश कार्यकारिणियों के पदाधिकारियों और सदस्यों को भी तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर दिया गया है। यानी पार्टी ने गोरखपुर में संगठन के मौजूदा ढांचे को व्यापक स्तर पर समाप्त करते हुए नए सिरे से संगठन खड़ा करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
जारी आदेश की प्रतियां राष्ट्रीय प्रमुख महासचिव रामगोपाल यादव, प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व जिलाध्यक्ष बृजेश कुमार गौतम, पूर्व महानगर अध्यक्ष शब्बीर कुरैशी, फ्रंटल संगठनों के सभी प्रदेश अध्यक्षों तथा गोरखपुर के पूर्व सांसद, पूर्व विधायक और प्रमुख नेताओं को आवश्यक कार्रवाई एवं सूचना के लिए भेजी गई हैं।
एक दिन पहले प्रेस क्लब में हुई घटना से शुरू हुआ विवाद और उसके बाद पार्टी की कार्रवाई अब संगठन में व्यापक बदलाव तक पहुंच गया है। शनिवार को जहां अनुशासनहीनता के आरोप में अंशुमान सिंह के खिलाफ निष्कासन की कार्रवाई हुई, वहीं रविवार को जिला-महानगर समेत फ्रंटल संगठनों की कार्यकारिणियां भंग कर दी गईं। अब गोरखपुर में सपा का नया संगठन किस रूप में तैयार होगा और किन नेताओं को नई जिम्मेदारी मिलेगी, इसे लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।









