मुख्यमंत्री ने दिये श्री अयोध्या धाम में माता सीता के जीवन-चरित पर केन्द्रित ’वैदेही आर्ट गैलरी’ की स्थापना के निर्देश
सीता माता भारतीय संस्कृति, मर्यादा और नैतिक आदर्शों की अनुपम प्रेरणा, उनके उज्ज्वल चरित्र से नई पीढ़ी को गहराई से परिचित कराना समय की आवश्यकता : मुख्यमंत्री
यह अत्याधुनिक गैलरी केवल एक कला-संग्रहालय न होकर, सीता माता के जीवन, त्याग, करुणा, मर्यादा, धैर्य और शक्ति का आधुनिक तकनीक के माध्यम से पुनर्पाठ प्रस्तुत करने वाली एक जीवन्त सांस्कृतिक अनुभव-स्थली होनी चाहिए
इस गैलरी में मिथिला की संस्कृति, लोकपरम्परा और कला के विविध आयामों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए
लखनऊ : 04 फरवरी, 2026।।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज यहां अपने सरकारी आवास पर आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में श्री अयोध्या धाम में माता सीता के जीवन-चरित पर केन्द्रित ’वैदेही आर्ट गैलरी’ की स्थापना के निर्देश दिए। उन्होंने आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के कार्यों की समीक्षा के दौरान कहा कि सीता माता भारतीय संस्कृति, मर्यादा और नैतिक आदर्शों की अनुपम प्रेरणा हैं। उनके उज्ज्वल चरित्र से नई पीढ़ी को गहराई से परिचित कराना समय की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री जी ने आर्ट गैलरी की परिकल्पना साझा करते हुए कहा कि यह अत्याधुनिक गैलरी केवल एक कला-संग्रहालय न होकर, सीता माता के जीवन, त्याग, करुणा, मर्यादा, धैर्य और शक्ति का आधुनिक तकनीक के माध्यम से पुनर्पाठ प्रस्तुत करने वाली एक जीवन्त सांस्कृतिक अनुभव-स्थली होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री जी ने कहा कि इस गैलरी की कथा-वस्तु, डिजाइन, विज़ुअल भाषा, कला और तकनीक सहित सभी आयाम इस भावना को प्रकट करें कि हम एक दिव्य विरासत का पुनर्पाठ कर रहे हैं, जिसे नई पीढ़ी के सामने प्रेरणास्रोत के रूप में स्थापित किया जाना है। वैदेही आर्ट गैलरी की मूल भावना यही हो कि आगन्तुक सीता माता के जीवन-सन्देश को केवल देखें ही नहीं, बल्कि उसका अनुभव करें, समझें और आत्मसात करें।
अयोध्या विकास प्राधिकरण के साथ संवाद करते हुए मुख्यमंत्री जी ने कहा कि यह परियोजना अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर के निकट वशिष्ठ भवन परिसर में विकसित की जा सकती है, जहां प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस गैलरी का विकास अयोध्या के वैश्विक सांस्कृतिक नगर के रूप में उभरने के प्रयासों का एक महत्वपूर्ण चरण होगा। इस गैलरी में मिथिला की संस्कृति, लोकपरम्परा और कला के विविध आयामों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए।



