डीडीयू के 45वें दीक्षांत समारोह में मेधावियों का सम्मान, राज्यपाल ने शिक्षा की गुणवत्ता पर दिया जोर; कार्यक्रम के दौरान एबीवीपी-पुलिस विवाद में कैंट थाना प्रभारी निलंबित
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय का 45वां दीक्षांत समारोह गुरुवार को गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने की। कार्यक्रम में नीति आयोग के सदस्य डॉ. विजय कुमार सारस्वत मुख्य अतिथि तथा उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। इस अवसर पर विभिन्न संकायों के मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक, उपाधियां और सम्मान प्रदान किए गए। राज्यपाल ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उच्च शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से ज्ञान, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व को अपने जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।
अपने संबोधन में राज्यपाल ने उच्च शिक्षण संस्थानों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण, छात्र कल्याण और प्रशासनिक जवाबदेही पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की पहचान केवल शैक्षणिक उपलब्धियों से नहीं होती, बल्कि परिसर की स्वच्छता, अनुशासन, छात्रावासों की व्यवस्था, विद्यार्थियों को उपलब्ध सुविधाओं और प्रशासनिक पारदर्शिता से भी होती है। उन्होंने हालिया निरीक्षणों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन कमियों की ओर ध्यान आकर्षित किया गया है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया कि छात्रावासों में स्वच्छ, सुरक्षित और अध्ययन के अनुकूल वातावरण सुनिश्चित किया जाए तथा व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा कर आवश्यक सुधार किए जाएं। राज्यपाल ने कहा कि किसी भी प्रकार की शिकायत मिलने पर उसका समयबद्ध और निष्पक्ष समाधान होना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों का विश्वास संस्थान पर बना रहे।
दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी, अभिभावक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को मजबूत बनाने का संदेश प्रमुख रूप से सामने आया।
इसी गरिमामय समारोह के दौरान विश्वविद्यालय परिसर के बाहर प्रवेश व्यवस्था को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच विवाद हो गया। राज्यपाल के कार्यक्रम को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। इसी दौरान कुछ एबीवीपी पदाधिकारी और कार्यकर्ता समारोह में शामिल होने के लिए विश्वविद्यालय पहुंचे। संगठन का आरोप है कि कई कार्यकर्ताओं के पास वैध निमंत्रण पत्र होने के बावजूद उन्हें मुख्य द्वार से प्रवेश नहीं दिया गया, जबकि कुछ अन्य लोगों को अंदर जाने की अनुमति मिल गई। इसी बात को लेकर पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच पहले कहासुनी हुई और फिर विवाद बढ़ गया।
एबीवीपी का आरोप है कि विरोध दर्ज कराने पर कैंट थाना प्रभारी संजय सिंह और पुलिसकर्मियों ने कार्यकर्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार किया। संगठन के अनुसार कुछ कार्यकर्ताओं को विश्वविद्यालय चौकी पर बैठा लिया गया और बाद में पहुंचे पदाधिकारियों के साथ भी दुर्व्यवहार, गाली-गलौज और हाथापाई की गई। घटना से नाराज कार्यकर्ताओं ने पहले विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन किया और बाद में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर कार्रवाई की मांग की। इस दौरान छात्रों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की और पूरे घटनाक्रम की शिकायत वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ से की।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कैंट थाना प्रभारी संजय सिंह को निलंबित कर दिया। एसपी सिटी निमिष पाटिल ने बताया कि एबीवीपी कार्यकर्ताओं के साथ अभद्रता की शिकायत प्राप्त होने के बाद प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल प्रभाव से थाना प्रभारी को निलंबित किया गया है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
घटना के दौरान विश्वविद्यालय परिसर के बाहर कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति जरूर बनी, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने हालात को नियंत्रित रखा तथा दीक्षांत समारोह बिना किसी व्यवधान के अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संपन्न हुआ। प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी तय की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
एक ओर जहां दीक्षांत समारोह में मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कर उच्च शिक्षा और उत्कृष्टता का संदेश दिया गया, वहीं दूसरी ओर कार्यक्रम के दौरान उत्पन्न विवाद और उसके बाद हुई प्रशासनिक कार्रवाई भी पूरे दिन चर्चा का विषय बनी रही। अब सभी की निगाहें विभागीय जांच की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे पूरे घटनाक्रम की वास्तविक परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।










