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क्या जिला प्रशासन व सीएमओ कार्यालय के वरदहस्त से बिना ऐनेथिशिया चिकित्सक धड़ल्ले से चल रहे है निजी अस्पताल?

 



कार्यवाही न होने से उठ रहा है सवाल 

मधुसूदन सिंह 

बलिया।। एक निजी अस्पताल मे प्रसव के दौरान पैदा हुई दो मृत बच्चियों और गंभीर हालत मे मऊ के लिये रेफर की गयी जच्चा की मौत क बाद परिजनों द्वारा बवाल काटने के आरोपी निजी अस्पताल के खिलाफ दूसरी बार स्वास्थ्य विभाग की कार्यवाही पर सवाल खड़े हो रहे है। दूसरी बार की कार्यवाही के बाद सीएमओ कार्यालय के बगल मे ही चल रहे बिना पंजीकरण वाले अस्पतालो पर कार्यवाही न होने प्रशासनिक अमला संदेह के घेरे मे आ गया है। आखिर सीएमओ बलिया को अपने कार्यालय के बगल मे चल रहे अवैध निजी अस्पताल क्यों नही दिख रहे है? एक अस्पताल को सिर्फ चेतावनी देकर क्यों छोड़ दिया गया, जबकि उसके संचलक ने बताया कि पंजीकरण के लिये आवेदन कर दिया है। क्या पंजीकरण के लिये आवेदन करने मात्र से अस्पताल चलाने की इजाजत हो जाती है?सीएमओ कार्यालय मे पंजीकरण मे ही खूब खेला होता है।

बिना ऐनेथेशिया चिकित्सक,कैसे होते है ऑपरेशन 

बलिया जनपद मे 100 से ज्यादे निजी अस्पतालों को सीएमओ कार्यालय से पंजीकृत किया गया है। कागजो मे पंजीकरण के लिये जीतने भी मानक है, पूरे मिलेंगे। लेकिन हकीकत मे कुछ ही अस्पताल होंगे जो मानको को पूर्ण करते है। ऐनेथिशिया चिकित्सक क मामले मे तो हमाम मे सभी नंगे है। सूत्रों की माने तो पूरे जनपद मे प्राइवेट रूप से कार्य करने वाले दो ऐनेथिशिया चिकित्सक है। लेकिन इन लोगों का नाम सभी निजी अस्पतालों मे ऑपरेशन वाले रिकॉर्ड मे आपको दर्ज मिल जायेंगे। अब आप लोग खुद सोच लीजिये कि पूरे जनपद के निजी अस्पतालों मे ये दो लोग कैसे योगदान देते होंगे? अगर ये चिकित्सक उपलब्ध नही है तो कैसे ऑपरेशन किया जाता है? मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और सीएमओ बलिया और जिला प्रशासन इस ओर ध्यान दे ही नही रहा है।

बलिया एक्सप्रेस का जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग से अनुरोध है कि जनपद भर के निजी अस्पतालों मे बिना ऐनेथिसिया चिकित्सक की उपस्थिति के ऑपरेशन पर रोक लगाकर मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ होने से रोक लगायी जाय।