कोहबर प्रकाशन एवं नवपल्लव बुक्स की वेबसाइट लॉन्च, बलिया के तीन साहित्यकारों को मिला सम्मान
डॉ सुनील ओझा
बलिया।। हिंदी साहित्य के प्रचार-प्रसार और उत्कृष्ट रचनाओं को देश-विदेश के पाठकों तक पहुंचाने के उद्देश्य से लखनऊ स्थित कोहबर प्रकाशन एवं नवपल्लव बुक्स के संयुक्त प्रयास से हाल ही में नवपल्लवबुक्स.कॉम वेबसाइट का शुभारंभ किया गया। यह पहल हिंदी साहित्य को डिजिटल मंच के माध्यम से व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस वेबसाइट की विशेष उपलब्धि यह है कि जनपद बलिया की ग्रामसभा ईसारी सलेमपुर के एक ही परिवार से जुड़े तीन साहित्यकारों को इसमें प्रमुखता से स्थान दिया गया है। इनमें भोजपुरी, हिंदी एवं बंगला साहित्य के प्रतिष्ठित रचनाकार डॉ. रामसेवक विकल, उनके ज्येष्ठ पुत्र एवं हिंदी-भोजपुरी के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. आदित्य कुमार अंशु तथा पौत्र आनंद कुमार शामिल हैं। आनंद कुमार हिंदी साहित्यकार, कला समीक्षक एवं साहित्य समीक्षा संस्था के संस्थापक के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं।
एक ही परिवार के तीन साहित्यकारों को इस प्रतिष्ठित साहित्यिक मंच पर स्थान मिलने से जिले के साहित्यिक एवं बौद्धिक जगत में हर्ष का माहौल है। साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों ने इसे बलिया के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है।
उल्लेखनीय है कि गत वर्ष कोहबर प्रकाशन द्वारा डॉ. रामसेवक विकल के भोजपुरी लोकगीतों के चर्चित संकलन "आखर" का प्रकाशन भी किया गया था, जिसे साहित्य प्रेमियों ने काफी सराहा था।
इस उपलब्धि पर भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ सुनील कुमार ओझा , प्रदेश अध्यक्ष मधुसुदन सिंह वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. भोला प्रसाद आग्नेय, डॉ. फतेहचंद बेचैन, गयाशंकर प्रेमी, डॉ. सेराज अहमद, नन्द जी नन्दा, रमाशंकर मनहर, सत्येंद्र सिंह इन्दुराज, संतोष शशि, पंकज श्रीवास्तव, खुर्शीद अहमद, शेषनाथ विद्यार्थी, राजेन्द्र विद्रोही, सुनील सरदासपुरी, अनुराग श्रीवास्तव एवं मुखराम नेमी सहित अनेक साहित्यकारों एवं साहित्य प्रेमियों ने शुभकामनाएं और बधाई प्रेषित की है।
साहित्यकारों का मानना है कि यह उपलब्धि न केवल संबंधित परिवार बल्कि पूरे जनपद बलिया के लिए गर्व का विषय है। इससे जिले की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी तथा युवा पीढ़ी को साहित्य सृजन के लिए प्रेरणा प्राप्त होगी।





