सुरहाताल को रामसर सरोवर घोषित होने से बलिया को मिली अंतर्राष्ट्रीय पहचान, पर्यटन से आमदनी की बढ़ी अपार संभावनाएं :डॉ गणेश पाठक
बलिया।। पीएम मोदी द्वारा 5 जून पर्यावरण दिवस पर सुरहाताल को अंतर्राष्ट्रीय रामसर सरोवर घोषित करने से बलिया को क्या लाभ मिलेगा, इस पर बालिया एक्सप्रेस के उपसंपादक डॉ सुनील ओझा ने पर्यावरणविद डॉ. गणेश पाठक से खास मुलाक़ात मे बातचीत कर उपरोक्त सवाल का हल जानने का प्रयास किया। प्रस्तुत है खास मुलाक़ात......
प्रश्न (बालिया एक्सप्रेस)-सुरहा ताल को रामसर स्थल घोषित किए जाने को आप किस रूप में देखते हैं?
उत्तर (डॉ. गणेश पाठक)-यह बलिया जनपद के लिए ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण उपलब्धि है। 5 जून, विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सुरहा ताल को देश का 100वां तथा उत्तर प्रदेश का 13वां रामसर सरोवर स्थल घोषित किया गया। इससे बलिया को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में जिले की प्रतिष्ठा बढ़ी है।
प्रश्न-रामसर स्थल का दर्जा मिलने से बलिया को क्या लाभ होंगे?
उत्तर-सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि सुरहा ताल का संरक्षण और वैज्ञानिक ढंग से विकास सुनिश्चित होगा। इसके साथ ही पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्यटकों का आगमन बढ़ेगा।
प्रश्न- सुरहा ताल की प्रमुख विशेषताएं क्या हैं?
उत्तर - सुरहा ताल जैव विविधता से भरपूर एक विशाल प्राकृतिक आर्द्रभूमि है। यहां विभिन्न प्रकार की मछलियां, जलीय जीव, जलीय वनस्पतियां तथा देशी-विदेशी पक्षियों की अनेक प्रजातियां पाई जाती हैं। शीतकाल में साइबेरिया सहित विभिन्न देशों से आने वाले प्रवासी पक्षी इसकी सुंदरता को और बढ़ा देते हैं।
प्रश्न- प्रवासी पक्षियों के संदर्भ में सुरहा ताल का क्या महत्व है?
उत्तर -हर वर्ष सितंबर-अक्टूबर से लेकर फरवरी-मार्च तक हजारों प्रवासी पक्षी यहां आते हैं। वे यहां प्रजनन भी करते हैं और अपने बच्चों के साथ वापस लौटते हैं। यह सुरहा ताल की समृद्ध पारिस्थितिकी का प्रमाण है। हालांकि इनके अवैध शिकार पर प्रभावी रोक लगाना भी जरूरी है।
प्रश्न-सुरहा ताल क्षेत्र को पहले भी विशेष संरक्षण प्राप्त रहा है?
उत्तर- जी हां। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चंद्रशेखर जी के प्रयासों से इसे पक्षी विहार अभयारण्य के रूप में पहचान मिली। बाद में इसके महत्व को देखते हुए इसे संवेदनशील क्षेत्र (सेंसिटिव जोन) भी घोषित किया गया ताकि यहां अनियंत्रित निर्माण कार्य न हो और इसकी प्राकृतिक संरचना सुरक्षित रह सके।
प्रश्न- क्या सुरहा ताल केवल पर्यावरणीय दृष्टि से ही महत्वपूर्ण है?
उत्तर - नहीं, इसका आर्थिक और कृषि महत्व भी बहुत बड़ा है। यहां विशेष किस्म का धान, सिंघाड़ा, कमल, कुमुदिनी तथा विभिन्न प्रकार की स्वादिष्ट और पौष्टिक मछलियां प्राप्त होती हैं। ताल की मिट्टी भी अत्यंत उपजाऊ होती है और कृषि के लिए लाभदायक मानी जाती है।
प्रश्न - पर्यटन विकास की संभावनाओं को आप कैसे देखते हैं?
उत्तर-सुरहा ताल में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यदि नौका विहार, पक्षी दर्शन, प्रकृति पर्यटन और अन्य सुविधाओं का समुचित विकास किया जाए तो यह पूर्वांचल का प्रमुख पर्यटन केंद्र बन सकता है। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
प्रश्न - इस उपलब्धि के पीछे किन लोगों का योगदान रहा है?
उत्तर -प्रशासन, जनप्रतिनिधियों, समाचार मीडिया, पर्यावरण प्रेमियों, लेखकों और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है कि आज सुरहा ताल को रामसर स्थल का दर्जा मिला है। पूर्व जिलाधिकारी सौम्या अग्रवाल, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, वर्तमान जिलाधिकारी भवानी प्रसाद सिंह सहित अनेक लोगों ने इसके विकास के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
प्रश्न -अब आगे क्या किया जाना चाहिए?
उत्तर - अब हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी इस वैश्विक पहचान को बनाए रखने की है। सुरहा ताल के संरक्षण, स्वच्छता, जैव विविधता की रक्षा और पर्यटन विकास के लिए प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और आम जनता को मिलकर कार्य करना होगा। मेरा विश्वास है कि सुरहा ताल भविष्य में विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित होगा और बलिया को नई पहचान देगा।
प्रश्न: अंत में बलिया की जनता के लिए आपका संदेश?
उत्तर - सुरहा ताल केवल एक ताल नहीं, बल्कि हमारी प्राकृतिक धरोहर है। इसे संरक्षित रखना हम सभी का दायित्व है। यदि हम सब मिलकर इसके संरक्षण और विकास के लिए कार्य करें तो यह न केवल बलिया बल्कि पूरे देश का गौरव बनेगा।






